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UP News: बरेली में जेई वायरस का खतरा, बच्चा लकवाग्रस्त; दो गांवों में 90 फीसदी सूअर संक्रमित, अलर्ट जारी

Sat, 01 Nov 2025 11:08 AM IST
मुकेश कुमार अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 01 Nov 2025 11:08 AM IST
सार

बरेली जिले के दमखोदा ब्लॉक क्षेत्र में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) से पीड़ित बच्चा लकवाग्रस्त हो गया। इसके बाद जेई फैलने की आशंका पर दो गांवों में सूअरों के सैंपल लेकर आईवीआरआई में जांच हुई। इसमें 90 फीसदी सूअर संक्रमित पाए गए हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग ने इलाके में अलर्ट जारी किया है।

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Japanese encephalitis victim child paralyzed health department alert in bareilly
सूअर बाड़ा का निरीक्षण करती टीम - फोटो : विभाग

विस्तार

बरेली के दमखोदा ब्लॉक के इस्लामनगर और उधरा समेत आसपास के गांवों के निवासियों पर जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का खतरा मंडरा रहा है। सितंबर में संक्रमित पाए गए बच्चे की कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया है। उसकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है। इसके बाद पशुपालन विभाग ने इलाके के सूअरों के सैंपल को आईवीआरआई भेजकर जांच कराई। इसमें 90 फीसदी सूअर संक्रमित मिले। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग ने इलाके में अलर्ट जारी किया है।

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इस्लामनगर निवासी बच्चे के जेई की चपेट में मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हुई। संक्रमण की वजह तलाशने के लिए मंडलीय और जिला सर्विलांस अधिकारी, एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) की टीमें गांव पहुंचीं। वहां मच्छरों का प्रकोप मिला। इस्लामनगर के पास के गांव उधरा में सूअर पालन फार्म की जानकारी मिली। 
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सूअर जेई वायरस के वाहक माने जाते हैं। टीम ने जिलाधिकारी को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पशुपालन विभाग ने पिगरी फार्म, घरों में पल रहे सूअरों के नमूने लेकर जांच कराई तो 90 फीसदी संक्रमित मिले।

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ग्रामीणों को जानकारी देते सर्विलांस अधिकारी - फोटो : विभाग

सीरो सर्विलांस में मिली एंटीबॉडी 
मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. मनमोहन पांडेय के मुताबिक बतौर सीरो सर्विलांस आईवीआरआई में सैंपल की जांच कराई गई तो रिपोर्ट में जेई वायरस संबंधित एंटीबॉडी मिली है। जाहिर है कि सुअर संक्रमित हैं। अगर मच्छर इन्हें काटकर स्वस्थ व्यक्ति को काट लें तो उसके भी जेई की चपेट में आने की आशंका है। लिहाजा, क्षेत्र के सभी सुअर पालकों को अलर्ट किया है। लोगों को मच्छरदानी और मच्छररोधी उपकरणों आदि का प्रयोग करने के लिए कहा गया है।

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पालकों को निर्देश 
सूकर बाड़े में सफाई रखें। चूने का छिड़काव करें। सूअर की मौत होने पर शव का नियमानुसार निस्तारण करें। बाहर से किसी सूअर का आवागमन प्रतिबंधित करें।

बच्चे को मिलेगी आर्थिक सहायता
जेई की चपेट में मिले साढ़े तीन साल के बच्चे आकिब अली के लकवाग्रस्त होने की पुष्टि हुई तो आर्थिक सहायता के तहत एक लाख रुपये मिलेंगे। अगर हालत बिगड़ी और मौत हो गई तो परिजनों को 50 हजार रुपये मिलेंगे। अस्पताल से दवा चल रही हैं। स्वास्थ्य केंद्र से निगरानी हो रही है।

तीन किमी के दायरे में क्यूलेक्स मच्छर मार सकते हैं डंक
आईडीएसपी इंचार्ज डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक, जेई का वायरस क्यूलेक्स की ट्रिटाइनियोरिंचस, विस्नुई, गेलीडस प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है। जेई ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में फैलता है। खासतौर पर जहां सूअर पालन होता है या धान के खेत में पानी भरा रहता है। सर्विलांस के दौरान संबंधित इलाके में क्यूलेक्स मच्छरों का घनत्व सामान्य से ज्यादा मिला।

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जानिए, क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस 
जापानी इंसेफेलाइटिस एक वायरल मस्तिष्क संबंधी संक्रमण है जो मच्छरों से फैलता है। इसका संक्रमण इन्सान से इन्सानों में नहीं होता। वायरस मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है। इससे तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी, दौरे, गर्दन में अकड़न, मानसिक भ्रम, व्यवहार में बदलाव जैसे सामान्य लक्षण समेत गंभीर मामलों में पैरालिसिस (लकवा), कोमा की आशंका रहती है। 

ग्रामीणों से अपील 
घरों के आसपास पानी जमा न होने दें। बच्चे, बड़े सभी मच्छरदानी में सोएं। बुखार, सिरदर्द होने पर विशेषज्ञ से संपर्क करें। सूअर बाड़ों और पास के गांवों में फॉगिंग, एंटीलार्वा का छिड़काव कराएं। बच्चों को जेई का टीका लगवाएं। सरकार की ओर से यह निशुल्क उपलब्ध है।
 
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