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Bareilly News: विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच शुरू

Sat, 27 Apr 2024 06:04 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Sat, 27 Apr 2024 06:04 AM IST
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Investigation started into allegations of financial irregularities in the university
बरेली। शासन के पत्र के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितता के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। कुलसचिव ने प्रकरण से संबंधित परीक्षा नियंत्रक, तत्कालीन बीएड प्रवेश परीक्षा समन्वयक और उप कुलसचिव प्रशासन से जवाब मांगा है।
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विश्वविद्यालय की ओर से वर्ष 2022 में बीएड प्रवेश परीक्षा कराई गई थी। इससे संबंधित कोरोना किट की खरीदारी को लेकर चार करोड़ रुपये से अधिक का बिल भुगतान के लिए तत्कालीन वित्त अधिकारी के कार्यालय में भेजा गया था। आरोप है कि इसके भुगतान को लेकर कुलपति ने उन पर दबाव बनाया था। हालांकि, पर्याप्त धनराशि नहीं होने से वित्त अधिकारी ने भुगतान नहीं किया।
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बाद में वित्त अधिकारी को जानकारी हुई कि कोरोना किट की खरीदारी के मामले की जांच एसटीएफ व सीबीआई कर रही हैं। वहीं, परीक्षा संबंधी गोपनीय मदों के भुगतान के लिए कुलपति ने 50.50 करोड़ रुपये अग्रिम तीन किस्तों में लिए, लेकिन इसका समायोजन प्रस्तुत नहीं किया। इसको लेकर वित्त अधिकारी ने भुगतान में गंभीर अनियमितता की आशंका जताते हुए जांच की मांग की थी।
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तत्कालीन वित्त अधिकारी ने विश्वविद्यालय से कॉलेजों में गोपनीय पत्र ले जाने वाली गड़ियों के बिल की सूचना परीक्षा नियंत्रक से मांगी थी। इसके जवाब में परीक्षा नियंत्रक ने कहा था कि परीक्षा से संबंधित गाड़ियों को भेजे जाने का कार्य अतिगोपनीय प्रकृति का होता है। इसलिए ड्राइवर स्लिप उपलब्ध कराया जाना उचित नहीं है। तब वित्त अधिकारी ने इसकी विस्तृत जांच कराने की मांग की थी।

पूर्व वित्त अधिकारी की शिकायत पर शासन स्तर से कुलसचिव अजय कृष्ण यादव और वित्त अधिकारी विनोद कुमार से रिपोर्ट मांगी गई हैै। इसको लेकर कुलसचिव ने बीएड प्रवेश परीक्षा के तत्कालीन समन्वयक प्रो. पीबी सिंह, परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार और उप कुलसचिव (प्रशासन) सुनीता यादव से जवाब मांगा है। पूर्व वित्त अधिकारी केके शंखवार ने बताया कि उन्होंने विगत वर्ष राजभवन को पत्र भेजा था। प्रकरण अब उच्च शिक्षा विभाग के पास है।

विश्वविद्यालय में 18 अप्रैल को दोबारा पदस्थापित होने के बाद शासन का पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें वित्तीय अनियमितता से जुड़े गंभीर आरोपों को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। ऐसे में संबंधित को पत्र लिखकर जवाब देने के लिए कहा गया है। - अजय कृष्ण यादव, कुलसचिव, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। उप कुलसचिव, कार्यवाहक कुलसचिव के रूप में कर्मचारियों के तबादले का फरमान जारी कर रही हैं। वहीं, कुलसचिव इसे निरस्त कर रहे हैं। इससे कर्मचारी परेशान हैं। वे समझ नहीं पा रहे कि आखिर किस फरमान पर अमल करें?
विगत दिनों कुलपति ने उप कुलसचिव सुनीता यादव को कुलसचिव पद का अतिरिक्त प्रभार दिया था। राजभवन को प्रकरण की रिपोर्ट भेजी गई थी। इस बीच शासन का पत्र मिलने से कुलसचिव अजय कृष्ण यादव अपने कार्यालय में ही बैठ रहे हैं। ऐसे में दोनों तरफ से आए दिन कुलसचिव के रूप में कई पत्र जारी किए जा रहे हैं। विगत दिनों उप कुलसचिव ने आठ कर्मचारियों का पटल परिवर्तन किया था, जिसे कुलसचिव ने निरस्त कर दिया।
अब वेतन रुकने के डर से कुछ कर्मचारियों ने आवंटित विभाग में कार्यभार ग्रहण करने का प्रत्यावेदन दिया। इस पर कुलसचिव ने पत्र जारी किया। उन्होंने कहा कि उप कुलसचिव ने स्थानांतरण संबंधी कार्यालय आदेश अनधिकृत रूप से जारी किया था, जिसे निरस्त कर दिया गया है। इसके बाद भी कुछ कर्मचारियों ने उस आदेश का पालन करते हुए आवंटित पटल का कार्यभार ग्रहण करने के लिए प्रत्यावेदन दिए हैं। यह अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
16 अप्रैल को ही शासन ने कार्यवाहक कुलसचिव सुनीता यादव के समस्त आदेशों को निरस्त किए जाने के निर्देश दिए थे। ऐसे में कर्मचारियों के कार्यभार ग्रहण करने संबंधी प्रत्यावेदन निरस्त किए जाते हैं। सभी कर्मचारी अपने पटल पर ही कार्य करें। इसी तरह विगत दिनों अवकाश को लेकर कुलसचिव और उप कुलसचिव दोनों ने पत्र जारी किए थे। बाद में कुलसचिव ने इसे अनधिकृत मानते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी थी।

इस माह 12 अप्रैल को अजय कृष्ण यादव को प्रशासनिक कार्यों से विरत कर दिया था। उसके बाद से वह अनधिकृत और नियमविरुद्ध तरीेके से पत्राचार और कार्यालय आदेश जारी कर रहे हैं। यह विधि मान्य नहीं है। प्रकरण पर राजभवन से दिशा-निर्देश मिलने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. केपी सिंह, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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