Fake Degree Case: खुसरो कॉलेज प्रबंधन ने एक छात्र को थमा दीं दो डिग्री, एक रुड़की तो दूसरी भुवनेश्वर की
खुसरो कॉलेज से जुड़े मामलों की जांच एसआईटी कर रही है। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कॉलेज प्रबंधन ने रेवड़ी की तरह फर्जी डिग्रियां बांटी थीं। इसके एवज में छात्रों से मोटी रकम वसूली गई।
विस्तार
बरेली में खुसरो कॉलेज के चेयरमैन शेर अली जाफरी और उसके साझीदार सपा नेता विजय शर्मा ने रेवड़ी की तरह फर्जी डिग्रियां बांटीं। वे खुद ही डिग्रियां छापते थे। शेर अली का बेटा फिरोज जाफरी उनको बांटकर रुपये बटोरता था। एसआईटी की जांच में ये तथ्य सामने आए हैं।
एक छात्र को दो डिग्रियां दे दी गईं। पीड़ित छात्र के मुताबिक, उसे पहले भुवनेश्वर के सरस्वती कॉलेज की डिग्री दी गई। उसने नौकरी के लिए डिग्री लगाई तो उसे फर्जी बता दिया गया। उसने रिपोर्ट लिखाने की चेतावनी दी तो फिरोज ने थोड़े और रुपये लेकर उसे रुड़की के कॉलेज के नाम से डीफार्मा की डिग्री थमा दी।
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इसी तरह एक छात्र ने नामांकन वर्ष 2021 में कराया था पर उसे जब डिग्री दी गई तो उसमें नामांकन 2019 में दिखाया गया था। एसआईटी प्रभारी मानुष पारीक ने बताया कि डीफार्मा के छात्रों से फीस खुसरो कॉलेज के नाम पर ली जाती थी और उन्हें डिग्री दूर-दराज के संस्थानों से दिलाने का दावा करते थे।
बिना कॉलेज आए पढ़ाई करने की फीस और भी ज्यादा थी। जिन संस्थानों की मार्कशीट छात्रों के पास मिलीं, टीम ने वहां जाकर पड़ताल की। पता लगा कि उन संस्थानों से खुसरो कॉलेज का कोई अनुबंध नहीं है।
प्रॉपर्टी में लगाई ठगी की रकम
शेर अली जाफरी ने पुलिस को बताया कि छात्रों से डीफार्मा की फीस अपने द्वारा छपवाए खुसरो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा खुसरो पैरामेडिकल कॉलेज की रसीद पर लेते थे। फीस नकद लेने के साथ ही एकाउंट में भी रुपये डलवाए जाते थे। वह, उसका बेटा फिरोज अली जाफरी व विजय शर्मा डीफार्मा के हर छात्र से 2.30 लाख रुपये लेते थे।
छात्र जब पढ़ने आते थे तो उनको बताया जाता था कि अभी क्लास नहीं चल रही है, बाद में आना। परीक्षा के संबंध में पूछने पर कह देते थे कि तुम चिंता मत करो, हम पास करा देंगे। बाद में तीनों अपने कॉलेज में ही कूटरचित प्रमाणपत्र व अंकपत्र तैयार कर छात्रों को दे देते थे। बताया कि छात्रों से ली रकम उन्होंने प्रॉपर्टी में लगा दी है।
इन संस्थानों के नाम से दी फर्जी डिग्री
एसआईटी की जांच में प्रकाश में आया है कि खुसरो कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों को ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, मदरहुड विश्वविद्यालय रुड़की, उत्तराखंड तथा छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के नाम से डीफार्मा की फर्जी डिग्रियां दी थीं। वैसे खुसरो डिग्री कॉलेज में डीफार्मा के लिए कोई फैकल्टी या क्लासरूम उपलब्ध नहीं है।
ये सामान हुए बरामद
शास्त्रीनगर निवासी पिता-पुत्र को खुसरो कॉलेज सनैया रानी से गिरफ्तार किया गया। इनके कब्जे से छात्रों का प्रवेश रजिस्टर, फीस बुकलेट, डॉ. विजय शर्मा को दी रकम का रजिस्टर, बैंक स्टेटमेंट आदि बरामद किया गया है।
निजी संस्थानों में मिल जाती थी नौकरी
पूछताछ में छात्रों ने बताया कि वह करीब पौने तीन लाख रुपये खर्च करके डीफार्मा की डिग्री पाते थे तो वह उसे असली ही मानते थे। प्राइवेट संस्थानों में डिग्री लगाने पर उसकी ज्यादा पड़ताल नहीं होती थी और ऐसे कागजातों से कई लोग नौकरी भी कर रहे हैं। सरकारी संस्थान में नौकरी या मेडिकल स्टोर के लाइसेंस में डिग्री लगाने पर सत्यापन में फर्जीवाड़े की हकीकत पता लगती थी। कई छात्रों को जाफरी ही अपने कथित अस्पताल में मामूली वेतन पर नौकरी दे देता था, फिर अनुभव के आधार पर वे दूसरे अस्पतालों में चले जाते थे।
सपा नेता विजय शर्मा पर घोषित होगा इनाम
जाफरी पिता-पुत्र को जेल भेजने के बाद एसआईटी का अगला निशाना विजय शर्मा पर है। खुद को डॉक्टर व सपा नेता बताने वाला विजय शर्मा फिलहाल फरार हो गया है। एसएसपी आज-कल में ही उसके ऊपर इनाम घोषित कर सकते हैं।