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उर्स पर तो नहीं पड़ा नोटबंदी का कोई असर
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Mon, 28 Nov 2016 12:41 AM IST
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Had no effect on URS Notbandi
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा था कि इस बार नोटबंदी का असर उर्से रजवी पर बहुत गहरा पड़ने वाला है, मगर सारे पूर्वानुमानों को भारी संख्या में पहुंचने वाले देश विदेश के जायरीन ने गलत साबित कर दिया। बाजार भी कमजोर नहीं रहा। इस बार भी लगभग आठ करोड़ से ज्यादा का कारोबार होने का अनुमान है। यह आंकड़ा पिछली साल के आस पास ही है।
उर्स के पहले ही रोज शहर के सारे होटल, मेहमानखाने, गेस्ट हाउस फुल हो गए। कई जगह हाऊसफुल का बोर्ड लगा दिया गया। दरगाह के समीप जितने भी मेहमानखाने और जायरीन के ठहरने की जगह हैं। वहां पैर रखने की जगह तक नहीं थी। इसके अलावा यहां के तमाम मदरसे, मस्जिदों व तमाम शहरियों ने अपने-अपने घरों में जायरीन को ठहरने के लिए कमरे दिए। यहां तक कि बारात घरों तक में जायरीन ठहरे। उर्स कार्यक्रम के दौरान जिस तरह भीड़ उमड़ी उसका अंदाजा पिछले साल के मुकाबले ज्यादा का लगाया जा रहा है।
दरगाह प्रवक्ता मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी ने बताया कि नोटबंदी का उर्स में जायरीन की आमद पर कोई फर्क नहीं पड़ा। बल्कि इस बार ज्यादा ही जायरीन यहां पहुंचे। विदेश से भी काफी संख्या संख्या में जायरीन आए। इंग्लैंड, मॉरीशस, अफ्रीका, तुर्की, सऊदी अरब, हालैंड, श्री लंका, नेपाल, दुबई आदि देशों के अलावा देश के उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, उड़ीसा, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, हिमाचल प्रदेश, कश्मीर आदि, प्रदेशों के लाखों जायरीन बरेली की सरजमीन पर पहुंचे।
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उर्स प्रभारी सय्यद आसिफ मियां साहब ने बताया कि परंपरागत तरीके से जायरीन फूल, शीरीनी, किताबें और अंगूठी आदि खरीद कर ले गए। जिन्हें कोई दिक्कत आई तो दरगाह की ओर से मदद भी की गई। बिहार के जायरीन हमीद खां ने बताया कि बरेली शरीफ के उर्से रजवी में आने के लिए हम पूरे साल गुल्लक में पैसे डालते हैं जो छोटे नोटों की सूरत में होते हैं वही इस बार उर्से रजवी में काम आये हैं।
कारोबार की बात करें तो यहां उर्स रजवी में इस्लामियां इंटर कालेज मैदान पर लगने वाले मेले में लगभग 300 दुकानें लगी थीं। इसमें प्रत्येक दुकान पर 20 हजार का कारोबार माना जा रहा है। इसके मुताबिक यहां से तीन दिनों में लगभग दो करोड़ के कारोबार का अनुमान है। इसी तरह उर्स स्थल इस्लामियां कॉलेज से लेकर दरगाह तक फड़ पर लगभग 500 दुकानें लगी होंगी। इसमें एक-एक दुकानदार के कम से कम 5000 रुपये का कारोबार होने अंदाजा है। इस लिहाज से यहां भी तीन दिनों में कुल कारोबार लगभग एक करोड़ रुपये बैठता है।
ऐसे ही दरगाह मार्केट की बात करें तो यहां 60 दुकानें हैं। यहां एक-एक दुकानदार का चार दिनों लगभग 40-50 हजार का कारोबार होने का अनुमान है। इस तरह यहां भी लगभग 24 लाख का कारोबार हुआ है। इसके अलावा शहर के तमाम अलग-अलग जगहों से भी लोग खरीदारी करते हैं। इसमें खास तौर से जरी के कपड़े, कुर्ता पैजामा और सुरमा आदि हैं। इसकी भी लाखों में खरीदारी होती है। करीब पांच करोड़ रुपये का कारोबार तो हुआ ही होगा है। बाकी फुटकर में चाय, पान और खाने आदि का अलग है। दरगाह के मार्केट के दुकानदार मोहम्मद आमिर खां रजा का कहना है कि कारोबार लगभग ठीक रहा। थोक व्यापार कम हुआ मगर फुटकर काम अच्छा रहा है।
