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आईवीआरआई: स्टार्ट अप के जरिये पशुपालकों तक पहुंचेंगी नई तकनीकें
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में कृषि मंत्रालय की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत स्टार्टअप की नवोदय-2019 और समृद्धि-2019 योजनाओं की शुरुआत हो गई। इन दोनों योजनाओं की ट्रेनिंग में केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, असम, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के कुल 28 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। उन्हें स्टार्टअप शुरू करने के लिए दो महीने का आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा फिर सफल लोगों को उनके स्टार्टअप के लिए कृषि मंत्रालय के माध्यम से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
सोमवार को आईवीआरआई में हुए समारोह में संस्थान के निदेशक डॉ. राजकुमार सिंह ने कहा कि संस्थान पशु उत्पादों को लाभदायक बनाना चाहता है। संस्थान अपने जैविक उत्पादों का निर्यात करता है और कई कंपनियां हमारी तकनीकों का उपयोग करती हैं। हम चाहते हैं कि पशुपालन में स्टार्टअप के जरिये हमारी तकनीकों का लाभ पशुपालकों तक पहुंचे। संयुक्त निदेशक, शोध डॉ. बीपी मिश्रा ने संस्थान के इतिहास और उपलब्धियों का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि पशुपालन में तकनीकों के उपयोग से किसानों और पशुपालकों की आय दोगुना करने में मदद मिलेगी। इस दौरान आरकेवीवाई-रफ्तार के प्रधान अन्वेषक डॉ. आरपी सिंह, परियोजना के सह प्रधान अन्वेषक डॉ. बबलू कुमार, डॉ. महेश चंद्र, डॉ. एसके सिंह आदि मौजूद रहे।
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सोमवार को आईवीआरआई में हुए समारोह में संस्थान के निदेशक डॉ. राजकुमार सिंह ने कहा कि संस्थान पशु उत्पादों को लाभदायक बनाना चाहता है। संस्थान अपने जैविक उत्पादों का निर्यात करता है और कई कंपनियां हमारी तकनीकों का उपयोग करती हैं। हम चाहते हैं कि पशुपालन में स्टार्टअप के जरिये हमारी तकनीकों का लाभ पशुपालकों तक पहुंचे। संयुक्त निदेशक, शोध डॉ. बीपी मिश्रा ने संस्थान के इतिहास और उपलब्धियों का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि पशुपालन में तकनीकों के उपयोग से किसानों और पशुपालकों की आय दोगुना करने में मदद मिलेगी। इस दौरान आरकेवीवाई-रफ्तार के प्रधान अन्वेषक डॉ. आरपी सिंह, परियोजना के सह प्रधान अन्वेषक डॉ. बबलू कुमार, डॉ. महेश चंद्र, डॉ. एसके सिंह आदि मौजूद रहे।
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