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UP: तीन कुत्तों को जीवनदान... स्वदेशी तकनीक से हुआ कूल्हा प्रत्यारोपण; वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता

Mon, 09 Jun 2025 10:57 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 09 Jun 2025 10:57 AM IST
सार

Dog Hip Transplant Bareilly: बरेली में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। तीन कुत्तों को जीवनदान मिला है। स्वदेशी तकनीक से कूल्हा प्रत्यारोपण हुआ है। आईवीआरआई में वर्ष 2022 में शोध शुरू हुआ था। दो वर्ष उम्र और 20 किलो से अधिक वजन होने पर ही प्रत्यारोपण संभव है।

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Indian Scientists Perform Successful Hip Transplant on Three Dogs Using Indigenous Technique in Bareilly
कुत्तों का कूल्हा प्रत्यारोपण - फोटो : संवाद

विस्तार

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर के वैज्ञानिकों ने सफल कूल्हा प्रत्यारोपण कर तीन कुत्तों को जीवनदान दिया है। 2022 से इस पर शोध चल रहा था। अब वैज्ञानिकों ने इसकी स्वदेशी तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल की है।
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वैज्ञानिक डॉ. रोहित कुमार के मुताबिक कुत्ते की उम्र दो वर्ष और वजन 20 किलो से अधिक होने पर ही कूल्हा प्रत्यारोपण संभव है। दुर्घटना में श्वान का कूल्हा टूटने के का जोखिम रहता है। अब तक भारत में कुत्तों के लिए कृत्रिम कूल्हा उपलब्ध नहीं था। जरूरत पड़ने पर विदेश से मंगाना पड़ता था।
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इस पर पांच लाख रुपये से अधिक खर्च आता था। स्वदेशी तकनीक विकसित करने के लिए तीन वर्ष पूर्व रेफरल पॉलीक्लीनिक के इंचार्ज डॉ. अमरपाल सिंह के नेतृत्व में शोध शुरू हुआ। कृत्रिम कूल्हा बनाने में स्वदेशी उपकरणों और धातुओं का इस्तेमाल किया गया। 

इससे प्रत्यारोपण का खर्च विदेश के सापेक्ष 93% तक कम हो जाएगा। शोध पूरा होने के बाद देहरादून, बरेली के पालतू कुत्तों समेत संभल पुलिस के डॉग स्क्वॉड में शामिल कुत्ते का कूल्हा प्रत्यारोपण किया गया। 

संस्थान निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने शोध टीम में शामिल डॉ. रोहित कुमार, डॉ. अमरपाल, डॉ. एसी सक्सेना, डॉ. एएम पावड़े को बधाई दी। तकनीक इंडस्ट्री को हस्तांतरित करने के लिए प्रेरित किया।

वयस्क कुत्तों में ही प्रत्यारोपण सफल
कृत्रिम कूल्हे का बाहरी ढांचा सर्जिकल ग्रेड स्टेनलेस स्टील और कटोरी अल्ट्रा हाई मॉलिक्यूलर पॉलीइथिलीन से बनी है। अलग-अलग उम्र के घायल और मृत कुत्तों पर परीक्षण किया गया। कम उम्र के कुत्तों के बड़ा होने पर आकार में बदलाव से प्रत्यारोपण के वयस्क और बूढ़े कुत्तों में प्रत्यारोपण के अस्थिर मिला। न्यूनतम दो वर्ष सफलता की दर 99 फीसदी रही।

 

थोड़ी एहतियात भी जरूरी
डॉ. रोहित के मुताबिक, प्रत्यारोपण के बाद कुत्तों की निगरानी जरूरी है। उनके छह फुट या ज्यादा इससे ऊंचाई से कूदने, तेज गति से दौड़ने पर अंकुश लगाना होगा। सीढ़ियों पर चढ़ने-उतरने, बिस्तर से नीचे कूदने आदि में कोई दिक्कत नहीं होगी।

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