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आईटीआर चलाने को नये उद्यमियों की तलाश
बरेली
Updated Sun, 17 Jan 2016 02:18 AM IST
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बरेली। इंडियन टरपन टाइन एंड रेजिन (आईटीआर) फैक्ट्री को फिर से शुरू कराने के लिए सरकार को नये उद्यमियों की तलाश है। शासन और प्रशासनिक अधिकारी मान चुके हैं कि फैक्ट्री में तारपीन और बिरोजा का उत्पादन संभव नहीं है, इसीलिए अन्य उत्पादन करने वाली कोई और नई फैक्ट्री को स्थापित कराने की तैयारी की जा रही है। अंदरखाने कुछ उद्यमियों से वार्ता होने के संकेत मिले भी हैं, लेकिन मामला उच्चस्तरीय होने के कारण कोई भी कुछ कहने को तैयार नहीं है।
कमिश्नरी में फैक्ट्री की रिपोर्ट का खाका तैयार कर लिया गया है। कुछ और आंकड़े जुटाए जा रहे हैं, उसी के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सर्किल रेट के अनुसार, फैक्ट्री की 35 एकड़ जमीन ही करीब 700 करोड़ की मानी जा रही है। इसके अलावा करीब एक करोड़ रुपये की कबाड़ की लकड़ी भी है। जंग खाई मशीनरी और स्क्रे प की लागत दो से ढाई करोड़ आंकी गई है। इन दिनों सुपीरियर कंपनी किराए पर शराब उत्पादन कर रही है। इस कंपनी ने रेंट और ब्याज का विवाद सुप्रीम कोर्ट में दायर कर रखा है। कंपनी ने समय से 14 करोड़ का रेंट नहीं दिया तो ब्याज लगा दिया गया, जिसके खिलाफ अदालत में मुकदमा विचाराधीन है।
फैक्ट्री का विवाद बोर्ड ऑफ इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंशियल रिकंस्ट्रक्शन (बीआईएफआर) में लंबित है। निस्तारण के लिए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति को नामित करने का प्रावधान है। यदि बीमार उद्योग की जिम्मेदारियां कोई दूसरा उद्यमी ले लेता है तो समझौता हो जाता है। इसी तर्क के साथ सरकार अदालत के बाहर समझौता कर किसी उद्यमी को फैक्ट्री संचालित करने के लिए देने का प्रयास कर रही है।
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कमिश्नरी में फैक्ट्री की रिपोर्ट का खाका तैयार कर लिया गया है। कुछ और आंकड़े जुटाए जा रहे हैं, उसी के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सर्किल रेट के अनुसार, फैक्ट्री की 35 एकड़ जमीन ही करीब 700 करोड़ की मानी जा रही है। इसके अलावा करीब एक करोड़ रुपये की कबाड़ की लकड़ी भी है। जंग खाई मशीनरी और स्क्रे प की लागत दो से ढाई करोड़ आंकी गई है। इन दिनों सुपीरियर कंपनी किराए पर शराब उत्पादन कर रही है। इस कंपनी ने रेंट और ब्याज का विवाद सुप्रीम कोर्ट में दायर कर रखा है। कंपनी ने समय से 14 करोड़ का रेंट नहीं दिया तो ब्याज लगा दिया गया, जिसके खिलाफ अदालत में मुकदमा विचाराधीन है।
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फैक्ट्री का विवाद बोर्ड ऑफ इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंशियल रिकंस्ट्रक्शन (बीआईएफआर) में लंबित है। निस्तारण के लिए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति को नामित करने का प्रावधान है। यदि बीमार उद्योग की जिम्मेदारियां कोई दूसरा उद्यमी ले लेता है तो समझौता हो जाता है। इसी तर्क के साथ सरकार अदालत के बाहर समझौता कर किसी उद्यमी को फैक्ट्री संचालित करने के लिए देने का प्रयास कर रही है।
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