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UP: अधूरी रह गई इल्मा की ख्वाहिश... मौत के बाद बगैर नमाज-ए-जनाजा हुई दफन, हिंदू प्रेमी से विवाह बना अड़चन

Tue, 03 Jun 2025 11:08 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 03 Jun 2025 11:08 AM IST
सार

बरेली में इल्मा ने हिंदू रीति-रिवाज से प्रेम विवाह किया था, लेकिन उसकी आखिरी ख्वाहिश थी कि उसे इस्लामी रवायत के मुताबिक दफनाया जाए। इल्मा की मौत के बाद उलमा ने जनाजे की नमाज पढ़ाने से मना कर दिया, जिससे उसकी ख्वाहिश अधूरी रह गई। 

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Ilma wish remained unfulfilled after death she was buried without offering Namaaz-e-Janaza
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI

विस्तार

बरेली में गैर मुस्लिम परिवार में शादी के बावजूद इल्मा की ख्वाहिश थी कि मौत के बाद उसे इस्लामी रवायत के मुताबिक दफनाया जाए, लेकिन यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी। दूसरे मजहब में शादी करने की वजह से उलमा ने जनाजे की नमाज पढ़ाने से मना कर दिया। विरोध के बीच पुलिस के हस्तक्षेप से उसे दफन किया जा सका। बरेली में यह अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है।

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जखीरा निवासी इल्मा ने दो साल पहले चाहबाई निवासी राहुल से प्रेम विवाह किया था। कुछ दिनों से वह बीमार थी। 31 मई को उसकी मौत हो गई। बेटी की पूर्व में बताई ख्वाहिश के मुताबिक, पिता उसके जनाजे को अपने घर ले आए। रविवार दोपहर में उसे जब एक मस्जिद में नमाज-ए-जनाजा पढ़ाने ले गए तो इमाम ने इंकार कर दिया।
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मामला दरगाह के उलमा तक पहुंचा। उन्होंने भी मना कर दिया तो इल्मा के परिजन जनाजे की नमाज पढ़ाए बिना ही उसे बाकरगंज स्थित कब्रिस्तान ले गए। वहां भी विरोध हुआ, लेकिन पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शव दफनाया जा सका। इल्मा का पति राहुल और अन्य ससुराल वाले भी जनाजे में शामिल रहे। 

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मुफ्ती बोले- इस्लाम से हो गई थी खारिज 
मुफ्ती खुर्शीद आलम का कहना है कि जब लड़की ने दूसरे मजहब के रीति-रिवाज से शादी की, तभी इस्लामी एतबार से वह खारिज हो गई थी। ऐसे में उसे दफनाने से पहले नमाज-ए-जनाजा नहीं पढ़ाई जा सकती। 

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