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मितौली में बनाई जा रही आईसक्रीम के नमूने हुए फेल

Thu, 25 Jul 2019 02:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jul 2019 02:34 AM IST
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ice cream sempal
लखीमपुर खीरी। ग्रामीण क्षेत्रों में आइसक्रीम के नाम पर बच्चों को बीमारी परोसी जा रही है, जिसका खुलासा वैसे तो चार जून 2019 को तीन गांवों सरेली, अमानतपुर और भुड़कुड़ा में आइसक्रीम खाकर 50 बच्चों के बीमार होने पर ही हो गया था। अब लैब रिपोर्ट ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने मितौली क्षेत्र की दो आइसक्रीम फैक्टरी से तीन नमूने लिए थे, जिसमें आइसक्रीम के दोनों नमूने फेल हुए हैं। एक फैक्टरी की आइसक्रीम अधोमानक और दूसरी फैक्टरी की आइसक्रीम असुरक्षित पाई गई है। चीनी की जगह मिठास के लिए इस्तेमाल की जा रही सकरीन भी मिसब्रांड मिली है। अधिकारी रिपोर्ट को कई दिनों से दबाए बैठे हैं, जिससे अभी तक जिम्मेदार आइसक्रीम फैक्टरी संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
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मितौली क्षेत्र के गांव सरेली, अमानतपुर और भुड़कुड़ा में चार जून को आइसक्रीम (सोफ्टी कोन) खाकर 50 बच्चे बीमार हुए थे, जिससे तीनों गांवों में कोहराम मच गया था। उपचार में फायदा न होने पर करीब 40 बच्चों को सीएचसी मितौली भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टर ने गंभीर रूप से बीमार 11 बच्चों को जिला अस्पताल रेफर किया था। इससे प्रशासन में हड़कंप मचा, जिसके बाद एफएसडीए टीम सक्रिय हुई और गांवों में जाकर आइसक्रीम विक्रेता की तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला था।
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एफएसडीए के तत्कालीन अभिहित अधिकारी डॉ. अमर सिंह वर्मा के नेतृत्व में टीम ने मितौली के गांव गंगारामपुरवा में संचालित आइसक्रीम फैक्टरी पर छापा मारकर एक आइसक्रीम का नमूना लिया था। इसके बाद टीम ने मदारीपुरवा गांव में आरिफ की नींबू आइसक्रीम फैक्ट्री पर छापा मारकर आइसक्रीम और चीनी की जगह इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल सकरीन का नमूना भरा था। करीब एक महीने बाद आई लैब रिपोर्ट में मदारीपुरवा स्थित फैक्टरी से ली गई आइसक्रीम के नमूने को असुरक्षित बताया गया है, जिसका कारण निर्धारित मात्रा से ज्यादा रंगों का इस्तेमाल और चीनी कम होना बताया है। लैब विशेषज्ञ ने इस आइसक्रीम की बिक्री पर रोक लगाने को कहा है। जबकि यहीं से लिए सकरीन के नमूने को मिसब्रांड पाया गया है, जिसका अर्थ है कि यह सकरीन भी विश्वसनीय नहीं हैै। इसी तरह गंगारामपुरवा स्थित फैक्टरी से लिए गए आइसक्रीम के नमूने को लैब जांच के बाद अधोमानक करार दिया गया है, जिसमें शर्करा की मात्रा लिमिट से काफी कम पाई गई है।
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