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हौसला है आसमान में उड़ने का... पंख तो मिलें
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मेडल के साथ पावर लिफ्टिंग शैफाली
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देश के लिए खेलने का सपना साकार करने के लिए जूझ रही हैं पावरलिफ्टिंग की जुझारू खिलाड़ी शेफाली
मां करती हैं घरों में काम, पिता मामूली नौकरी, फिर भी देश के लिए गोल्ड जीतने का सपना
बरेली। कोई सुविधा हासिल न होने के बावजूद हौसलों की उड़ान कितनी ऊंची जा सकती है, 12वीं की छात्रा शेफाली इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। परिवार में बेहद तंगी का माहौल होने के बावजूद वह अपने माता-पिता के प्रोत्साहन से न सिर्फ पावरलिफ्टिंग में देश के लिए खेलने के सपनों को बुनने में जुटी हुई हैं बल्कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में अपने ही दम पर कई मेडल भी जीत चुकी हैं। यूपी स्टेट की स्ट्रॉन्ग वूमेन का खिताब भी जीता है।
घर में तंगी का माहौल होने के बावजूद तीन साल से लगातार खेल रहीं शेफाली जो वजन उठाती हैं, वह कुछ ज्यादा ही भारी है। उनकी मां घरों में चौका-चूल्हा करती हैं और पिता मामूली प्राइवेट नौकरी। दोनों पर परिवार के सात सदस्यों का पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी है, इसके बावजूद वे न सिर्फ शेफाली को खेलने का भरपूर मौका दे रहे हैं बल्कि उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित भी करते हैं। इसी प्रेरणा से शेफाली के हौसले उड़ान भर रहे हैं।
शेफाली कहती हैं कि वह अपने माता-पिता की हौसलाअफजाही से ही अपना खेल जारी रखे हुए हैं। दोनों हमेशा उन्हें खेलने के लिए प्रेरित करते हैं। वे अपनी जरूरतें कम करके उन्हें दूसरे शहरों में आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए जाने का खर्च देते हैं। शेफाली 57 किलो भार वर्ग में 270 किलो तक वजन उठा लेती हैं। उनका कहना है कि अगर कुछ सुविधाएं मिल जाएं तो देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए मुश्किल नहीं होगा।
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- शहर में नहीं पॉवरलिफ्टिंग खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधाएं
शहर में खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं नाममात्र के ही लिए हैं। नेशनल और स्टेट लेवल पर बरेली का नाम रोशन कर चुकी मॉडल टाउन इलाके में रहने वाली शेफाली अक्सर अभ्यास करने के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश में भटकती हैं। स्पोर्ट्स स्टेडियम में पॉवरलिफ्टिंग के खिलाड़ियों के लिए जरूरी खेल सामग्री तक उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि यहां पावरलिफ्टिंग के खिलाड़ियों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। खेलों के प्रति प्रशासन की बेरुखी के कारण तमाम खिलाड़ी खेलना छोड़कर घरों में बैठे हुए हैं।
सरकार करे मदद तो देश का नाम रोशन करेगी हमारी बेटी
शेफाली के हौसलों को जीजान से उड़ान देने में जुटे उसके शेफाली की मां किरन और पिता संदीप कहते हैं कि उनका भी सपना है कि उनकी बेटी देश के लिए खेले लेकिन मुश्किलें बहुत हैं। सरकार की ओर से कोई भी सुविधा हासिल नहीं है। उनकी बेटी को खेल विभाग और अफसरों ने एक किट तक मुहैया नहीं कराई है। इतना बड़ा खेल विभाग है, खेलों को बढ़ाने का भी दावा किया जाता है। अगर उनकी बेटी को कुछ सुविधाएं दिला दी जाएं तो उसमें देश का नाम रोशन करने का माद्दा है।
गोल्ड लाना कोई मुश्किल नहीं बशर्ते समस्याएं हल हों
तीन सालों में शेफाली 15 से ज्यादा बार नेशनल और स्टेट प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं। शेफाली कहती हैं कि वह अपने माता-पिता के प्रोत्साहन की बदौलत ही खेल रही हैं। कहीं भी बाहर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जाने पर काफी पैसा खर्च होता है। कई बार उनके परिवार के लिए यह इंतजाम करना मुश्किल होता है लेकिन फिर भी किसी तरह वे करते हैं। सरकार अगर ट्रायल कर पावरलिफ्टिंग के खिलाड़ियों पर ध्यान दे तो और उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराएं तो समस्याएं काफी हद तक खत्म हो सकती है। सुविधाएं न होने से घर पर भी ठीक से अभ्यास नहीं नहीं हो पाता है। सुविधाएं मिलें तो देश के लिए गोल्ड लाना कोई मुश्किल नहीं है।
