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सीएआरआई में अब प्रिजर्व होगी जापानी बटेर

Tue, 15 Sep 2015 01:08 AM IST
बरेली
बरेली Updated Tue, 15 Sep 2015 01:08 AM IST
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बरेली। सीएआरआई में अब जापानी बटेर को प्रिजर्व किया जाएगा। इसके लिए सीएआरआई में आदेश आ चुके हैं लेकिन आदेश में यह स्पष्ट नहीं है कि बटेर पर आगे शोध होगा या नहीं। पिछले साल
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इस पर शोध किया जाएगा, या नहीं, यह इस आदेश में स्पष्ट नहीं है। सिर्फ इतना ही लिखा है कि जापानी बटेर को संरक्षित किया जाए। उसकी संख्या घटने न पाए।
सीएआरआई में पिछले साल मंत्रालय के आदेश पर ही बटेर पर शोध कार्य रोक दिया गया था। कई बार संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से मंत्रालय और सांसदों से कहने के बाद इस पर विधान सभा में भी प्रश्न पूछा गया। बटेर पर काम बंद करने के विरोध में दक्षिण भारत के सांसद भी आ गए। एक तरफ इस पर बहस चल रही थीं, वहीं दूसरी ओर मंत्रालय ने आनन-फानन में जापानी बटेर को प्रिजर्व करने का आदेश जारी कर दिया। अब इस पर शोध हो पाएगा या नहीं, संस्थान को यह तो नहीं पता, लेकिन उसके जर्म प्लाज्म को संरक्षित करने में लग गए हैं। वैज्ञानिकों का पत्र व्यवहार अभी भी मंत्रालय के साथ चल रहा है। वैज्ञानिक लगातार यह कह रहे हैं कि उन्हें जापानी बटेर पर शोध करने की अनुमति दी जाए, क्योंकि इस पर तमाम वैज्ञानिकों और शोध छात्रों का भविष्य टिका हुआ है।
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40 सालों से सीएआरआई में बटेर पर हो रहा शोध
सीएआरआई सबसे पहले भारत में जापानी बटेर पालतू पोल्ट्री प्रजाति के रूप में यूएसए, जर्मनी और कोरिया से 1974 से यूएनडीपी (यूनाटेड नेशंन्स डेवलपमेंट प्रोग्राम) के अंतर्गत लाया था। पिछले 40 सालों से सीएआरआई ने विभिन्न प्रकार की अधिक उत्पादन करने वाली बटेर के विकास और प्रसार में बड़ी मात्रा में वित्तीय, तकनीकी/वैज्ञानिक और जनशक्ति पर निवेश किया है। सीएआरआई ने जंगली बटेर से अलग पंखों वाली बटेर प्लूमेज का उत्पादन करने में भी कामयाबी हासिल की है। वर्तमान में जापानी बटेर संस्थानों द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रजाति है। जापानी बटेर के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण शोध और विकास योगदानों के चलते काउंसिल द्वारा संस्थान के वैज्ञानिकों को 1987, 1997 और 2007 में प्रतिष्ठित आईसीएआर आउटस्टैंडिंग टीम रिसर्च अवार्ड दिया है। इसके अतिरिक्त संस्थान को बटेर पर शोध करने के साथ ही अन्य पोल्ट्री प्रजातियों पर महत्वपूर्ण शोध के लिए तीन बार 1991, 1997 और 2002 में नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल अवार्ड भी मिल चुका है। बहुत सारे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में बटेर से संबंधित संबंधित लेख और शोध भी प्रकाशित हुए हैं। संस्थान द्वारा तकनीक हस्तांतरण और व्यावसायीकरण से संबंधित दो ट्रेड मार्क पंजीकृत कराए गए हैं।
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ये हैं जापानी बटेर की खूबियां
जापानी बटेर  बहुत सी सामान्य पोल्ट्री बीमारियों के प्रति प्रतिरोध क्षमता होती है, इसके चलते उन्हें बीमारियां ही नहीं होती है। इसलिए, बड़ी संख्या में छोटे किसानों उन्हें आजीविका में अपनाया है। ऐसे किसान संस्थान से सुझाव और सहयोग लेते हैं।
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