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रूबेला और खसरा के मरीजों को खोजा जाएगा
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एक बच्चे में मिला खसरा और रूबेला का केस तो पूरे गांव के बच्चों को लगेंगे टीके
- टीओटी कार्यशाला में सीएमओ ने दिए निर्देश, खसरा और रूबेला के केस खोजे जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। रूबेला और खसरा जैसी खतरनाक बीमारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग खास इंतजाम करने जा रहा है। अगर किसी गांव में रूबेला और खसरा का एक भी केस सामने आता है तो उस गांव के सारे बच्चों को टीके लगाए जाएंगे। इसके अलावा यह बीमारी किस क्षेत्र में पैर पसार रही है स्वास्थ्य विभाग इसके लिए सर्वेलांस करेगा। इस बीमारी के केस खोजकर उनका लैब में परीक्षण कराया जाएगा। अगर किसी क्षेत्र में केस सामने आते हैं तो वहां और केस खोजने के लिए टीम लगाई जाएगी। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की शुक्रवार को आईएमए हाल में टीओटी कार्यशाला हुई।
सीएमओ डॉ. विनीत शुल्क ने बताया कि जिले को 2020 तक जिले को खसरा मुक्त करने का लक्ष्य है। जिले में 17.5 लाख का लक्ष्य था जिसे पूरा कर लिया गया। डब्ल्यूएचओ के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. पीवी कौशिक ने बताया कि रूबेला और खसरा के केस पता करने के लिए टीमें लगाई जाएंगी। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि मीजिल्स जिसे गांवों में खसरा की बीमारी कहा जाता है एक जानलेवा बीमारी है। यह एक प्रभावित व्यक्ति के छींकने से फैल सकती है। रूबेला बीमारी के कारण कई प्रकार की शारीरिक विसंगतियों के शिकार हो जाते हैं जैसे अंधापन, बहरापन, कमजोर दिमाग, दिल की बीमारी आदि। कार्यशाला में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के सभी चिकित्साधिकारी, यूनिसेफ के प्रतिनिधि शामिल रहे।
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- टीओटी कार्यशाला में सीएमओ ने दिए निर्देश, खसरा और रूबेला के केस खोजे जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। रूबेला और खसरा जैसी खतरनाक बीमारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग खास इंतजाम करने जा रहा है। अगर किसी गांव में रूबेला और खसरा का एक भी केस सामने आता है तो उस गांव के सारे बच्चों को टीके लगाए जाएंगे। इसके अलावा यह बीमारी किस क्षेत्र में पैर पसार रही है स्वास्थ्य विभाग इसके लिए सर्वेलांस करेगा। इस बीमारी के केस खोजकर उनका लैब में परीक्षण कराया जाएगा। अगर किसी क्षेत्र में केस सामने आते हैं तो वहां और केस खोजने के लिए टीम लगाई जाएगी। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की शुक्रवार को आईएमए हाल में टीओटी कार्यशाला हुई।
सीएमओ डॉ. विनीत शुल्क ने बताया कि जिले को 2020 तक जिले को खसरा मुक्त करने का लक्ष्य है। जिले में 17.5 लाख का लक्ष्य था जिसे पूरा कर लिया गया। डब्ल्यूएचओ के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. पीवी कौशिक ने बताया कि रूबेला और खसरा के केस पता करने के लिए टीमें लगाई जाएंगी। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरएन सिंह ने बताया कि मीजिल्स जिसे गांवों में खसरा की बीमारी कहा जाता है एक जानलेवा बीमारी है। यह एक प्रभावित व्यक्ति के छींकने से फैल सकती है। रूबेला बीमारी के कारण कई प्रकार की शारीरिक विसंगतियों के शिकार हो जाते हैं जैसे अंधापन, बहरापन, कमजोर दिमाग, दिल की बीमारी आदि। कार्यशाला में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के सभी चिकित्साधिकारी, यूनिसेफ के प्रतिनिधि शामिल रहे।
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