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खनन माफिया ने नेताजी की दोस्ती में खूब कमाया.. दुश्मनी ने जेल पहुंचाया
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बहेड़ी। नाजायज धंधों की दुनिया में लोग एक-दूसरे के करीब दिखते तो हैं लेकिन असल में ऐसा नहीं होता। मसला फायदे-नुकसान की आता है तो दोस्तों को दुश्मन बनते देर नहीं लगती। नेताजी को भी यह बात समझ में आई लेकिन जरा देर से। जिस जिला पंचायत सदस्य को उन्होंने अपने इलाके में अवैध खनन की बेताज बादशाही हासिल कराई, उसी ने कुछ हालात के चलते धंधा कमजोर पड़ा तो उन्हें कमजोर नेता बताकर उनकी ‘धमक’ पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। बात नेताजी तक पहुंची तो दुश्मनी ठन गई। पहले खनन का धंधा पूरी तरह बंद हुआ, फिर एससी-एसटी एक्ट के तीन महीने पुराने मामले में चुपचाप बैठी पुलिस हाथ धोकर जिला पंचायत सदस्य के पीछे पड़ गई। लाख कोशिश के बावजूद नेताजी से माफी नहीं मिली तो शुक्रवार को जिला पंचायत सदस्य ने अदालत में सरेंडर कर दिया और जेल चला गया।
सूबे में नई सरकार बनने से पहले जिला पंचायत सदस्य की नजदीकी सपा नेताओं से थी। सपा के समय में ही वह अवैध खनन के धंधे में घुसा। विधानसभा चुनाव में सपा ने गोता खाया तो उसने पाला बदलकर नेताजी का दामन थाम लिया। अवैध खनन पर उसकी पकड़ देखकर नेताजी ने उसे हाथोंहाथ लिया। इस जुगलबंदी ने बहेड़ी में अवैध खनन को करोड़ों के धंधे में बदल दिया लेकिन इसी बीच बदायूं के एक बड़े नेता की भी नजर बहेड़ी में परवान चढ़ते इस धंधे पर पड़ी तो नेताजी के लिए मुश्किलें खड़ी होनी शुरू हो गईं। हिस्सेदारी से धंधा घटकर आधा रह गया। बदायूं के नेताजी के आगे कद छोटा पड़ने से पुलिस भी साथ देने से कतराने लगी। इसी बीच पुलिस ने नेताजी के एक करीबी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की तो कोतवाली में जमकर हंगामा हुआ। पुलिस सीधे-सीधे उनके खिलाफ खड़ी हो गईतो नेताजी को इज्जत बचानी मुश्किल पड़ गई। जैसे-तैसे उन्होंने तत्कालीन इंस्पेक्टर को तो लाइनहाजिर करा दिया लेकिन इस उठापटक में अवैध खनन का मामला शासन तक पहुंच गया और रहा-सहा धंधा भी चौपट हो गया।
जिला पंचायत सदस्य ने कुछ समय तो हालात फिर माकूल होने का इंतजार किया लेकिन नेताजी दोबारा जोखिम लेने को तैयार नहीं हुए तो उसका भी सब्र जवाब दे गया। पिछले दिनों उसने नेताजी के ही कुछ नजदीकी लोगों के सामने उनको भला-बुरा कह दिया, जिसकी रिकॉर्डिंग अगले ही दिन नेताजी के पास पहुंच गई। जिला पंचायत सदस्य के लिए काफी बदनामी मोल ले चुके नेताजी भी उसकी इस हरकत पर बुरी तरह भड़क गए। अंजाम यह हुआ कि पहले तो अवैध खनन का धंधा पूरी तरह बंद हुआ, फिर पुलिस ने जिला पंचायत सदस्य के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के मामले में जारी हुआ वह पुराना वारंट भी निकाल लिया, जिसे वह महीनों से दबाए बैठी थी। दबिशें पड़नी शुरू हुईं तो जिला पंचायत के सामने पुलिस के हाथ से बचने के लिए अदालत में सरेंडर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। शुक्रवार को उसने सरेंडर कर दिया। अदालत ने उसे जेल भेज दिया।
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इंस्पेक्टर बोले- खनन माफिया को छोड़ेंगे नहीं.. रिमांड पर लेंगे
इंस्पेक्टर राम अवतार सिंह ने बताया कि जिला पंचायत सदस्य के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में एक वारंट जारी हुआ था। उसकी गिरफ्तारी के लिए कई बार सिंह गौटिया में दबिश भी दी गई थी लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं चढ़ा। अब शुक्रवार को उसने अदालत में सरेंडर कर दिया है। इंस्पेक्टर ने बताया कि जिला पंचायत सदस्य का नाम खनन माफिया के तौर पर दर्ज होने के साथ और भी कई मामलों में शामिल है। पुलिस उसे अदालत से रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी।
कही भी कराना हो पटान.. बस नाम था काफी
