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मुल्क की नस-नस में जेहादी सोच का जहर भरने के मिशन पर था इनामुल

Wed, 24 Jun 2020 01:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 24 Jun 2020 01:57 AM IST
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Inamul was on a mission to poison jihadi thinking in the vein of the country
इनामुल हक - फोटो : अमर उजाला

इनामुल की गिरफ्तारी के बाद छानबीन आगे बढ़ने के साथ हैरत में डालने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। अब तक हासिल सूचनाओं के आधार पर एटीएस के सूत्र दावा कर रहे हैं कि कश्मीर में आतंक पर लगाम लगने के बाद इनामुल और सलमान वानी जैसे तमाम युवाओं को देश के तमाम हिस्सों में आतंक का नेटवर्क फैलाने के लिए लगाया गया था। 

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नेता किस्म के तमाम लोगों के साथ पत्रकारिता से जुड़े लोगों से भी यह जेहादी टोली नजदीकियां बढ़ाने में लगी थी। उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों पर उनका खास फोकस था। वानी ने बागपत के जिस इंस्टीट्यूट में खुद एडमिशन लिया था, उसी में कश्मीर के कई और युवाओं को दाखिला दिलाया था।
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एटीएस के लखनऊ मुख्यालय में इनामुल और कश्मीर से लाए सलमान खुर्शीद वानी से पूछताछ की जा रही है। एटीएस के साथ कई और एजेंसियां इसके साथ इन दोनों की आईडी और मोबाइल से आतंकी गतिविधियों के अलावा उनके साथियों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं। 
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बताया जा रहा है कि इनामुल की फोटो मीडिया में आने के बाद शहर के लोगों ने उसे और उससे जुडे़ लोगों से किनारा करना शुरू कर दिया है। जम्मू के रामबन से गिरफ्तार इनामुल के साथी सलमान वानी ने भी अपनी जेहादी सोच से तमाम लोगों को प्रभावित कर रखा था और लगातार उनके संपर्क में बना हुआ था। इनामुल और सलमान वानी के सोशल अकाउंट पर उनकी जेहादी सोच साफ झलकती है।

इनामुल ने खुले तौर पर अपनी आईडी पर अलकायदा का झंडा लगा रखा था। वानी की गतिविधियां भी संदिग्ध थीं। सलमान वानी ने बागपत के जिस इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया था वहां उसने कश्मीर के कई और संदिग्ध युवकों को भी एडमिशन दिलाया था। इन युवकों में एक अनंतनाग का आबिद भी है जिसे वानी ने इसी साल जनवरी महीने में बागपत में एडमिशन दिलाया था। आबिद वानी का काफी नजदीकी बताया जा रहा है।

एटीएस की छानबीन में सामने आए कई और नाम, शुरू हुई तलाश
एटीएस की छानबीन में इनामुल से गहरा संपर्क रखने वाले बरेली से ताल्लुक रखते शोएब अजहरी का भी नाम सामने आया है। शोएब कुवैत और पाकिस्तान की भी यात्रा कर चुका है। शोएब से इनामुल का भाई मुनीर भी संपर्क में था। दिल्ली में रहने वाले शोएब की शहर के सैलानी और हजियापुर जैसे कई इलाकों में काफी आवाजाही के प्रमाण एटीएस को मिले हैं। फेसबुक पर बरेली के काफी लोगों को उसने जोड़ रखा है। इनामुल के संपर्क में रिछा का शाहनवाज मुहम्मदी नाम का युवक भी जुड़ा था जिसके बारे में एटीएस जांच कर रही है। उधर वानी की मुरादाबाद के आफताब तुर्क से दोस्ती पर भी एटीएस की नजर है। तुर्क से बरेली के विपक्षी पार्टी के एक नेता भी जुडे़ हैं।


जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का नेटवर्क तहस-नहस होने के बाद बढ़ीं गतिविधियां
एटीएस सूत्रों का दावा है कि इस बात की प्रबल आशंका है कि इनामुल और वानी जैसे तमाम युवा आतंकी संगठनों के जम्मू-कश्मीर में नेटवर्क ध्वस्त होने के बाद की योजना के मोहरे हैं। यह साजिश आतंक को जम्मू-कश्मीर के दायरे से निकालकर देश भर में फैलाने की हो सकती है। ऐसे कई प्रमाण भी मिल रहे हैं। एटीएस सूत्रों के मुताबिक इनामुल और वानी के काम करने का ढंग आतंकी संगठनों से पूरी तरह मिलता-जुलता है।

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