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मां करती हैं घरों में काम, पिता मामूली नौकरी, फिर भी देश के लिए गोल्ड जीतने का सपना
बरेली। कोई सुविधा हासिल न होने के बावजूद हौसलों की उड़ान कितनी ऊंची जा सकती है, 12वीं की छात्रा शेफाली इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। परिवार में बेहद तंगी का माहौल होने के बावजूद वह अपने माता-पिता के प्रोत्साहन से न सिर्फ पावरलिफ्टिंग में देश के लिए खेलने के सपनों को बुनने में जुटी हुई हैं बल्कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में अपने ही दम पर कई मेडल भी जीत चुकी हैं। यूपी स्टेट की स्ट्रॉन्ग वूमेन का खिताब भी जीता है।
घर में तंगी का माहौल होने के बावजूद तीन साल से लगातार खेल रहीं शेफाली जो वजन उठाती हैं, वह कुछ ज्यादा ही भारी है। उनकी मां घरों में चौका-चूल्हा करती हैं और पिता मामूली प्राइवेट नौकरी। दोनों पर परिवार के सात सदस्यों का पालन-पोषण करने की जिम्मेदारी है, इसके बावजूद वे न सिर्फ शेफाली को खेलने का भरपूर मौका दे रहे हैं बल्कि उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित भी करते हैं। इसी प्रेरणा से शेफाली के हौसले उड़ान भर रहे हैं।
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शेफाली कहती हैं कि वह अपने माता-पिता की हौसलाअफजाही से ही अपना खेल जारी रखे हुए हैं। दोनों हमेशा उन्हें खेलने के लिए प्रेरित करते हैं। वे अपनी जरूरतें कम करके उन्हें दूसरे शहरों में आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए जाने का खर्च देते हैं। शेफाली 57 किलो भार वर्ग में 270 किलो तक वजन उठा लेती हैं। उनका कहना है कि अगर कुछ सुविधाएं मिल जाएं तो देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए मुश्किल नहीं होगा।
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- शहर में नहीं पॉवरलिफ्टिंग खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधाएं
शहर में खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं नाममात्र के ही लिए हैं। नेशनल और स्टेट लेवल पर बरेली का नाम रोशन कर चुकी मॉडल टाउन इलाके में रहने वाली शेफाली अक्सर अभ्यास करने के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश में भटकती हैं। स्पोर्ट्स स्टेडियम में पॉवरलिफ्टिंग के खिलाड़ियों के लिए जरूरी खेल सामग्री तक उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि यहां पावरलिफ्टिंग के खिलाड़ियों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। खेलों के प्रति प्रशासन की बेरुखी के कारण तमाम खिलाड़ी खेलना छोड़कर घरों में बैठे हुए हैं।
सरकार करे मदद तो देश का नाम रोशन करेगी हमारी बेटी
शेफाली के हौसलों को जीजान से उड़ान देने में जुटे उसके शेफाली की मां किरन और पिता संदीप कहते हैं कि उनका भी सपना है कि उनकी बेटी देश के लिए खेले लेकिन मुश्किलें बहुत हैं। सरकार की ओर से कोई भी सुविधा हासिल नहीं है। उनकी बेटी को खेल विभाग और अफसरों ने एक किट तक मुहैया नहीं कराई है। इतना बड़ा खेल विभाग है, खेलों को बढ़ाने का भी दावा किया जाता है। अगर उनकी बेटी को कुछ सुविधाएं दिला दी जाएं तो उसमें देश का नाम रोशन करने का माद्दा है।
गोल्ड लाना कोई मुश्किल नहीं बशर्ते समस्याएं हल हों
तीन सालों में शेफाली 15 से ज्यादा बार नेशनल और स्टेट प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं। शेफाली कहती हैं कि वह अपने माता-पिता के प्रोत्साहन की बदौलत ही खेल रही हैं। कहीं भी बाहर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जाने पर काफी पैसा खर्च होता है। कई बार उनके परिवार के लिए यह इंतजाम करना मुश्किल होता है लेकिन फिर भी किसी तरह वे करते हैं। सरकार अगर ट्रायल कर पावरलिफ्टिंग के खिलाड़ियों पर ध्यान दे तो और उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराएं तो समस्याएं काफी हद तक खत्म हो सकती है। सुविधाएं न होने से घर पर भी ठीक से अभ्यास नहीं नहीं हो पाता है। सुविधाएं मिलें तो देश के लिए गोल्ड लाना कोई मुश्किल नहीं है।