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सेहत से खिलवाड़: चांदी के वर्क वाली मिठाई खाते हैं तो हो जाएं सावधान, सच जानकर रह जाएंगे हैरान

Sat, 08 Mar 2025 04:09 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 08 Mar 2025 04:09 PM IST
सार

त्योहार पर चांदी के वर्क वाली मिठाई बड़े शौक से खाई जाती है, लेकिन मिलावटखोर, चांदी की जगह एल्युमिनियम की परत लगा रहे हैं। इसलिए ऐसी मिठाई खरीदने से पहले इसकी पहचान जरूर कर लें कि चांदी का वर्क असली है या नकली। 

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If you eat sweets with silver foil then be careful you will be surprised to know the truth
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मिठाइयों पर सफेद चमक रही परत को चांदी समझकर लोग एल्युमिनियम खा रहे हैं। यह सेहत के लिए हानिकारक है। लगातार सेवन से कैंसर की आशंका है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के मुताबिक चांदी वर्क वाली मिठाई जांच में शुद्धता के सभी मानकों पर फेल रही हैं। 

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बरेली सराफा एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश अग्रवाल के मुताबिक, जिले में चांदी वर्क बनाने वाली सिर्फ एक फैक्टरी है। वहां शुद्ध चांदी का प्रयोग होता है, पर चांदी महंगी होने से असली वर्क की मांग सीमित है। बाजार में प्रति किलो चांदी का भाव 98,500 रुपये है। कर जोड़कर प्रति किलो चांदी वर्क की औसत कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंचती है। ऐसे में उन्होंने आशंका जताई कि ज्यादातर मिठाई कारोबारी एल्युमिनियम वर्क की परत मिठाई पर चढ़ा रहे हैं। 
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शुद्ध चांदी वर्क का प्रयोग होने पर मिठाइयों की कीमत भी बढ़ जाती है। चूंकि पहले ही खाद्य पदार्थों पर महंगाई की मार है। ऐसे में मिठाइयों की कीमत बढ़ाने से उनकी बिक्री पर असर पड़ने से बचने के लिए कई कारोबारी ये खेल कर रहे हैं।

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40 फीसदी बढ़ गई है एक पैकेट चांदी वर्क की कीमत 
चांदी वर्क कारोबारी वैभव खंडेलवाल के मुताबिक उन्होंने दो वर्ष पूर्व चांदी वर्क का काम शुरू किया था। तब पांच सौ रुपये प्रति पैकेट चांदी वर्क के 150 पीस बेच रहे थे। इसकी कीमत अब आठ सौ रुपये है। बताया कि बरेली मंडल समेत उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, कोलकाता तक वह आपूर्ति कर रहे हैं। दावा है कि चांदी वर्क बनाने में चमड़े की बजाय बटर पेपर का प्रयोग करते हैं। ताकि शुद्धता बरकरार रहे।

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ध्यान दें... एल्युमिनियम सेवन से बिगड़ती है सेहत
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राहुल वाजपेयी के मुताबिक चांदी वर्क के नाम पर एल्युमिनियम वर्क की मिठाई का अगर लगातार सेवन किया जाए तो गंभीर रोग होने की आशंका रहती है। इसमें लिवर, किडनी, नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है। खुजली, डैंड्रफ बढ़ते हैं। मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द होता है। पाचन क्रिया प्रभावित होती है। फेफड़ों में पहुंचने पर टीबी की वजह भी बन सकती है। 

ऐसे करें पहचान 

  • चांदी वर्क उंगली पर रगड़ने पर गायब हो जाता है। कोई निशान नहीं बनता। 
  • त्वचा के संपर्क में आने पर आसानी से टूटता है। गर्म करने पर गोल होता है।
  • हाइड्रोक्लोरिक एसिड में डालने पर सफेद निशान बनता है। चुंबक में नहीं चिपकता।


एफएसडीए के संयुक्त आयुक्त द्वितीय अपूर्व श्रीवास्तव ने कहा कि मिठाइयों पर शुद्ध चांदी वर्क का प्रयोग नहीं हो रहा। जिस मिठाई पर वर्क लगता है, उनमें ज्यादातर नमूने अधोमानक मिलते हैं। फिर कार्रवाई की जाती है। लोगों से अपील है कि वे परखकर ही खाद्य सामग्री खरीदें।

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