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Bareilly News: बदलते मौसम में बीमारी से बचाएगा घर का'वैद्य', बढ़ेगी रोग प्रतिरोधक क्षमता

Tue, 12 Nov 2024 03:11 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2024 03:11 AM IST
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Home doctor will protect from diseases in changing weather, immunity will increase
- आयुर्वेद चिकित्सालय में बढ़े जोड़ों के दर्द, जुकाम, बुखार के मरीज, रसोईघर के मसालों से इम्युनिटी बढ़ाने का सुझाव दे रहे चिकित्सक
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बरेली। मौसम में बदलाव से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। जरा सी अनदेखी सेहत पर भारी पड़ती है। सर्दी, जुकाम, जोड़ों में दर्द से निजात के लिए एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय में बड़ी संख्या में मरीज रोज पहुंच रहे हैं। चिकित्सक इन्हें दवा देने के साथ ही आयुर्वेदिक विधि और घर की रसोई में उपलब्ध मसालों के उचित इस्तेमाल से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के बारे में बता रहे हैं।
एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के काय चिकित्सक डॉ. सीबी सिंह के मुताबिक सर्दी में ज्यादातर मरीज सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द से परेशान हैं। इसके अलावा ओपीडी में इलाज को पहुंच रहे मरीजों में करीब 40 फीसदी में ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ मिल रहा है। इन्हें दवा और ऋतु अनुसार आहार का सुझाव दिया जा रहा है।
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वहीं, बीमारी से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बरकरार रखने के लिए घरेलू उपाय भी बता रहे हैं। कहा कि रसोई में उपलब्ध मसाले घर के 'वैद्य' हैं। बताया कि गिलोय, दालचीनी, जायफल, सोंठ, मुलेठी, अदरक, अजवाइन, आंवला, हल्दी, तेजपत्ता, लौंग, इलायची आदि सर्वश्रेष्ठ औषधि हैं।
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ताकि सेहतमंद रहेंगे बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं रसशास्त्र की चिकित्सक डॉ. वीरकीर्ति के मुताबिक बुजुर्ग, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। लिहाजा, बदलते मौसम में ये जल्दी बीमार होते हैं। सर्दी से बचाने के लिए दूध के साथ खजूर, काले तिल, अश्वगंधा का सेवन करें। पांच वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को खांसी, जुकाम, नाक बहने से निजात के लिए सुहागा के छोटे टुकड़े तवे पर गर्म कर शहद, अदरक के रस से सेवन करने से राहत मिलेगी।


किसका, कैसे करें प्रयोग और उनके लाभ
हल्दी : दूध के साथ सेवन से रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। पाचन क्रिया सुधरती है। घाव के लिए एंटी बॉयोटिक है।
अदरक, काली मिर्च, लौंग का काढ़ा : सांस संबंधी रोग से राहत के लिए पांच ग्राम अदरक, दो काली मिर्च, दो लौंग पीस लें। आधा लीटर पानी में उबालें फिर गुनगुना कर सुबह-शाम सेवन करें।
गिलोय, एलोवेरा : गिलोय और तुलसी के पत्ते का रस 10-10 मिली, 50 मिली एलोवेरा जूस मिलाकर सुबह खाली पेट सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

जड़ी-बूटी और उनके उपयोग
- मुलेठी के एंटीवायरल गुण वायरस का संक्रमण रोकने के साथ गले के खरांस और दर्द से राहत दिलाता है।
- उन्नाब यूनानी औषधि है, जो बेर सुखा कर बनती है। खांसी दूर करने में कारगर है। विटामिन-सी भी मिलता है।
- तुलसी के एंटी बैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटीफंगल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण ठंड व संक्रमण से बचाव करते हैं।
- सूखी खांसी दूर करने के लिए अडूसा के पत्ते, मुनक्का और मिश्री के काढ़े का सेवन करें।
- घुटनों के दर्द और सूजन कम करने के लिए वसाका जड़ी-बूटी का उपयोग फायदेमंद होता है।
- नागरमोथा का सेवन भूख बढ़ाने, पाचन विकार दूर करने के साथ बुखार व पेट में कीड़े की समस्या दूर करता है।
- पिपली से ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, खांसी, गले की खरास, फेफड़ों के संक्रमण दूर करने में मदद मिलती है।
- काली मिर्च लिवर, किडनी और आंतों की सुरक्षा के लिए कारगर है। काली मिर्च में कैंसररोधी गुण होते हैं।
- सोंठ पाचन शक्ति को मजबूत बनाती है। सोंठ का सेवन पेट फूलने व गैस बनने के दर्द में रामबाण है।
- पपीते में गुणकारी एसिड होते हैं, जो प्लेटेलेट्स बढ़ाते हैं। कच्चे पपीते का सेवन लिवर, पीलिया रोग में फायदेमंद है।
- कालमेघ का सेवन बुखार, डेंगू, ऑर्थराइटिस में कारगर है। जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करता है। श्वसन प्रणाली मजबूत होती है। संवाद
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