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फिर किसानों के गले की फांस बनेगा पार्ट पेमेंट
बरेली
Updated Tue, 03 Mar 2015 01:33 AM IST
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पिछले साल की तरह इस बार भी गन्ने का पार्ट पेमेंट किसानों के गले की फांस बन सकता है। इस बार तो पार्ट पेमेंट दोगुना है। इसके फंसने पर किसान आंदोलन से लेकर कोर्ट जाने तक की चेतावनी दे रहे हैं।
यूं तो केंद्र सरकार के फेयर एंड रिमूनराइटिव प्राइज (एफआरपी) और राज्य सरकार के स्टेट एडवायज प्राइज (एसएपी) पर शुगर लॉबी अक्सर उलझती रही है। वह हर सीजन में रेट का विरोध करती है। सत्र 2013-14 में तो हद ही हो गई। आजादी के बाद सपा सरकार ने पार्ट पेमेंट की नई परंपरा डाल दी। तब एसएपी 280 रुपये के सापेक्ष 260 रुपये प्रति कुंतल गन्ना आपूर्ति के 14 दिन बाद और बाकी बचे 20 रुपये सीजन खत्म होने पर देने का वादा हुआ। तय समय पर किसी मिल ने पार्ट पेमेंट नहीं किया। दबाव के बाद जनवरी 2014 तक यह पेमेंट बमुश्किल हो सका। इस बार पार्ट पेमेंट बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया गया है। किसानों को अब और डर सता रहा है।
किसान की बात
सरकार पूंजीपतियों के दबाव में काम कर रही है। किसान गन्ने को कैश क्रॉप मानकर बोता है। इसका पेमेंट भी महीनों लटकेगा तो किसान तबाह हो जाएगा।- गजेंद्र यादव, गन्ना कृषक फरीदपुर
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किसान नेता की बात
पार्ट पेमेंट सिस्टम खत्म करने तथा गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर भाकियू 18 मार्च को दिल्ली में केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन करेगी।- चौधरी हरवीर सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष भाकियू
अधिकारी की बात
बरेली मंडल में बरखेड़ा, न्यौली और बिसौली की मिलों ने पेमेंट लटकाया था तो उन्हें पंद्रह फीसदी ब्याज के साथ देना पड़ा। इस बार मिल बंद होने के तीन महीने बाद पार्ट पेमेंट देना तय हुआ है। जो मिल पेमेंट रोकेगी उसे ब्याज के साथ कार्रवाई भी झेलनी पड़ेगी।- डॉ.दिनेश्वर मिश्र, गन्ना उपायुक्त
पहले पांच बार भुगतान रोका, कोर्ट ने दिलाया न्याय
वर्ष एसएपी दिया परिणाम
1996-97 72 70 2 रुपये कोर्ट ने दिलाए
2002-03 95 82 13 रुपये कोर्ट ने दिलाए
2003-04 तय नहीं 95 कोर्ट ने पिछले सत्र का रेट तय किया
2006-07 125 118 7 रुपये कोर्ट ने दिलाए
2007-08 125 110 15 रुपये कोर्ट ने दिलाए
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यूं तो केंद्र सरकार के फेयर एंड रिमूनराइटिव प्राइज (एफआरपी) और राज्य सरकार के स्टेट एडवायज प्राइज (एसएपी) पर शुगर लॉबी अक्सर उलझती रही है। वह हर सीजन में रेट का विरोध करती है। सत्र 2013-14 में तो हद ही हो गई। आजादी के बाद सपा सरकार ने पार्ट पेमेंट की नई परंपरा डाल दी। तब एसएपी 280 रुपये के सापेक्ष 260 रुपये प्रति कुंतल गन्ना आपूर्ति के 14 दिन बाद और बाकी बचे 20 रुपये सीजन खत्म होने पर देने का वादा हुआ। तय समय पर किसी मिल ने पार्ट पेमेंट नहीं किया। दबाव के बाद जनवरी 2014 तक यह पेमेंट बमुश्किल हो सका। इस बार पार्ट पेमेंट बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया गया है। किसानों को अब और डर सता रहा है।
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किसान की बात
सरकार पूंजीपतियों के दबाव में काम कर रही है। किसान गन्ने को कैश क्रॉप मानकर बोता है। इसका पेमेंट भी महीनों लटकेगा तो किसान तबाह हो जाएगा।- गजेंद्र यादव, गन्ना कृषक फरीदपुर
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किसान नेता की बात
पार्ट पेमेंट सिस्टम खत्म करने तथा गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर भाकियू 18 मार्च को दिल्ली में केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन करेगी।- चौधरी हरवीर सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष भाकियू
अधिकारी की बात
बरेली मंडल में बरखेड़ा, न्यौली और बिसौली की मिलों ने पेमेंट लटकाया था तो उन्हें पंद्रह फीसदी ब्याज के साथ देना पड़ा। इस बार मिल बंद होने के तीन महीने बाद पार्ट पेमेंट देना तय हुआ है। जो मिल पेमेंट रोकेगी उसे ब्याज के साथ कार्रवाई भी झेलनी पड़ेगी।- डॉ.दिनेश्वर मिश्र, गन्ना उपायुक्त
पहले पांच बार भुगतान रोका, कोर्ट ने दिलाया न्याय
वर्ष एसएपी दिया परिणाम
1996-97 72 70 2 रुपये कोर्ट ने दिलाए
2002-03 95 82 13 रुपये कोर्ट ने दिलाए
2003-04 तय नहीं 95 कोर्ट ने पिछले सत्र का रेट तय किया
2006-07 125 118 7 रुपये कोर्ट ने दिलाए
2007-08 125 110 15 रुपये कोर्ट ने दिलाए
(रेट प्रति क्विंटल में)