{"_id":"68d3079e6ef3a1cd080a1f0a","slug":"i-am-still-alive-sir-the-order-was-passed-by-showing-me-dead-in-the-case-bareilly-news-c-4-vns1074-732065-2025-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: मैं अभी जिंदा हूं, साहब... मुकदमे में मृत दिखाकर जारी करा लिया आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: मैं अभी जिंदा हूं, साहब... मुकदमे में मृत दिखाकर जारी करा लिया आदेश
Wed, 24 Sep 2025 02:18 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Wed, 24 Sep 2025 02:18 AM IST
विज्ञापन
बरेली। अपर नगर मजिस्ट्रेट-द्वितीय के न्यायालय से एक अजीबो-गरीब आदेश पारित हो गया, जिसमें जमीन के मूल खातेदार को मृत दिखा दिया गया। मामले की पोल उस समय खुली जब वह आठ सितंबर को संपूर्ण समाधान दिवस में एसडीएम सदर के सामने आकर खड़ा हो गया। लेखपाल की जांच में पीड़ित पक्ष के आरोप सही पाए गए हैं।
पूरा मामला सदर तहसील के गांव मेहतरपुर करोड़ के शिवचंद्र सिंह से जुड़ा है। 30 अगस्त को शिवचंद्र सिंह बनाम कृपाल सिंह का मुकदमा निस्तारित हुआ। इसमें शिवचंद्र को मृतक दिखाकर उनके वारिस के तौर पर हारुनगला के राममूर्ति को दिखाया गया। उदयपुर जसरथपुर गांव के गाटा-109/1.994 हेक्टेयर जमीन के तीन हिस्सेदार हैं। जिसमें एक बटा तीन हिस्सा पाने के लिए अपर नगर मजिस्ट्रेट-द्वितीय विजय सिंह की कोर्ट में वाद चल रहा था, जिसमें 19वीं पेशी को राममूर्ति को गाटा-109 की जमीन में एक तिहाई हिस्सा देने का फैसला आया। जानकारी होने पर शिवचंद्र के पैरों तले जमीन खिसक गई और वह आठ सितंबर को सदर तहसील पहुंचकर संपूर्ण समाधान दिवस में अर्जी लगाई। एसडीएम को बताया कि उन्होंने 19 अक्तूबर 2023 को अपने हिस्से की जमीन राममूर्ति को जरूर बेची थी, लेकिन राममूर्ति ने उसके साथ धोखाधड़ी कर फर्जी कागजात लगाकर अपर नगर मजिस्ट्रेट के यहां वाद दाखिल कर दिया और उसमें उसे मृत दिखाकर उनका वारिस बन बैठा। जबकि, वह अभी जीवित हैं। वारिस होने के आधार पर उनकी संपत्ति राममूर्ति हड़पना चाहता है। शिवचंद्र ने मृतक दिखाने के लिए कूटरचित फर्जी आदेश करा लेने वाले राममूर्ति के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने और अन्य कार्रवाई की मांग की है। उधर, मामला सामने आने पर एसडीएम ने लेखपाल से जांच कराई है। लेखपाल विनय कुमार की जांच में शिवचंद्र सिंह के आरोप सही पाए गए हैं। उन्होंने रिपोर्ट में कहा है कि न्यायालय में पैरवी कर पारित आदेश संशोधित करा लें।
-- -- -- -
एसडीएम कोर्ट से स्थानांतरित कराया था मुकदमा
शिवचंद्र सिंह ने एसडीएम को बताया है कि उन्होंने गाटा-109 पर अपने हिस्से की जमीन बेचने से पहले 29 अगस्त 2023 को एसडीएम सदर कोर्ट में हिस्सा बंटवारे का मुकदमा डाला था। मुकदमा उत्तर प्रतिवाद पत्र में लगा था। फिर राममूर्ति के कहने पर उन्होंने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर इस मुकदमे को वापस ले लिया था, लेकिन राममूर्ति ने 29 नवंबर 2024 को इस मुकदमे को अपर नगर मजिस्ट्रेट-द्वितीय के न्यायालय में स्थानांतरित करा लिया था, जहां 18 पेशी की तारीखों के बाद 30 अगस्त 2025 को 19वीं पेशी में मुकदमा निस्तारित हुआ।
विज्ञापन
वर्जन--
