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तहसील की फाइलें कबाड़ी की दुकान पर पहुंचने की जांच शुरू, पेशकार हटे
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बरेली। तहसीलदार सदर के न्यायालय से गायब हुईं करोड़ों की जमीनों के विवाद की छह फाइलें कथित रूप से करगैना में एक कबाड़ी की दुकान पर मिलने और एक फाइल अब भी गायब होने के मामले में प्रथमदृष्टया लापरवाही के दोषी पाए गए तहसीलदार के पेशकार को हटा दिया गया है। डीएम के आदेश पर एडीएम प्रशासन ने एसीएम कमलेश कुमार सिंह को जांच अधिकारी नियुक्ति किया है और उनसे हफ्ते भर में रिपोर्ट मांगी है। एसीएम ने इसके बाद शुक्रवार को ही इस प्रकरण की जांच शुरू कर दी।
तहसीलदार सदर के न्यायालय में 14 से 21 अक्तूबर के बीच लगी विभिन्न मुकदमों की तारीखों पर सुनवाई के लिए उनकी फाइलें तलाश की गईं तो सात फाइलें गायब मिलीं। ये सभी फाइलें करोड़ों कीमत की जमीनों के मुकदमों की थीं। पेशकार विक्रम सिंह की सूचना के मुताबिक उनके काफी तलाश करने के बाद भी तहसील के किसी कार्यालय में ये फाइलें नहीं मिलीं। 10-12 दिन गुजरने के बाद दो नवंबर को तहसीलदार सदर ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट डीएम को भेजी। तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने यह मामला जानकारी में आने के बाद एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दे दिया था। एफआईआर का आदेश होते ही नाटकीय ढंग से तीन नवंबर को छह फाइलें तहसील से करीब पांच किमी दूर करगैना पुलिस चौकी के सामने एक कबाड़ी की दुकान से वापस तहसील ले आई गईं।
बताया गया कि किसी वकील ने तहसील स्टाफ को सूचना दी थी कि फाइलें कबाड़ी की दुकान पर हैं। ग्राम सभा सफरी बनाम उस्माल अली रजा खान मुकदमे की फाइल अब भी गायब है। बुधवार को तहसीलदार ने डीएम को चिट्ठी लिखकर इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराने की अनुमति मांगी थी। डीएम नितीश कुमार ने एडीएम प्रशासन वीके सिंह से पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराकर रिपोर्ट देने को कहा है। एडीएम प्रशासन के आदेश पर जांच शुरू कर एसीएम कमलेश सिंह ने तहसील प्रशासन से इस प्रकरण से संबंधित रिकार्ड तलब कर लिए हैं।
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मैंने इस मामले की जांच एसीएम कमलेश कुमार को सौंपी है। साथ ही इस प्रकरण में संदिग्ध भूमिका मिलने पर पेशकार को हटा दिया गया है। जांच के बाद अग्रिम कार्रवाई तय की जाएगी। -वीके सिंह, एडीएम प्रशासन
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तहसीलदार सदर के न्यायालय में 14 से 21 अक्तूबर के बीच लगी विभिन्न मुकदमों की तारीखों पर सुनवाई के लिए उनकी फाइलें तलाश की गईं तो सात फाइलें गायब मिलीं। ये सभी फाइलें करोड़ों कीमत की जमीनों के मुकदमों की थीं। पेशकार विक्रम सिंह की सूचना के मुताबिक उनके काफी तलाश करने के बाद भी तहसील के किसी कार्यालय में ये फाइलें नहीं मिलीं। 10-12 दिन गुजरने के बाद दो नवंबर को तहसीलदार सदर ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट डीएम को भेजी। तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने यह मामला जानकारी में आने के बाद एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दे दिया था। एफआईआर का आदेश होते ही नाटकीय ढंग से तीन नवंबर को छह फाइलें तहसील से करीब पांच किमी दूर करगैना पुलिस चौकी के सामने एक कबाड़ी की दुकान से वापस तहसील ले आई गईं।
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बताया गया कि किसी वकील ने तहसील स्टाफ को सूचना दी थी कि फाइलें कबाड़ी की दुकान पर हैं। ग्राम सभा सफरी बनाम उस्माल अली रजा खान मुकदमे की फाइल अब भी गायब है। बुधवार को तहसीलदार ने डीएम को चिट्ठी लिखकर इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराने की अनुमति मांगी थी। डीएम नितीश कुमार ने एडीएम प्रशासन वीके सिंह से पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराकर रिपोर्ट देने को कहा है। एडीएम प्रशासन के आदेश पर जांच शुरू कर एसीएम कमलेश सिंह ने तहसील प्रशासन से इस प्रकरण से संबंधित रिकार्ड तलब कर लिए हैं।
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मैंने इस मामले की जांच एसीएम कमलेश कुमार को सौंपी है। साथ ही इस प्रकरण में संदिग्ध भूमिका मिलने पर पेशकार को हटा दिया गया है। जांच के बाद अग्रिम कार्रवाई तय की जाएगी। -वीके सिंह, एडीएम प्रशासन