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आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने किया साहीवाल नस्ल का भ्रूण प्रत्यारोपित

Sat, 19 Dec 2020 12:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 19 Dec 2020 12:23 AM IST
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IVRI scientists implicate Sahiwal breed embryo
आईवीआरआई - फोटो : आईवीआरआई

दो साल के लंबे शोध के बाद मिली सफलता, गायों की नस्ल सुधारने में मिलेगी मदद

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बरेली। रिकॉर्ड दूध देेने वाली साहीवाल नस्ल की भारतीय गायों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने दो साल के लंबे शोध के बाद साहीवाल नस्ल के भ्रूण का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण कर दिया है। अच्छी नस्ल की दुधारू गायों की संख्या तेजी से बढ़ाने और पशुपालकों की आय में बढ़ोत्तरी करने के लिए केंद्र सरकार गोकुल मिशन के तहत भ्रूण प्रत्यारोपण को काफी महत्व दे रही है, ताकि ज्यादा दूध देने वाली साहीवाल, गिर, रेड सिंधी, राठी, ओंगोल और थारपरकर गायों की नस्ल में सुधार कर उन्हें विकसित किया जा सके।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भ्रूण प्रत्यारोपण एक ऐसी विधि है, जिसके माध्यम से साहीवाल नस्ल की एक गाय से साल भर में 12 से 16 भ्रूण विकसित करके दूसरी गायों में प्रत्यारोपित कर बछिया को जन्म दिलाया जा सकता है, जबकि सामान्य तौर पर साल भर में एक गाय से एक ही बछिया प्राप्त की जा सकती है। आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने दो साल के शोध के बाद साहीवाल नस्ल के भ्रूण प्रत्यारोपण के माध्यम से 12 सफल गर्भधारण कराए हैं। हाल ही में सीताराम गोशाला बरेली में दो बछिया इस विधि से पैदा हुई हैं। तीसरी बछिया राजेंद्रनगर की एक डेयरी में पैदा हुई है।
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वैज्ञानिकों ने बताया कि सभी भ्रूण विकसित करने के लिए जिस साहीवाल सांड के वीर्य का इस्तेमाल किया गया, उसकी मां की दूध देने की क्षमता 24 लीटर प्रतिदिन थी, जबकि भ्रूण प्रत्यारोपण के बाद बछिया को जन्म देने वाली गाय की दूध देने की क्षमता 14 लीटर प्रतिदिन है। भ्रूण प्रत्यारोपण से प्राप्त बछिया का अनुमानित दुग्ध उत्पादन 16 लीटर तक हो सकता है। भ्रूण प्रत्यारोपण में वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. विकास चंद्रा, डॉ. विक्रांत सिंह चौहान, डॉ. एमके पात्रा, डॉ. रनवीर सिंह आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह परियोजना डॉ. हरेंद्र कुमार, विभागाध्यक्ष, पुनुरुत्तपादन विभाग और डा. तरु शर्मा, विभागाध्यक्ष पशु देहिकी एवं जलवायु विभाग के मागर्दशन में चल रही है।
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भ्रूण प्रत्यारोपण के माध्यम से देसी गायों की नस्ल को सुधारा जा रहा है, ताकि दुग्ध उत्पादन को बढ़ाया जा सके। साथ ही पशुपालकों की आमदनी में भी बढ़ोत्तरी की जा सके। साहीवाल नस्ल के भ्रूण प्रत्यारोपण का सफल शोध इस दिशा में बड़ी उपलब्धि है। - डॉ. बीपी मिश्र, निदेशक, आईवीआरआई

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