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चल कैसे रहा था ये हिना अस्पताल !
बरेली
Updated Wed, 27 May 2015 02:19 AM IST
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नगरिया परीक्षित एयरफोर्स के पास बेधड़क चल रहे हिना अस्पताल का संचालन को पूरी तरह से फर्जी था। अस्पताल संचालक के पास बीएएमएस की फर्जी डिग्री है। इसी के आधार पर उन्होंने आवेदन किया बाद में जांच में फर्जी पाए जाने पर रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया लेकिन अस्पताल चलता रहा । इस बीच संचालक ने डॉक्टर दूसरे डॉक्टर की डिग्री लगाकर नया रजिस्ट्रेशन कराना चाहा था उसे भी मंजूर नहीं किया गया। इसके बाद भी अस्पताल में मरीज भर्ती होते थे।
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11 मई को जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से जब अस्पताल में छापा मारा गया तो अजीब स्थिति मिली। कमिश्नर को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक यहां पौने दो बजे निरीक्षण हुआ। इसमें समय कोई मरीज भर्ती नहीं था। टीम ने रजिस्टर देखा तो उसमें दो मरीज भर्ती दिखाए गए जिसे जमशेद खान द्वारा देखा जा रहा था जबकि अस्पताल का पंजीकरण निरस्त था और जमशेद की डिग्री फर्जी थी। 13 मई को दोबारा इज्जतनगर थाने में जमशेद पर मेडिकल काउंसिल एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई। बता दें कि इससे पहले 21 जून 2013 को एडी हेेल्थ द्वारा इज्जतनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी थी।
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- बिहार विवि ने भेजी थी गलत सूचना
डॉ. जमशेद खान ने यूनिवर्सिटी ऑफ बिहार मुजफ्फरपुर से बीएएमस किया हुआ बताया था। जब जमशेद मामले की जांच हुई तो एडी हेल्थ ने बिहार विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर डिग्री के विषय में जानकारी मांगी। बकौल एडी हेल्थ डॉ. सुबोध शर्मा ने बताया कि 15 दिन में विवि की ओर से जवाब आया कि डिग्र्री बिल्कुल सही और मान्य है, जबकि तीन माह बाद फिर विवि के रजिस्ट्रार का पत्र आया कि डिग्री फर्जी है। और पहले जो सूचना भेजी गई थी वह गलत थी।
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डॉ वीपी श्रीवास्तव की डिग्री लगाई
जमशेद की क्लीनिक 2013 में सीज करने के निर्देश जारी कर दिए गए थे। उनके खिलाफ एफआईआर भी तभी हो गई थी लेकिन जमशेद ने कानूनी पचड़े से बचने के लिए डॉ. वीपी श्रीवास्तव जो कि रूहेलखंड मेडिकल कालेज में असिसटेंट प्रोफेसर थे उनके नाम से सीएमओ कार्यालय में आवेदन किया था। सीएमओ ने इस मामले में कई कमियां देखते हुए आवेदन मंजूर नहीं किया। बावजूद इसके अस्पताल लगातार चल रहा था।
- तीन साल इसलिए लटकी कार्रवाई
वर्ष 2013 में एफआईआर होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में सीएमओ डॉ. विजय यादव का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के पास केवल पड़ताल करने का अधिकार है। रिपोर्ट बनाकर हमारी ओर से भेजी जाती है। इसके बाद अस्पताल जिला प्रशासन को सीज करना होता है। इस मामले में यही हुआ। एफआईआर तो दर्ज हो गई लेकिन पुलिस व प्रशासन की ओर से कु छ नहीं हुआ। कमिश्नर के आदेश पर सोमवार को त्वरित कार्रवाई हुई।
- अभी आठ शिकायतें और है लाइन में
सीएमओ दफ्तर में फर्जी डॉक्टराें और अस्पतालाें के खिलाफ शिकायताें की लाइन लगी हुई है। अभी भी करीब आठ शिकायतें पेंडिंग हैं। इन पर कार्रवाई का खाका तैयार नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों एक हफ्ते की हड़ताल के चलते इनकी नोटिस रोकी गई। वैसे यह शिकायतें अभी एक माह पहले ही आई हैं। इनमें अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र की हैं।
वर्जन--
‘जमशेद खान के पास फर्जी डिग्री है। बिहार विश्वविद्यालय ने पहली बार पत्र भेजकर डिग्री सही बताई थी, जबकि दोबारा पत्र भेजकर डिग्री फर्जी बतायी। डॉ. वीपी श्रीवास्तव अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस कोई और काम करते हुए भी कर सकते हैं बस उनकी डिग्री सही होनी चाहिए लेकिन आवेदन इसलिए नहीं स्वीकार किया क्याेंकि अस्पताल का किरायानामा वीपी श्रीवास्तव के नाम नहीं किया गया था। अस्पताल के संचालक जमशेद नहीं हो सकते।’
डॉ. विजय यादव, सीएमओ
सफाई--
‘मुझे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। स्थानीय पार्षद व जमीनी विवाद के चलते मुझे निशाना बनाया गया है।’
जमशेद खान, आरोपी अस्पताल संचालक