एक समय में हालात ये थे कि कस्बे से लेकर देहात तक जिसे भी पटान कराने के लिए मिट्टी या रेत की जरूरत होती थी, उसे इसके लिए आखिरकार जिला पंचायत सदस्य की शरण में ही आना होता था। अगर कोई और इंतजाम किया तो अवैध खनन में गिरफ्तारी तय होती थी। पुलिस की सांठगांठ से चल रहे इस धंधे को तब लगाम लगी जब नेताजी और तत्कालीन इंस्पेक्टर के बीच टकराव के बाद अमर उजाला ने इस धंधे की परतें उधेड़ीं। अवैध खनन काफी हद तक बंद हो गया और फिर काफी कोशिशों के बाद भी शुरू नहीं हो पाया। इसी पर भड़का जिला पंचायत सदस्य कार में कहीं जाते हुए नेताजी और उनके रिश्तेदारों को गाली दे बैठा और इसकी रिकार्डिंग किसी ने नेताजी तक पहुंचा दी। इसके बाद मामला बुरी तरह बिगड़ गया और पुलिस उसके पीछे पड़ गई।
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सूबे में नई सरकार बनने से पहले जिला पंचायत सदस्य की नजदीकी सपा नेताओं से थी। सपा के समय में ही वह अवैध खनन के धंधे में घुसा। विधानसभा चुनाव में सपा ने गोता खाया तो उसने पाला बदलकर नेताजी का दामन थाम लिया। अवैध खनन पर उसकी पकड़ देखकर नेताजी ने उसे हाथोंहाथ लिया। इस जुगलबंदी ने बहेड़ी में अवैध खनन को करोड़ों के धंधे में बदल दिया लेकिन इसी बीच बदायूं के एक बड़े नेता की भी नजर बहेड़ी में परवान चढ़ते इस धंधे पर पड़ी तो नेताजी के लिए मुश्किलें खड़ी होनी शुरू हो गईं। हिस्सेदारी से धंधा घटकर आधा रह गया। बदायूं के नेताजी के आगे कद छोटा पड़ने से पुलिस भी साथ देने से कतराने लगी। इसी बीच पुलिस ने नेताजी के एक करीबी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की तो कोतवाली में जमकर हंगामा हुआ। पुलिस सीधे-सीधे उनके खिलाफ खड़ी हो गईतो नेताजी को इज्जत बचानी मुश्किल पड़ गई। जैसे-तैसे उन्होंने तत्कालीन इंस्पेक्टर को तो लाइनहाजिर करा दिया लेकिन इस उठापटक में अवैध खनन का मामला शासन तक पहुंच गया और रहा-सहा धंधा भी चौपट हो गया।
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जिला पंचायत सदस्य ने कुछ समय तो हालात फिर माकूल होने का इंतजार किया लेकिन नेताजी दोबारा जोखिम लेने को तैयार नहीं हुए तो उसका भी सब्र जवाब दे गया। पिछले दिनों उसने नेताजी के ही कुछ नजदीकी लोगों के सामने उनको भला-बुरा कह दिया, जिसकी रिकॉर्डिंग अगले ही दिन नेताजी के पास पहुंच गई। जिला पंचायत सदस्य के लिए काफी बदनामी मोल ले चुके नेताजी भी उसकी इस हरकत पर बुरी तरह भड़क गए। अंजाम यह हुआ कि पहले तो अवैध खनन का धंधा पूरी तरह बंद हुआ, फिर पुलिस ने जिला पंचायत सदस्य के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के मामले में जारी हुआ वह पुराना वारंट भी निकाल लिया, जिसे वह महीनों से दबाए बैठी थी। दबिशें पड़नी शुरू हुईं तो जिला पंचायत के सामने पुलिस के हाथ से बचने के लिए अदालत में सरेंडर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। शुक्रवार को उसने सरेंडर कर दिया। अदालत ने उसे जेल भेज दिया।
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इंस्पेक्टर बोले- खनन माफिया को छोड़ेंगे नहीं.. रिमांड पर लेंगे
इंस्पेक्टर राम अवतार सिंह ने बताया कि जिला पंचायत सदस्य के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में एक वारंट जारी हुआ था। उसकी गिरफ्तारी के लिए कई बार सिंह गौटिया में दबिश भी दी गई थी लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं चढ़ा। अब शुक्रवार को उसने अदालत में सरेंडर कर दिया है। इंस्पेक्टर ने बताया कि जिला पंचायत सदस्य का नाम खनन माफिया के तौर पर दर्ज होने के साथ और भी कई मामलों में शामिल है। पुलिस उसे अदालत से रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी।
कही भी कराना हो पटान.. बस नाम था काफी
एक समय में हालात ये थे कि कस्बे से लेकर देहात तक जिसे भी पटान कराने के लिए मिट्टी या रेत की जरूरत होती थी, उसे इसके लिए आखिरकार जिला पंचायत सदस्य की शरण में ही आना होता था। अगर कोई और इंतजाम किया तो अवैध खनन में गिरफ्तारी तय होती थी। पुलिस की सांठगांठ से चल रहे इस धंधे को तब लगाम लगी जब नेताजी और तत्कालीन इंस्पेक्टर के बीच टकराव के बाद अमर उजाला ने इस धंधे की परतें उधेड़ीं। अवैध खनन काफी हद तक बंद हो गया और फिर काफी कोशिशों के बाद भी शुरू नहीं हो पाया। इसी पर भड़का जिला पंचायत सदस्य कार में कहीं जाते हुए नेताजी और उनके रिश्तेदारों को गाली दे बैठा और इसकी रिकार्डिंग किसी ने नेताजी तक पहुंचा दी। इसके बाद मामला बुरी तरह बिगड़ गया और पुलिस उसके पीछे पड़ गई।