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Bareilly News: ई-साक्ष्य एप पर विवेचक नहीं कर सकेंगे साक्ष्यों से छेड़छाड़
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बरेली। तीन नए कानून लागू होने के बाद जिले में विवेचना भी नए तरीके से शुरू हो गई हैं। अब विवेचक साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे। ई-साक्ष्य एप पर घटना से जुड़े फोटो व वीडियो अपलोड करना होगा। इसके बाद विवेचक उसे नहीं देख पाएंगे। सीधे कोर्ट में ही उनका अवलोकन हो सकेगा। इसके लिए दिल्ली की टीम जिले के विवेचकों को एप संचालन का प्रशिक्षण दे रही है।
आईपीसी में जहां ऑडियो, वीडियो व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को दरकिनार कर दिया जाता था, वहीं एक जुलाई 2024 से लागू नए कानून में इन साक्ष्यों को मान्यता दी गई है। अब विवेचकों को मोबाइल फोन के जरिये ई-साक्ष्य एप पर साक्ष्य अपलोड करने होंगे। आमतौर पर विवेचकों पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गायब करने के आरोप लगते रहते हैं। इससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता है। ई-साक्ष्य एप से यह गुंजाइश काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
जांच में आएगी एकरूपता
एप के जरिये सभी राज्यों और जिलों की पुलिस की जांच में एकरूपता आएगी। एप के माध्यम से सबूतों को न्यायालय में पेश करने में भी आसानी होगी। साक्ष्यों को फॉरेंसिक लैब भेजने में भी सुगमता रहेगी। अपराधियों को सजा दिलाना भी आसान होगा। ई-साक्ष्य एप के जरिये सबूतों के नष्ट होने की गुंजाइश भी लगभग खत्म हो जाएगी। साक्ष्यों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।
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तीन नए कानूनों के लागू होने के बाद तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित विवेचना पर जोर दिया जा रहा है। नई व्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का महत्व बढ़ा है। इसके क्रियान्वयन के लिए ई-साक्ष्य एप लॉन्च किया गया है। इसमें विवेचक जो साक्ष्य डाउनलोड करेंगे वह कोर्ट में देखे जा सकेंगे। इनमें छेड़छाड़ या गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। - अनुराग आर्य, एसएसपी
अमर उजाला ब्यूरो
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आईपीसी में जहां ऑडियो, वीडियो व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को दरकिनार कर दिया जाता था, वहीं एक जुलाई 2024 से लागू नए कानून में इन साक्ष्यों को मान्यता दी गई है। अब विवेचकों को मोबाइल फोन के जरिये ई-साक्ष्य एप पर साक्ष्य अपलोड करने होंगे। आमतौर पर विवेचकों पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गायब करने के आरोप लगते रहते हैं। इससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता है। ई-साक्ष्य एप से यह गुंजाइश काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
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जांच में आएगी एकरूपता
एप के जरिये सभी राज्यों और जिलों की पुलिस की जांच में एकरूपता आएगी। एप के माध्यम से सबूतों को न्यायालय में पेश करने में भी आसानी होगी। साक्ष्यों को फॉरेंसिक लैब भेजने में भी सुगमता रहेगी। अपराधियों को सजा दिलाना भी आसान होगा। ई-साक्ष्य एप के जरिये सबूतों के नष्ट होने की गुंजाइश भी लगभग खत्म हो जाएगी। साक्ष्यों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।
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तीन नए कानूनों के लागू होने के बाद तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित विवेचना पर जोर दिया जा रहा है। नई व्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का महत्व बढ़ा है। इसके क्रियान्वयन के लिए ई-साक्ष्य एप लॉन्च किया गया है। इसमें विवेचक जो साक्ष्य डाउनलोड करेंगे वह कोर्ट में देखे जा सकेंगे। इनमें छेड़छाड़ या गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी। - अनुराग आर्य, एसएसपी
अमर उजाला ब्यूरो