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मनरेगा के कामचोरों पर शासन सख्त, पूछा क्या कार्रवाई की
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बरेली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में फर्जीवाड़ा करने वाले चहेतों पर अफसर मेहरबान हैं। शासन ने कार्रवाई के निर्देश दिए तो स्थानीय अफसरों ने इन्हें बचाते हुए आखिरी मौका देने की वकालत कर दी। अफसरों की इस कारगुजारी को गंभीरता से लेते हुए शासन ने नाराजगी जताई है। प्रमुख सचिव ने अफसरों की मंशा पर सवाल उठाते हुए गड़बड़ी के जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने एटीआर (एक्शन टेकेन रिपोर्ट) को नरेगा साफ्ट पर भी अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। इससे अफसरों में हड़कंप मचा है।
प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सोशल ऑडिट में मिली खामियों की जांच कर नरेगा साफ्ट पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए थे। मगर बीडीओ, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी समेत क्रियान्वयन एजेंसियां इन खामियों में सुधार नहीं कर रही हैं। गबन और अनियमित खर्च की वसूली को भी गंभीरता से नहीं लिया गया। प्रमुख सचिव ने उपायुक्त मनरेगा को इस लापरवाही के जिम्मेदारों पर कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जिसके तहत दोषी कर्मचारियों पर आपराधिक, सिविल केस दर्ज कराने या सेवा समाप्ति की संस्तुति करने के निर्देश हैं।
महीने भर में करनी होगी कार्रवाई
प्रमुख सचिव ने अंदेशा जताया है कि वित्तीय अनियमितता और गबन के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने महीने भर की मोहलत देते हुए ऐसे मामलों की जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की संस्तुति नरेगा साफ्ट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। कहा है कि सोशल ऑडिट में मिली खामियों के प्रकरणों की जांच कार्यक्रम अधिकारी सूचीबद्ध करेंगे। साक्ष्यों के साथ रिपोर्ट उपायुक्त श्रम विभाग को भी भेजी जाएगी। वह तथ्यों का परीक्षण कर कार्रवाई की टिप्पणी करते हुए रिपोर्ट सीडीओ अथवा अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक को सौंपेंगे। सीडीओ कार्रवाई की संस्तुति करेंगे और डीएम कार्रवाई करेंगे।
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प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सोशल ऑडिट में मिली खामियों की जांच कर नरेगा साफ्ट पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए थे। मगर बीडीओ, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी समेत क्रियान्वयन एजेंसियां इन खामियों में सुधार नहीं कर रही हैं। गबन और अनियमित खर्च की वसूली को भी गंभीरता से नहीं लिया गया। प्रमुख सचिव ने उपायुक्त मनरेगा को इस लापरवाही के जिम्मेदारों पर कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जिसके तहत दोषी कर्मचारियों पर आपराधिक, सिविल केस दर्ज कराने या सेवा समाप्ति की संस्तुति करने के निर्देश हैं।
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महीने भर में करनी होगी कार्रवाई
प्रमुख सचिव ने अंदेशा जताया है कि वित्तीय अनियमितता और गबन के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने महीने भर की मोहलत देते हुए ऐसे मामलों की जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की संस्तुति नरेगा साफ्ट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। कहा है कि सोशल ऑडिट में मिली खामियों के प्रकरणों की जांच कार्यक्रम अधिकारी सूचीबद्ध करेंगे। साक्ष्यों के साथ रिपोर्ट उपायुक्त श्रम विभाग को भी भेजी जाएगी। वह तथ्यों का परीक्षण कर कार्रवाई की टिप्पणी करते हुए रिपोर्ट सीडीओ अथवा अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक को सौंपेंगे। सीडीओ कार्रवाई की संस्तुति करेंगे और डीएम कार्रवाई करेंगे।
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