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छापा मारने आ रहे हैं.. खनन रोक दो और भाग जाओ
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बहेड़ी। अवैध खनन की कमाई ‘नेता जी’ और पुलिस दोनों को ऐसी रास आई है कि खनन रुकने में नहीं आ रहा है। शासन तक मामला पहुंचने के बाद किच्छा नदी पर खनन रुका तो माफिया ने अब सकरस नदी के घाट खोद डाले। तीन दिन पहले आधी रात को सकरस नदी में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की सूचना मिली तो एसडीएम ने पुलिस को छापा मारने का आदेश दिया। पुलिस छापा मारने निकली तो लेकिन माफिया को सूचना देकर पहले ही खनन बंद करा दिया। रास्ते में रेत-मिट्टी से भरी जो ट्रॉली आती मिलीं, उन्हें भी नजरंदाज कर दिया। बहेड़ी पुलिस की इस करतूत पर भड़की एसडीएम ने एसएसपी से शिकायत की है।
बहेड़ी में बेलगाम खनन माफिया सिरदर्द बन गए हैं। शासन की सख्ती के बाद उन्होंने बमुश्किल किच्छा नदी का पीछा छोड़ा तो अब सकरस नदी पर नजरें गड़ा दी हैं। तीन दिन पहले एसडीएम ममता मालवीय को सूचना मिली कि आखा और सकरस गांव के बीच नदी से खनन किया जा रहा है। इस पर एसडीएम ने रात में ही इंस्पेक्टर को फोन कर खनन पकड़ने के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस की एक जीप नदेली रोड पर पहुंची तो उसके सामने से ही खनन कर लाई जा रही मिट्टी की कई ट्रालियां निकल गई लेकिन पुलिस ने उन्हें नहीं रोका। उल्टे फोन कर खनन माफिया को वहां से हटने को कह दिया। कुछ देर बाद मौके पर पहुंचकर एसडीएम को फोन कर बताया कि सकरस नदी के घाट पर कोई कोई नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक सकरस गांव की नदी में खनन कर केशवपुरम, बाईपास रोड पर प्लाटों के पटान कराया जा रहा था। अगले दिन एसडीएम ने राजस्व विभाग की टीम के साथ हलका लेखपाल को मौके पर भेजकर जांच कराई। जांच रिपोर्ट बनाकर एडीएम को भेज दी गई है। इसके बाद नदी में रात में खनन करने वालों को चिह्नित करने में राजस्व प्रशासन जुट गया है। एसडीएम का कहना है कि सभी माफिया के खिलाफ संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। पुलिस के रुख से एसडीएम भी बेहद नाराज हैं।
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सकरस नदी में हुए खनन की जांच की गई है। अब किसी को बख्शा नहीं जाने वाला, चाहे कोई कितना बड़ा रसूखदार हो। जब खनन पर रोक है तो फिर कैसे खनन किया जा रहा है। मैं खुद रात में खनन पकड़ने के लिए निकलूंगी। खनन कहां पकड़ना है, इसकी सूचना भी किसी को नही दी जाएगी। - ममता मालवीय, एसडीएम बहेड़ी
बाढ़ की आशंका बढ़ा रहे माफिया
खनन माफिया आसपास के गांवों के लिए संकट लगातार बढ़ाते जा रहे हैं। किच्छा के बाद अब सकरस नदी में भी खनन होने से पास के सकरस और आखा गांव में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। दोनों गांवों के लोग इसको लेकर काफी दहशत में हैं लेकिन दबंग खनन माफिया का विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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बहेड़ी में बेलगाम खनन माफिया सिरदर्द बन गए हैं। शासन की सख्ती के बाद उन्होंने बमुश्किल किच्छा नदी का पीछा छोड़ा तो अब सकरस नदी पर नजरें गड़ा दी हैं। तीन दिन पहले एसडीएम ममता मालवीय को सूचना मिली कि आखा और सकरस गांव के बीच नदी से खनन किया जा रहा है। इस पर एसडीएम ने रात में ही इंस्पेक्टर को फोन कर खनन पकड़ने के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस की एक जीप नदेली रोड पर पहुंची तो उसके सामने से ही खनन कर लाई जा रही मिट्टी की कई ट्रालियां निकल गई लेकिन पुलिस ने उन्हें नहीं रोका। उल्टे फोन कर खनन माफिया को वहां से हटने को कह दिया। कुछ देर बाद मौके पर पहुंचकर एसडीएम को फोन कर बताया कि सकरस नदी के घाट पर कोई कोई नहीं है।
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सूत्रों के मुताबिक सकरस गांव की नदी में खनन कर केशवपुरम, बाईपास रोड पर प्लाटों के पटान कराया जा रहा था। अगले दिन एसडीएम ने राजस्व विभाग की टीम के साथ हलका लेखपाल को मौके पर भेजकर जांच कराई। जांच रिपोर्ट बनाकर एडीएम को भेज दी गई है। इसके बाद नदी में रात में खनन करने वालों को चिह्नित करने में राजस्व प्रशासन जुट गया है। एसडीएम का कहना है कि सभी माफिया के खिलाफ संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। पुलिस के रुख से एसडीएम भी बेहद नाराज हैं।
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सकरस नदी में हुए खनन की जांच की गई है। अब किसी को बख्शा नहीं जाने वाला, चाहे कोई कितना बड़ा रसूखदार हो। जब खनन पर रोक है तो फिर कैसे खनन किया जा रहा है। मैं खुद रात में खनन पकड़ने के लिए निकलूंगी। खनन कहां पकड़ना है, इसकी सूचना भी किसी को नही दी जाएगी। - ममता मालवीय, एसडीएम बहेड़ी
बाढ़ की आशंका बढ़ा रहे माफिया
खनन माफिया आसपास के गांवों के लिए संकट लगातार बढ़ाते जा रहे हैं। किच्छा के बाद अब सकरस नदी में भी खनन होने से पास के सकरस और आखा गांव में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। दोनों गांवों के लोग इसको लेकर काफी दहशत में हैं लेकिन दबंग खनन माफिया का विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।