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उर्स के पहले ही रोज शहर के सारे होटल, मेहमानखाने, गेस्ट हाउस फुल हो गए। कई जगह हाऊसफुल का बोर्ड लगा दिया गया। दरगाह के समीप जितने भी मेहमानखाने और जायरीन के ठहरने की जगह हैं। वहां पैर रखने की जगह तक नहीं थी। इसके अलावा यहां के तमाम मदरसे, मस्जिदों व तमाम शहरियों ने अपने-अपने घरों में जायरीन को ठहरने के लिए कमरे दिए। यहां तक कि बारात घरों तक में जायरीन ठहरे। उर्स कार्यक्रम के दौरान जिस तरह भीड़ उमड़ी उसका अंदाजा पिछले साल के मुकाबले ज्यादा का लगाया जा रहा है।
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दरगाह प्रवक्ता मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी ने बताया कि नोटबंदी का उर्स में जायरीन की आमद पर कोई फर्क नहीं पड़ा। बल्कि इस बार ज्यादा ही जायरीन यहां पहुंचे। विदेश से भी काफी संख्या संख्या में जायरीन आए। इंग्लैंड, मॉरीशस, अफ्रीका, तुर्की, सऊदी अरब, हालैंड, श्री लंका, नेपाल, दुबई आदि देशों के अलावा देश के उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, उड़ीसा, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, हिमाचल प्रदेश, कश्मीर आदि, प्रदेशों के लाखों जायरीन बरेली की सरजमीन पर पहुंचे।
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उर्स प्रभारी सय्यद आसिफ मियां साहब ने बताया कि परंपरागत तरीके से जायरीन फूल, शीरीनी, किताबें और अंगूठी आदि खरीद कर ले गए। जिन्हें कोई दिक्कत आई तो दरगाह की ओर से मदद भी की गई। बिहार के जायरीन हमीद खां ने बताया कि बरेली शरीफ के उर्से रजवी में आने के लिए हम पूरे साल गुल्लक में पैसे डालते हैं जो छोटे नोटों की सूरत में होते हैं वही इस बार उर्से रजवी में काम आये हैं।
कारोबार की बात करें तो यहां उर्स रजवी में इस्लामियां इंटर कालेज मैदान पर लगने वाले मेले में लगभग 300 दुकानें लगी थीं। इसमें प्रत्येक दुकान पर 20 हजार का कारोबार माना जा रहा है। इसके मुताबिक यहां से तीन दिनों में लगभग दो करोड़ के कारोबार का अनुमान है। इसी तरह उर्स स्थल इस्लामियां कॉलेज से लेकर दरगाह तक फड़ पर लगभग 500 दुकानें लगी होंगी। इसमें एक-एक दुकानदार के कम से कम 5000 रुपये का कारोबार होने अंदाजा है। इस लिहाज से यहां भी तीन दिनों में कुल कारोबार लगभग एक करोड़ रुपये बैठता है।
ऐसे ही दरगाह मार्केट की बात करें तो यहां 60 दुकानें हैं। यहां एक-एक दुकानदार का चार दिनों लगभग 40-50 हजार का कारोबार होने का अनुमान है। इस तरह यहां भी लगभग 24 लाख का कारोबार हुआ है। इसके अलावा शहर के तमाम अलग-अलग जगहों से भी लोग खरीदारी करते हैं। इसमें खास तौर से जरी के कपड़े, कुर्ता पैजामा और सुरमा आदि हैं। इसकी भी लाखों में खरीदारी होती है। करीब पांच करोड़ रुपये का कारोबार तो हुआ ही होगा है। बाकी फुटकर में चाय, पान और खाने आदि का अलग है। दरगाह के मार्केट के दुकानदार मोहम्मद आमिर खां रजा का कहना है कि कारोबार लगभग ठीक रहा। थोक व्यापार कम हुआ मगर फुटकर काम अच्छा रहा है।