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नवाबगंज जमीन घोटाला- सस्पेंड होने के नौ माह से ‘गायब’ है घोटाले का मास्टरमाइंड
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बरेली। नवाबगंज जमीन घोटाले में मास्टर माइंड रहे चकबंदी के अहलमद रमोद सक्सेना सस्पेंड होने के करीब नौ महीने बाद भी विभागीय अफसरों के सामने पेश नहीं हुआ है। जिला चकबंदी अधिकारी से पूर्व में उसे चार्जशीट भी जारी हुई थी, लेकिन अफसरों का कहना है कि उसने उसका जवाब भी बगैर साइन किए कागज पर भेजा था। रमोद सक्सेना के पेश न होने से इस मामले में आगे की कार्रवाई भी रुकी है। चकबंदी अधिकारी की तरफ से रमोद को फिर से दफ्तर में उपस्थित होने और जीवन निर्वहन भत्ता के लिए नोटिस जारी किया गया है।
नवाबगंज के गांव अटंगा चांदपुर के अबरार हुसैन की डंडिया नजमुल निशा में करीब सौ बीघा जमीन को खतौनी में जालसाजी करके उसे तारिक नाम के एक शख्स की मिल्कियत दिखा दी गई थी। जमीन का अमल दरामद भी करा दिया गया। शिकायत पर तत्कालीन एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने तत्कालीन एसीएम फार्स्ट जलालुद्दीन से जांच कराई। जांच में सामने आया था कि वर्ष 2005 में चकबंदी कोर्ट में अबरार की जमीन की खतौनी पर हापुड़ के तारिक का नाम दर्ज कर तहसील के खतौनी रिकॉर्ड में दाखिल खारिज कर दिया गया। वर्ष 2014 में उप संचालक चकबंदी रमाकांत शुक्ला ने इसे खारिज करने के आदेश दिए तो आरोपियों ने वर्ष 2016 में व्हाइटनर लगाकर उनका आदेश भी पलट दिया।
एडीएम सिटी की जांच में आखिरकार तारिक के बेटे फिरोज ने जालसाजी का भंडाफोड़ कर ही दिया। इस प्रकरण में जनवरी में ही निलंबित हो चुके चकबंदी के अहलमद रमोद सक्सेना ने अब तक न तो चार्जशीट का जवाब दिया है और न ही वह विभागीय दफ्तर में ही पेश हुआ है। विभागीय स्टाफ का कहना है कि रमोद ने पूर्व में चार्जशीट का जवाब दिया भी था, उसमें कोई साइन भी नहीं हैं। इसलिए उसके कोई मायने नहीं। जिला चकबंदी अधिकारी प्रेमचंद्र द्विवेदी ने रमोद सक्सेना को फिर से नोटिस जारी किया है।
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अहलमद रमोद सक्सेना ने न तो चार्जशीट का जवाब दिया है और न ही वह निलंबित होने के बाद से दफ्तर ही आए हैं। यह गंभीर प्रकरण है। एक बार फिर से अहलमद को नोटिस दिया गया है।
-प्रेमचंद्र द्विवेदी, जिला चकबंदी अधिकारी
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नवाबगंज के गांव अटंगा चांदपुर के अबरार हुसैन की डंडिया नजमुल निशा में करीब सौ बीघा जमीन को खतौनी में जालसाजी करके उसे तारिक नाम के एक शख्स की मिल्कियत दिखा दी गई थी। जमीन का अमल दरामद भी करा दिया गया। शिकायत पर तत्कालीन एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने तत्कालीन एसीएम फार्स्ट जलालुद्दीन से जांच कराई। जांच में सामने आया था कि वर्ष 2005 में चकबंदी कोर्ट में अबरार की जमीन की खतौनी पर हापुड़ के तारिक का नाम दर्ज कर तहसील के खतौनी रिकॉर्ड में दाखिल खारिज कर दिया गया। वर्ष 2014 में उप संचालक चकबंदी रमाकांत शुक्ला ने इसे खारिज करने के आदेश दिए तो आरोपियों ने वर्ष 2016 में व्हाइटनर लगाकर उनका आदेश भी पलट दिया।
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एडीएम सिटी की जांच में आखिरकार तारिक के बेटे फिरोज ने जालसाजी का भंडाफोड़ कर ही दिया। इस प्रकरण में जनवरी में ही निलंबित हो चुके चकबंदी के अहलमद रमोद सक्सेना ने अब तक न तो चार्जशीट का जवाब दिया है और न ही वह विभागीय दफ्तर में ही पेश हुआ है। विभागीय स्टाफ का कहना है कि रमोद ने पूर्व में चार्जशीट का जवाब दिया भी था, उसमें कोई साइन भी नहीं हैं। इसलिए उसके कोई मायने नहीं। जिला चकबंदी अधिकारी प्रेमचंद्र द्विवेदी ने रमोद सक्सेना को फिर से नोटिस जारी किया है।
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अहलमद रमोद सक्सेना ने न तो चार्जशीट का जवाब दिया है और न ही वह निलंबित होने के बाद से दफ्तर ही आए हैं। यह गंभीर प्रकरण है। एक बार फिर से अहलमद को नोटिस दिया गया है।
-प्रेमचंद्र द्विवेदी, जिला चकबंदी अधिकारी