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Bareilly News: मौत में भी धोखाधड़ी, मां की नौकरी हड़पने के लिए 12 घंटे पहले ही बनवा लिया प्रमाण पत्र
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बरेली। आठवीं वाहिनी पीएसी की कुक चंद्रा देवी की सेवानिवृत्ति के दिन ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई तो बेटे प्रह्लाद सिंह मेहर ने नौकरी हथियाने के लिए खेल कर दिया। मौत रात में हुई, जबकि बेटे ने आश्रित कोटे से नौकरी हासिल करने के लिए सुबह का समय दर्शाते हुए प्रमाण पत्र बनवा लिया। दोनों में 12 घंटे का अंतर बताया जा रहा है। मामला खुलने पर बुधवार देर रात कैंट थाने में बेटे के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
आठवीं वाहिनी पीएसी के शिविरपाल रामनाथ राणा ने कैंट पुलिस को बताया कि कुक चंद्रा देवी की तबीयत खराब होने पर उनको 27 फरवरी को जिला अस्पताल भेजा गया था। उनका बेटा प्रह्लाद सिंह मेहर वहां से उनको निजी मेडिकल कॉलेज ले गया। वहां से चंद्रा देवी को एसजीपीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया। 28 फरवरी को प्रभारी दल नायक चिरांशु कुमार की मौजूदगी में प्रह्लाद ने शाम 5:33 बजे मां चंद्रा देवी को वहां से जीवित अवस्था में डिस्चार्ज करा लिया। आरोप है कि आश्रित कोटे से नौकरी पाने के लिए प्रह्लाद ने चंद्रा देवी का जो मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग में जमा कराया गया है, उस पर उनकी मृत्यु 28 फरवरी की सुबह 5:23 बजे दर्शायी गई है।
गाय चोरी का सदमा बताकर प्रचारित किया
सेवानिवृत्त होने से कुछ दिन पहले चंद्रा देवी बीमार पड़ गई थीं। तब उनके बेटे और बहू ने प्रचारित किया कि वह जिस गाय को पालती थीं, वह चोरी हो गई। सदमे में उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया है। कुछ समय उनका घर पर ही इलाज कराया, फिर सरकारी अस्पताल में दिखाया। पीजीआई से अचानक डिस्चार्ज कराने की भी स्पष्ट वजह नहीं बताई। चर्चा है कि नौकरी पाने के लिए चंद्रा देवी की जान अपनों ने ही ले ली। पुलिस के सामने इस सच से पर्दा उठाने की चुनौती है। ब्यूरो
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आठवीं वाहिनी पीएसी के शिविरपाल रामनाथ राणा ने कैंट पुलिस को बताया कि कुक चंद्रा देवी की तबीयत खराब होने पर उनको 27 फरवरी को जिला अस्पताल भेजा गया था। उनका बेटा प्रह्लाद सिंह मेहर वहां से उनको निजी मेडिकल कॉलेज ले गया। वहां से चंद्रा देवी को एसजीपीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया। 28 फरवरी को प्रभारी दल नायक चिरांशु कुमार की मौजूदगी में प्रह्लाद ने शाम 5:33 बजे मां चंद्रा देवी को वहां से जीवित अवस्था में डिस्चार्ज करा लिया। आरोप है कि आश्रित कोटे से नौकरी पाने के लिए प्रह्लाद ने चंद्रा देवी का जो मृत्यु प्रमाण पत्र विभाग में जमा कराया गया है, उस पर उनकी मृत्यु 28 फरवरी की सुबह 5:23 बजे दर्शायी गई है।
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गाय चोरी का सदमा बताकर प्रचारित किया
सेवानिवृत्त होने से कुछ दिन पहले चंद्रा देवी बीमार पड़ गई थीं। तब उनके बेटे और बहू ने प्रचारित किया कि वह जिस गाय को पालती थीं, वह चोरी हो गई। सदमे में उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया है। कुछ समय उनका घर पर ही इलाज कराया, फिर सरकारी अस्पताल में दिखाया। पीजीआई से अचानक डिस्चार्ज कराने की भी स्पष्ट वजह नहीं बताई। चर्चा है कि नौकरी पाने के लिए चंद्रा देवी की जान अपनों ने ही ले ली। पुलिस के सामने इस सच से पर्दा उठाने की चुनौती है। ब्यूरो
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