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घर-घर पानी का धंधा, शुद्धता की गारंटी नहीं
बरेली।
Updated Mon, 17 Apr 2017 12:53 AM IST
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House-to-house water business, not guaranteed accuracy
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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केस वन
तंग दुकान में चल रहा सेंटर
किला ओवरब्रिज के नीच दूल्हे खां की मजार के पास मोहित कूल सेंटर के नाम से आठ बाई दस फिट की दुकान में पानी को शुद्ध और ठंडा बनाने का सेंटर संचालित है। फ्रिजर लगने के बाद यहां जरा सी जगह बचती है जिसमें वाटर कूलर एक के ऊपर एक रखे हुए थे। खुद को इस सेंटर का मालिक बता रहे वंशीनगला के मोहित कह रहे थे कि केवल 60 से 70 कूलर वह सप्लाई करते हैं, उनका छोटा सा काम है, कोई ज्यादा नियम कायदे पूछेगा तो बंद कर देंगे।
केस टू
डलावघर के सामने शुद्ध होता है पानी
जखीरा मोहल्ले में नगर निगम के डलावघर के सामने दीपक फिल्टर्ड कोल्ड ड्रिकिंग वाटर सेंटर है। जिस जगह पूरे मोहल्ले का कचरा पड़ता है, वहीं बराबर में शुद्ध पानी मुहैया कराने का दावा किया जाता है। हालात यह हैं कि कचरे के ठेले और पानी के ठेले भी एक साथ ही खड़े होते हैं। अंदर का नजारा और भी चौंकाने वाला था। गंदा कपड़ा और प्लास्टिक का बोरा समेत कुछ और सामान वहीं पड़ा था जहां मशीन से पानी टपक रहा था। वाटर कूलर भी खुले रखे थे। यहां काम कर रहे कर्मचारी बबलू ने बताया कि 300 से ज्यादा वाटर कूलर यहां से रोज सप्लाई किए जाते हैं।
केस थ्री
गैलरी में लगाया सिस्टम, सफाई ताक पर
चौपुला चौराहे के पास गौरव बस सर्विस वालों ने अपने दफ्तर के बगल स्थित गैलरी में वाटर सेंटर स्थापित कर रखा है। इससे सटकर ही लोग रह रहे हैं। जहां पानी साफ हो रहा था, वहीं फर्श साफ करने का केमिकल, वाइपर, पोंछा और जाला साफ करने का ब्रुश रखा हुआ था। सेंटर संचालक गौरव शर्मा का कहना था दस रुपये में लोगों को घर तक पानी पहुंचाना कोई खास फायदे का धंधा नहीं है। रिक्शे वाले अक्सर असावधानी से काम करते वक्त उनके वाटर कूलर तोड़ देते हैं। वह अगली साल ये काम बंद कर देंगे।
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केस फोर
मॉडल टाउन में चल रहे गंगोत्री वाटर सप्लाई का पंजीकरण नगर निगम में है। यहां दोपहर साढ़े 12 बजे वाटर कैनों की धुलाई हो रही थी। पानी मॉडल टाउन के लंगर में जाना था। एक घर में चल रहे वाटर प्लांट में फिल्टर मशीन लगी हुई है। सबमर्सिबल से पानी भरा जाता है जिसे फिल्टर में डालते हैं और यहां से पानी चिलर में ठंडा होकर कैन में भरा जाता है। एक दिन में 400 कैन की सप्लाई यहां से होती है।
केस फाइव
बिहारीपुर सब्जीमंडी के पास एक छोटे से घर में बाहर सरस वाटर सप्लाई का बोर्ड लगा हुआ है। यहां दो लोग बैठे थे, इनके पास कोई लाइसेंस नहीं था, बताने लगे कि मालिक के पास है। कमरे में एक पाइप लगा हुआ था जिससे पानी भरा जाता है। न तो इन्होंने अपनी फिल्टर मशीन दिखाई और न ही चिलर मशीन। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां ऐेसे ही पानी भरते हैं। कई और घरों में काम चलता है।
