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सिंचाई के एक्सईएन दीपक यादव हटाए गए

Sun, 04 Jun 2017 02:07 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Sun, 04 Jun 2017 02:07 AM IST
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Irrigation Xen Deepak Yadav was removed
ब्यास नदी में कार गिरी - फोटो : ANI
 शारदा नहर की हरदोई ब्रांच की दो साल पहले सफाई के नाम पर 13 करोड़ से समेत र्क मामलों में चर्चित चल रहे पूर्व मंत्री शिवपास सिंह के करीबी एक्सईएन हेडवर्क्स दीपक यादव पर आखिरकार गिर ही गई। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने दीपक यादव को लखनऊ मुख्यालय से अटैच कर दिया है। गोमती रिवर फ्रंट में मिले बजट के दुरुपयोग की जांच भी होगी। 
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सिंचाई मंत्री ने यब बात बरेली में प्रेसकांफ्रेस में कही। दीपक यादव को हटाने की चर्चाएँ तीन दिन से हो रही थी। उन पर बाइफरकेशन डिवीजन की सिल्ट सार्फ के 17 करोड़ के गेलमाल, नहर मरम्मत में धटिया सामग्री इस्तेमाल करना, बिना चेंडर विभाग की जमीन कुछ लोगों को दे देना लकड़ी घोटला समेत कई आरोप थे। सिल्ट सपाई के बाद चैनल से निकासी 6000 की जगह 4000 रह जाना भी उनके चर्चित कामों में रहा। सिंचाई मंत्री ने इनके कामों के बारे में कुछ ज्यादा नहीं कह लेकिन हटाने की पुष्टि की। बताया जा रहा है कि इनका तबादला रुवाने के लिए तीन दिन से कई लोग लगे हुए थे। 
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मंत्रालय को पिछले सप्ताह गोमती रिवर फ्रंट, बनवसा बैराज और वाइफरकेशन की सफाई के नाम पर 14 करोड़ से ज्यादा के बजट आवंटन में दो साल पहले हुए दुरुपयोग के मामले की जानकारी मिली थी। इस पर मंत्रालय की ओर से संकेत मिले थे कि नहर सफाई में शामिल एक्सईएन समेत बनवसा बैराज पर तैनात एई और जेई पर भी कार्रवाई होगी। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने प्रेस वार्ता में कहा कि हरदोई ब्रांच और बाइफरकेशन की सफाई में बजट का दुरुपयोग होने के मामले में एक्सईएन दीपक यादव को फिलहाल मुख्यालय से अटैच किया गया है। अभी इस मामले की जांच कराई जाएगी। इसके बाद एक्सईएन के अलावा संबंधित एई और जेई पर कार्रवाई होगी।  बता दें कि शारदा कैनाल हेडवर्क्स के एक्सईएन दीपक यादव की तैनाती बरेली में चार साल पहले हुई थी। 2012 से 2017 तक शारदा कैनाल में 39.65 करोड़ रुपये के काम हुए। इनमें बांध निर्माण के अलावा हरदोई ब्रांच की 21.6 से 37 किलोमीटर लंबी नहर की सफाई के काम शामिल हैं। सिंचाई मंत्रालय के पास पहुंची गोपनीय रिपोर्ट में इन कामों में बड़े पैमाने पर घपले की बात कही गई है जिसके संकेत मंत्रालय ने खुद दिए हैं। हरदोई ब्रांच की सफाई का काम रावत एसोसिएट्स के अर्जुन सिंह रावत को दिया गया था। बताया जाता है कि बड़े सपा नेता ने एग्रीमेंट में फर्म के ठेकेदार से सिक्योरिटी की रकम 10 प्रतिशत से कम जमा कराकर टेंडर दिला दिए। ब्रांच की सफाई में पूरी सिल्ट नहीं निकाली गई। जो सिल्ट निकाली भी गई थी, उसमें विवाद था। इस वजह से जिला प्रशासन ने उसकी नीलामी दो साल बाद भी नहीं की। फिलहाल, इस घपले में कुछ एई और जेई की गर्दन भी नप सकती है।  
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