यह मामला मेरी जानकारी में है। जांच रिपोर्ट अभी मिली नहीं है। इसमें राममूर्ति को जिसने भी वरासत दर्ज की है, उसके विरुद्ध कार्रवाई करेंगे। - प्रमोद कुमार, एसडीएम सदर
शिवचंद्र सिंह बनाम कृपाल सिंह के मुकदमे में राममूर्ति ने गलत कागज के आधार पर अपने को वारिस बताया है तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे। बुधवार को न्यायालय में इसकी फाइल की जांच भी करेंगे। - विजय सिंह, अपर नगर मजिस्ट्रेट-द्वितीय
विज्ञापन
पूरा मामला सदर तहसील के गांव मेहतरपुर करोड़ के शिवचंद्र सिंह से जुड़ा है। 30 अगस्त को शिवचंद्र सिंह बनाम कृपाल सिंह का मुकदमा निस्तारित हुआ। इसमें शिवचंद्र को मृतक दिखाकर उनके वारिस के तौर पर हारुनगला के राममूर्ति को दिखाया गया। उदयपुर जसरथपुर गांव के गाटा-109/1.994 हेक्टेयर जमीन के तीन हिस्सेदार हैं। जिसमें एक बटा तीन हिस्सा पाने के लिए अपर नगर मजिस्ट्रेट-द्वितीय विजय सिंह की कोर्ट में वाद चल रहा था, जिसमें 19वीं पेशी को राममूर्ति को गाटा-109 की जमीन में एक तिहाई हिस्सा देने का फैसला आया। जानकारी होने पर शिवचंद्र के पैरों तले जमीन खिसक गई और वह आठ सितंबर को सदर तहसील पहुंचकर संपूर्ण समाधान दिवस में अर्जी लगाई। एसडीएम को बताया कि उन्होंने 19 अक्तूबर 2023 को अपने हिस्से की जमीन राममूर्ति को जरूर बेची थी, लेकिन राममूर्ति ने उसके साथ धोखाधड़ी कर फर्जी कागजात लगाकर अपर नगर मजिस्ट्रेट के यहां वाद दाखिल कर दिया और उसमें उसे मृत दिखाकर उनका वारिस बन बैठा। जबकि, वह अभी जीवित हैं। वारिस होने के आधार पर उनकी संपत्ति राममूर्ति हड़पना चाहता है। शिवचंद्र ने मृतक दिखाने के लिए कूटरचित फर्जी आदेश करा लेने वाले राममूर्ति के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने और अन्य कार्रवाई की मांग की है। उधर, मामला सामने आने पर एसडीएम ने लेखपाल से जांच कराई है। लेखपाल विनय कुमार की जांच में शिवचंद्र सिंह के आरोप सही पाए गए हैं। उन्होंने रिपोर्ट में कहा है कि न्यायालय में पैरवी कर पारित आदेश संशोधित करा लें।
विज्ञापन
एसडीएम कोर्ट से स्थानांतरित कराया था मुकदमा
शिवचंद्र सिंह ने एसडीएम को बताया है कि उन्होंने गाटा-109 पर अपने हिस्से की जमीन बेचने से पहले 29 अगस्त 2023 को एसडीएम सदर कोर्ट में हिस्सा बंटवारे का मुकदमा डाला था। मुकदमा उत्तर प्रतिवाद पत्र में लगा था। फिर राममूर्ति के कहने पर उन्होंने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर इस मुकदमे को वापस ले लिया था, लेकिन राममूर्ति ने 29 नवंबर 2024 को इस मुकदमे को अपर नगर मजिस्ट्रेट-द्वितीय के न्यायालय में स्थानांतरित करा लिया था, जहां 18 पेशी की तारीखों के बाद 30 अगस्त 2025 को 19वीं पेशी में मुकदमा निस्तारित हुआ।
विज्ञापन
वर्जन
यह मामला मेरी जानकारी में है। जांच रिपोर्ट अभी मिली नहीं है। इसमें राममूर्ति को जिसने भी वरासत दर्ज की है, उसके विरुद्ध कार्रवाई करेंगे। - प्रमोद कुमार, एसडीएम सदर
शिवचंद्र सिंह बनाम कृपाल सिंह के मुकदमे में राममूर्ति ने गलत कागज के आधार पर अपने को वारिस बताया है तो हम कड़ी कार्रवाई करेंगे। बुधवार को न्यायालय में इसकी फाइल की जांच भी करेंगे। - विजय सिंह, अपर नगर मजिस्ट्रेट-द्वितीय