{"_id":"673d1393afec9ad17b0c08a4","slug":"generative-ai-has-the-power-to-increase-the-capacity-of-the-human-brain-prof-mishra-bareilly-news-c-4-bly1015-524703-2024-11-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेनेरेटिव एआई में मानव मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाने की शक्ति : प्रो. मिश्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेनेरेटिव एआई में मानव मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाने की शक्ति : प्रो. मिश्रा
विज्ञापन
बरेली। जेनेरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में मानव मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाने की शक्ति है। मानव की रचनात्मकता और एआई के बीच सहयोग से कई क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की जा सकती है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के एमबीए सभागार में मंगलवार को आयोजित कार्यशाला में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. आरएस मिश्रा ने ये बातें कहीं।
प्रो. मिश्रा ने प्रतिभागियों को एआई के एकीकरण के प्रति गंभीरता से सोचने का आग्रह किया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि जेनेरेटिव एआई महज तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि एक आदर्श बदलाव है। यह पढ़ाने और सीखने के तरीके को बढ़ा सकता है। यूनेस्को ने रुविवि के शिक्षा विभाग की डॉ. क्षमा पांडे को कार्यशाला के लिए 2.68 लाख रुपये प्रदान किया है। कार्यक्रम सचिव डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि कार्यशाला में अल्जीरिया, बांग्लादेश, नेपाल आदि देशों से 750 लोगों ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया। 250 से अधिक लोग ऑफलाइन भी शामिल हुए।
डाटा विश्लेषण करने में है सक्षम
मुख्य अतिथि गोविंद वल्लभ पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विवि, पंतनगर के अनुसंधान निदेशक प्रो. अजीत सिंह नैन ने कहा कि जेनेरेटिव एआई विद्वानों को डाटा के रचनात्मक विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है। इससे शोध के क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, एआई अनुप्रयोगों के आसपास नैतिक विचारों के बारे में सतर्क रहना जरूरी है। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी का उपयोग मानवीय मूल्यों और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप हो। कार्यशाला में मिसिसिपी वैली स्टेट विवि, यूएसए व फार वेस्टर्न विवि, नेपाल का सहयोग रहा। स्पेन की प्रो. एंटिनिता राफेल व नेली डॉयच समेत डॉ. कनक शर्मा, प्रो. एसएस बेदी ने भी संबोधन किया। अभ्यास सत्र का संचालन अविचल दीक्षित, कार्यक्रम का संचालन डॉ. इरम नईम और प्रिय दुबे ने किया। शिक्षा विभाग की अध्यक्ष प्रो. संतोष अरोड़ा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रो. मिश्रा ने प्रतिभागियों को एआई के एकीकरण के प्रति गंभीरता से सोचने का आग्रह किया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि जेनेरेटिव एआई महज तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि एक आदर्श बदलाव है। यह पढ़ाने और सीखने के तरीके को बढ़ा सकता है। यूनेस्को ने रुविवि के शिक्षा विभाग की डॉ. क्षमा पांडे को कार्यशाला के लिए 2.68 लाख रुपये प्रदान किया है। कार्यक्रम सचिव डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि कार्यशाला में अल्जीरिया, बांग्लादेश, नेपाल आदि देशों से 750 लोगों ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया। 250 से अधिक लोग ऑफलाइन भी शामिल हुए।
विज्ञापन
डाटा विश्लेषण करने में है सक्षम
मुख्य अतिथि गोविंद वल्लभ पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विवि, पंतनगर के अनुसंधान निदेशक प्रो. अजीत सिंह नैन ने कहा कि जेनेरेटिव एआई विद्वानों को डाटा के रचनात्मक विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है। इससे शोध के क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, एआई अनुप्रयोगों के आसपास नैतिक विचारों के बारे में सतर्क रहना जरूरी है। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी का उपयोग मानवीय मूल्यों और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप हो। कार्यशाला में मिसिसिपी वैली स्टेट विवि, यूएसए व फार वेस्टर्न विवि, नेपाल का सहयोग रहा। स्पेन की प्रो. एंटिनिता राफेल व नेली डॉयच समेत डॉ. कनक शर्मा, प्रो. एसएस बेदी ने भी संबोधन किया। अभ्यास सत्र का संचालन अविचल दीक्षित, कार्यक्रम का संचालन डॉ. इरम नईम और प्रिय दुबे ने किया। शिक्षा विभाग की अध्यक्ष प्रो. संतोष अरोड़ा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संवाद
विज्ञापन