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काम नहीं अब बजट की बंदरबांट होगी
बरेली
Updated Sun, 25 Jan 2015 01:41 AM IST
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जिला योजना में काम हो या न हो, बंदरबांट के पूरे आसार हैं। 203 करोड़ की जिला योजना में अभी तक महज 38 करोड़ रुपये ही मिले हैं उसमें भी कई विभागों ने रकम नाकाफी बताते हुए उसे प्रयोग ही नहीं किया है। वह भी तब जब वित्तीय वर्ष खत्म होने में महज दो महीने शेष बचे हैं। 27 करोड़ रुपये डीआरडीए को जरूर मिले हैं जिसे सरकार ने मनरेगा के राज्यांश के रूप में दिया है।
अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीडब्ल्यूडी को सड़कों के लिए 53 करोड़ के बजट में से तीन महीने पहले केवल दो करोड़ रुपये मिले। सड़क इसलिए नहीं बन पा रही हैं क्योंकि इस राशि से एक-दो सड़क ही बन सकती हैं और उसके लिए भी नेताओं में खींचतान है। स्वास्थ्य विभाग को भी नए पीएचसी-सीएचसी बनाने और पुरानों की मरम्मत के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ लेकिन मिले सिर्फ एक करोड़। नए स्वास्थ्य केंद्र बनना तो दूर, दो महीने में पुराने केंद्रों की ही मरम्मत पूरी हो जाए तो गनीमत है। यानी रविवार को जिला योजना के जिन कामों की समीक्षा प्रभारी मंत्री अंबिका चौधरी करेंगे वह हुए ही नहीं हैं।
ऐसे ही हालात अन्य विभागों के भी हैं। समाज कल्याण विभाग ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए 15 करोड़ रुपये मांगा लेकिन मिले सिर्फ तीन करोड़। विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है कि बाकी पैसा मिले तो छात्रवृत्ति बांटी जाए। चालू वित्तीय वर्ष के लिए जिला योजना में 203 करोड़ रुपये के सापेक्ष अब तक सिर्फ 38 करोड़ रुपये ही मिले हैं और उसमें भी खींचतान मची हुई है। और पैसा आ भी जाए तो काम होने मुश्किल हैं। चालू वित्तीय वर्ष में महज दो महीने शेष हैं। ऐसे में पैसे को आननफानन में खर्च करने के लिए बंदरबांट जैसे ही हालात होंगे। स्वास्थ्य विभाग का ही उदाहरण लें, टेंडर से लेकर निर्माण प्रक्रिया तक में 90 दिन का समय लग जाएगा।
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नहीं बोई जा सकी हरियाली
जिला योजना में पौधरोपण के लिए वन विभाग को दो करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। जुलाई-अगस्त में राशि मिलती तो पौधरोपण हो जाता लेकिन अब समय निकल चुका है। पैसा मिले तो भी पौधरोपण नहीं हो सकेगा।
इंसेट...
पैसों का इंतजार
विभाग बजट काम
स्वास्थ्य 20 करोड़ सीएससी-पीएससी निर्माण
पर्यटन 3 करोड़ पर्यटन सेवा केंद्र का निर्माण
पीडब्लूडी 51 करोड़ सड़कों के निर्माण
पंचायत विभाग 24 करोड़ खड़ंजों का निर्माण
समाज कल्याण 12 करोड़ छात्रवृत्ति
किसे अब तक कितना मिला
डीआरडीए 27 करोड़
स्वास्थ्य विभाग एक करोड़
समाज कल्याण तीन करोड़
पीडब्लूडी दो करोड़
बाल विकास दो करोड़
सिंचाई तीन करोड़
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अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीडब्ल्यूडी को सड़कों के लिए 53 करोड़ के बजट में से तीन महीने पहले केवल दो करोड़ रुपये मिले। सड़क इसलिए नहीं बन पा रही हैं क्योंकि इस राशि से एक-दो सड़क ही बन सकती हैं और उसके लिए भी नेताओं में खींचतान है। स्वास्थ्य विभाग को भी नए पीएचसी-सीएचसी बनाने और पुरानों की मरम्मत के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ लेकिन मिले सिर्फ एक करोड़। नए स्वास्थ्य केंद्र बनना तो दूर, दो महीने में पुराने केंद्रों की ही मरम्मत पूरी हो जाए तो गनीमत है। यानी रविवार को जिला योजना के जिन कामों की समीक्षा प्रभारी मंत्री अंबिका चौधरी करेंगे वह हुए ही नहीं हैं।
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ऐसे ही हालात अन्य विभागों के भी हैं। समाज कल्याण विभाग ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए 15 करोड़ रुपये मांगा लेकिन मिले सिर्फ तीन करोड़। विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है कि बाकी पैसा मिले तो छात्रवृत्ति बांटी जाए। चालू वित्तीय वर्ष के लिए जिला योजना में 203 करोड़ रुपये के सापेक्ष अब तक सिर्फ 38 करोड़ रुपये ही मिले हैं और उसमें भी खींचतान मची हुई है। और पैसा आ भी जाए तो काम होने मुश्किल हैं। चालू वित्तीय वर्ष में महज दो महीने शेष हैं। ऐसे में पैसे को आननफानन में खर्च करने के लिए बंदरबांट जैसे ही हालात होंगे। स्वास्थ्य विभाग का ही उदाहरण लें, टेंडर से लेकर निर्माण प्रक्रिया तक में 90 दिन का समय लग जाएगा।
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जिला योजना में पौधरोपण के लिए वन विभाग को दो करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। जुलाई-अगस्त में राशि मिलती तो पौधरोपण हो जाता लेकिन अब समय निकल चुका है। पैसा मिले तो भी पौधरोपण नहीं हो सकेगा।
इंसेट...
पैसों का इंतजार
विभाग बजट काम
स्वास्थ्य 20 करोड़ सीएससी-पीएससी निर्माण
पर्यटन 3 करोड़ पर्यटन सेवा केंद्र का निर्माण
पीडब्लूडी 51 करोड़ सड़कों के निर्माण
पंचायत विभाग 24 करोड़ खड़ंजों का निर्माण
समाज कल्याण 12 करोड़ छात्रवृत्ति
किसे अब तक कितना मिला
डीआरडीए 27 करोड़
स्वास्थ्य विभाग एक करोड़
समाज कल्याण तीन करोड़
पीडब्लूडी दो करोड़
बाल विकास दो करोड़
सिंचाई तीन करोड़