Holashtak 2023: होलाष्टक आरंभ... सात मार्च तक बिल्कुल न करें ये काम, बरतें सावधानी
ज्योतिष की मान्यता के अनुसार इन आठ दिनों में प्रकृति के वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो जाता है, जिस कारण सभी शुभ कार्य पूर्णता वर्जित हो जाते हैं।
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होली से आठ दिन पूर्व लगने वाला होलाष्टक सोमवार से आरंभ हो रहा है, जिसका प्रभाव सात मार्च तक रहेगा। इन दिनों में शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। इसमें सावधानियां भी बरतने की आवश्यकता है। ज्योतिष की मान्यता के अनुसार इन आठ दिनों में प्रकृति के वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो जाता है, जिस कारण सभी शुभ कार्य पूर्णता वर्जित हो जाते हैं।
दरअसल वातावरण में होने वाले किसी भी परिवर्तन का मनुष्य के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। होलाष्टक के दौरान ग्रहों में भी उग्रता आ जाती है। जिस कारण होलाष्टक दोष में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकता है। अष्टमी तिथि को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा राहु उग्र अवस्था में रहते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा ने बताया कि ग्रहों की प्रतिकूलता के कारण ही विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार, भूमि पूजन, भूमि भवन का क्रय विक्रय, नवीन कार्य आदि वर्जित माने जाते हैं। इतना ही नहीं नवविवाहिताओं को ससुराल की पहली होली देखने की भी मनाही है। होलाष्टक के दौरान पूजा-पाठ आराधना मंगलकारी है और सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
बरते सावधानी, करें उपाय
होलाष्टक के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। धार्मिक कार्यों में मन लगाना चाहिए। व्रत-उपवास और धर्मकर्म के कार्य करें। सामर्थ के अनुसार दान करें। स्वच्छता और खान-पान का उचित ध्यान रखना भी आवश्यक है। ईश्वर भक्ति के साथ ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। तीर्थों में स्नान-दान का भी विशेष महत्व है। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय.. मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।
अगर कोई शिव जी का भक्त है तो शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाम करें। हनुमान जी के भक्त हैं तो हनुमान मंदिर में दीपक जला कर हनुमान चालीसा का पाठ करें। इन दिनों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। होलाष्टक में मन को शांत और सकारात्मक रखने के लिए ध्यान करें।