बाजार, कार्यालयों और घरों में वाटर कैनों में पता नहीं कितने लोग पानी पहुंचा रहे हैं। नगर निगम में मात्र पांच वाटर सप्लाई करने वाले लोग पंजीकृत हैं लेकिन शहर के कई इलाकों में घर-घर में यह धंधा चल रहा है। धंधा भी ऐसा है कि सिर्फ सबमर्सिबल लगाकर और बर्फ से पानी ठंडा करके बेच रहे हैं। जिनके पास प्लांट लगा है उनके यहां भी प्लांट कम ही चलता है। खर्चा बचाने की कोशिश की जाती है। गर्मी में इनकी सप्लाई बढ़ जाती है। एक अनुमान के मुताबिक एक दिन में 10000 से अधिक वाटर कैन की सप्लाई जगह- जगह होती है। इनकी कीमत प्रतिदिन 12 रुपए से 20 रुपए के बीच है। जिससे कमाई का आंकड़ा एक दिन में करीब 2 लाख से अधिक पहुंचता है।
कमाई का गणित
प्रतिदिन औसतन सप्लाई- 10 हजार कैन
प्रति वाटर कैन कीमत- 12 से 20 रुपए
रोज का कारोबार- 2 लाख रुपए
माह का कारोबार- 60 लाख रुपए
100 रुपए में पंजीकरण, फिर भी कोई नहीं लेता लाइसेंस
मॉडल टाउन में गुरमिंदर सिंह, सिटी स्टेशन पर हरीश धवन, दर्जी चौराहा पर सुधीर सक्सेना, घेर जाफर खां पर सैय्यद जफर अली, सूफी टोला में अबरार हुसैन का पंजीकरण नगर निगम है। एक अन्य ने आवेदन कर रखा है। इनकी फीस केवल सौ रुपए है। निगम में पिछले कई सालों में नया पंजीकरण नहीं हुआ है। इनको कोई नोटिस भी जारी नहीं किया जाता है। अवैध कारोबार करने वाले इसलिए लाइसेंस नहीं लेते हैं क्योंकि लाइसेंस लेने को पानी की जांच करानी होती है। इसके लिए प्लांट लगाने के बाद पानी का सैंपल लखनऊ जाता है। वहां से एनओसी आने के बाद नगर निगम लाइसेंस देता है।
यहां चल रहा है अवैध कारोबार
बिहारीपुर, संजयनगर, मॉडल टाउन, पुराना शहर, कुतुबखाना, सीबीगंज, सिटी स्टेशन, हरुनगला, रामनगर, बड़ा बाजार
वाटर कैन में होना चाहिए
जांच किया पानी
सोडियम नमक, मैग्नीशियम की मात्रा
पानी वाले का पूरा पता
हेल्पलाइन नंबर
पानी की कीमत टैक्स सहित
आईएसआई मार्क
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तंग दुकान में चल रहा सेंटर
किला ओवरब्रिज के नीच दूल्हे खां की मजार के पास मोहित कूल सेंटर के नाम से आठ बाई दस फिट की दुकान में पानी को शुद्ध और ठंडा बनाने का सेंटर संचालित है। फ्रिजर लगने के बाद यहां जरा सी जगह बचती है जिसमें वाटर कूलर एक के ऊपर एक रखे हुए थे। खुद को इस सेंटर का मालिक बता रहे वंशीनगला के मोहित कह रहे थे कि केवल 60 से 70 कूलर वह सप्लाई करते हैं, उनका छोटा सा काम है, कोई ज्यादा नियम कायदे पूछेगा तो बंद कर देंगे।
केस टू
डलावघर के सामने शुद्ध होता है पानी
जखीरा मोहल्ले में नगर निगम के डलावघर के सामने दीपक फिल्टर्ड कोल्ड ड्रिकिंग वाटर सेंटर है। जिस जगह पूरे मोहल्ले का कचरा पड़ता है, वहीं बराबर में शुद्ध पानी मुहैया कराने का दावा किया जाता है। हालात यह हैं कि कचरे के ठेले और पानी के ठेले भी एक साथ ही खड़े होते हैं। अंदर का नजारा और भी चौंकाने वाला था। गंदा कपड़ा और प्लास्टिक का बोरा समेत कुछ और सामान वहीं पड़ा था जहां मशीन से पानी टपक रहा था। वाटर कूलर भी खुले रखे थे। यहां काम कर रहे कर्मचारी बबलू ने बताया कि 300 से ज्यादा वाटर कूलर यहां से रोज सप्लाई किए जाते हैं।
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गैलरी में लगाया सिस्टम, सफाई ताक पर
