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ईंट का वजन घटा ग्राहकों को चपत लगा रहे भट्ठा मालिक
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 28 Feb 2018 07:42 PM IST
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अगर, आप मकान या दुकान बनवाने के लिए भट्ठे से ईंटें खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। ईंट भट्ठा मालिकों ने निर्धारित मानक से न केवल ईंट की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई कम कर दी है, बल्कि वजन भी 500 से 900 ग्राम तक कम कर दिया है। मगर दाम पूरे वसूले जा रहे हैं। इस तरह पांच रुपये की एक ईंट खरीदने पर ग्राहकों को लगभग एक रुपये का चूना लग रहा है। तीन सौ भट्ठों से हर माह औसतन 10 करोड़ सप्लाई होने वाली ईंटों में ग्राहकों से 10 करोड़ रुपये ज्यादा वसूला जा रहा है।
शहर के एक सिविल इंजीनियर के अनुसार दोमट मिट्टी से बनने वाली ईंट का निर्धारित मानक 3.0 से 3.5 किलोग्राम वजन का है। इतने वजन की ईंट की लंबाई नौ इंच, चौड़ाई 4.5 इंच और मोटाई 2.75 इंच रखी जाती है। इस निर्धारित मानक के विपरीत भट्ठा मालिक 2.60 ग्राम वजन की ईंट आठ इंच लंबाई, चार इंच चौड़ाई और 2.75 इंच मोटाई में ईंटें बनाकर बेच रहे हैं। प्रत्येक ईंट का वजन (अव्वल, दोयम और पीला का) 400 ग्राम से लेकर 900 ग्राम तक कम है। यानी कि एक ईंट खरीदने पर ग्राहक को कम से कम एक रुपये से लेकर सवा रुपये तक का चूना लगता है। बरेली में 300 भट्ठों से हर माह सरकारी और गैर सरकारी निर्माण के लिए औसतन 10 करोड़ ईंट सप्लाई होती है। ग्राहकों को कम वजन की ईंट मिलने के बाद भी हर माह लगभग 10 करोड़ रुपये अधिक देने पड़ते हैं।
ईंट की मजबूती भी कम
कांट्रेक्टर आनंद अग्रवाल का कहना है कि चिकनी या दोमट मिट्टी से बनी ईंट ज्यादा मजबूत होती है। इसके विपरीत रेतीली या बलुई मिट्टी की ईंट कमजोर होती है। अधिकांश भट्टा मालिक बलुई या रेतीली मिट्टी की ईंट बनाकर बेच रहे हैं। इससे वर्तमान में बनने वाले सरकारी या गैर सरकारी भवनों में पहले जैसी मजबूती नहीं आ पाती। हालांकि जीएसटी लागू होने के बाद ईंट का कारोबार कम हो गया है। हालांकि जो ईंट भट्ठे निर्धारित मानक की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई के अलावा पूरे वजन की ईंट बेच रहे हैं, वह ग्राहकों से 5500 से छह हजार रुपये प्रति हजार रुपये तक के रेट वसूलते हैं।
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हमने ईंट के रेट काफी कम कर दिए हैं। अब 35 सौ से 4 हजार रुपये प्रति हजार ईंट बिक पा रही है। भट्ठों पर ईंट निर्धारित मानक में ही बन रही है। अब मानक वही है, जो हम बना रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद ईंटों की बिक्री काफी कम है। आफताब अहमद, अध्यक्ष ईंट भट्ठा एसोसिएशन
ईंट भट्ठे निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं चल रहे हैं। बहुत से भट्ठों के खनन का परमीशन नहीं है। इसके लिए हमने एडीएम फाइनेंस से कमेटी बनाकर जांच कराने को कहा है। भट्ठा मालिकों को मानक पूरे कर सरकार को राजस्व देना पड़ेगा। डा. पीवी जगनमोहन, कमिश्नर
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शहर के एक सिविल इंजीनियर के अनुसार दोमट मिट्टी से बनने वाली ईंट का निर्धारित मानक 3.0 से 3.5 किलोग्राम वजन का है। इतने वजन की ईंट की लंबाई नौ इंच, चौड़ाई 4.5 इंच और मोटाई 2.75 इंच रखी जाती है। इस निर्धारित मानक के विपरीत भट्ठा मालिक 2.60 ग्राम वजन की ईंट आठ इंच लंबाई, चार इंच चौड़ाई और 2.75 इंच मोटाई में ईंटें बनाकर बेच रहे हैं। प्रत्येक ईंट का वजन (अव्वल, दोयम और पीला का) 400 ग्राम से लेकर 900 ग्राम तक कम है। यानी कि एक ईंट खरीदने पर ग्राहक को कम से कम एक रुपये से लेकर सवा रुपये तक का चूना लगता है। बरेली में 300 भट्ठों से हर माह सरकारी और गैर सरकारी निर्माण के लिए औसतन 10 करोड़ ईंट सप्लाई होती है। ग्राहकों को कम वजन की ईंट मिलने के बाद भी हर माह लगभग 10 करोड़ रुपये अधिक देने पड़ते हैं।
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ईंट की मजबूती भी कम
कांट्रेक्टर आनंद अग्रवाल का कहना है कि चिकनी या दोमट मिट्टी से बनी ईंट ज्यादा मजबूत होती है। इसके विपरीत रेतीली या बलुई मिट्टी की ईंट कमजोर होती है। अधिकांश भट्टा मालिक बलुई या रेतीली मिट्टी की ईंट बनाकर बेच रहे हैं। इससे वर्तमान में बनने वाले सरकारी या गैर सरकारी भवनों में पहले जैसी मजबूती नहीं आ पाती। हालांकि जीएसटी लागू होने के बाद ईंट का कारोबार कम हो गया है। हालांकि जो ईंट भट्ठे निर्धारित मानक की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई के अलावा पूरे वजन की ईंट बेच रहे हैं, वह ग्राहकों से 5500 से छह हजार रुपये प्रति हजार रुपये तक के रेट वसूलते हैं।
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हमने ईंट के रेट काफी कम कर दिए हैं। अब 35 सौ से 4 हजार रुपये प्रति हजार ईंट बिक पा रही है। भट्ठों पर ईंट निर्धारित मानक में ही बन रही है। अब मानक वही है, जो हम बना रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद ईंटों की बिक्री काफी कम है। आफताब अहमद, अध्यक्ष ईंट भट्ठा एसोसिएशन
ईंट भट्ठे निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं चल रहे हैं। बहुत से भट्ठों के खनन का परमीशन नहीं है। इसके लिए हमने एडीएम फाइनेंस से कमेटी बनाकर जांच कराने को कहा है। भट्ठा मालिकों को मानक पूरे कर सरकार को राजस्व देना पड़ेगा। डा. पीवी जगनमोहन, कमिश्नर