चौपुला चौराहे के पास गौरव बस सर्विस वालों ने अपने दफ्तर के बगल स्थित गैलरी में वाटर सेंटर स्थापित कर रखा है। इससे सटकर ही लोग रह रहे हैं। जहां पानी साफ हो रहा था, वहीं फर्श साफ करने का केमिकल, वाइपर, पोंछा और जाला साफ करने का ब्रुश रखा हुआ था। सेंटर संचालक गौरव शर्मा का कहना था दस रुपये में लोगों को घर तक पानी पहुंचाना कोई खास फायदे का धंधा नहीं है। रिक्शे वाले अक्सर असावधानी से काम करते वक्त उनके वाटर कूलर तोड़ देते हैं। वह अगली साल ये काम बंद कर देंगे।
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मॉडल टाउन में चल रहे गंगोत्री वाटर सप्लाई का पंजीकरण नगर निगम में है। यहां दोपहर साढ़े 12 बजे वाटर कैनों की धुलाई हो रही थी। पानी मॉडल टाउन के लंगर में जाना था। एक घर में चल रहे वाटर प्लांट में फिल्टर मशीन लगी हुई है। सबमर्सिबल से पानी भरा जाता है जिसे फिल्टर में डालते हैं और यहां से पानी चिलर में ठंडा होकर कैन में भरा जाता है। एक दिन में 400 कैन की सप्लाई यहां से होती है।
केस फाइव
बिहारीपुर सब्जीमंडी के पास एक छोटे से घर में बाहर सरस वाटर सप्लाई का बोर्ड लगा हुआ है। यहां दो लोग बैठे थे, इनके पास कोई लाइसेंस नहीं था, बताने लगे कि मालिक के पास है। कमरे में एक पाइप लगा हुआ था जिससे पानी भरा जाता है। न तो इन्होंने अपनी फिल्टर मशीन दिखाई और न ही चिलर मशीन। आसपास के लोगों ने बताया कि यहां ऐेसे ही पानी भरते हैं। कई और घरों में काम चलता है।
बाजार, कार्यालयों और घरों में वाटर कैनों में पता नहीं कितने लोग पानी पहुंचा रहे हैं। नगर निगम में मात्र पांच वाटर सप्लाई करने वाले लोग पंजीकृत हैं लेकिन शहर के कई इलाकों में घर-घर में यह धंधा चल रहा है। धंधा भी ऐसा है कि सिर्फ सबमर्सिबल लगाकर और बर्फ से पानी ठंडा करके बेच रहे हैं। जिनके पास प्लांट लगा है उनके यहां भी प्लांट कम ही चलता है। खर्चा बचाने की कोशिश की जाती है। गर्मी में इनकी सप्लाई बढ़ जाती है। एक अनुमान के मुताबिक एक दिन में 10000 से अधिक वाटर कैन की सप्लाई जगह- जगह होती है। इनकी कीमत प्रतिदिन 12 रुपए से 20 रुपए के बीच है। जिससे कमाई का आंकड़ा एक दिन में करीब 2 लाख से अधिक पहुंचता है।
कमाई का गणित
प्रतिदिन औसतन सप्लाई- 10 हजार कैन
प्रति वाटर कैन कीमत- 12 से 20 रुपए
रोज का कारोबार- 2 लाख रुपए
माह का कारोबार- 60 लाख रुपए
100 रुपए में पंजीकरण, फिर भी कोई नहीं लेता लाइसेंस
मॉडल टाउन में गुरमिंदर सिंह, सिटी स्टेशन पर हरीश धवन, दर्जी चौराहा पर सुधीर सक्सेना, घेर जाफर खां पर सैय्यद जफर अली, सूफी टोला में अबरार हुसैन का पंजीकरण नगर निगम है। एक अन्य ने आवेदन कर रखा है। इनकी फीस केवल सौ रुपए है। निगम में पिछले कई सालों में नया पंजीकरण नहीं हुआ है। इनको कोई नोटिस भी जारी नहीं किया जाता है। अवैध कारोबार करने वाले इसलिए लाइसेंस नहीं लेते हैं क्योंकि लाइसेंस लेने को पानी की जांच करानी होती है। इसके लिए प्लांट लगाने के बाद पानी का सैंपल लखनऊ जाता है। वहां से एनओसी आने के बाद नगर निगम लाइसेंस देता है।
यहां चल रहा है अवैध कारोबार
बिहारीपुर, संजयनगर, मॉडल टाउन, पुराना शहर, कुतुबखाना, सीबीगंज, सिटी स्टेशन, हरुनगला, रामनगर, बड़ा बाजार
वाटर कैन में होना चाहिए
जांच किया पानी
सोडियम नमक, मैग्नीशियम की मात्रा
पानी वाले का पूरा पता
हेल्पलाइन नंबर
पानी की कीमत टैक्स सहित
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