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लाखों का पेमेंट लेकर, कुछ लाइटें लगाकर भागी कंपनी
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बरेली। सांसद धर्मेंद्र कश्यप की निधि के लाखों रुपये के बजट से जिस कंपनी को उनके निर्वाचन क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटें लगवाने का ठेका दिया गया था, वह कुछ गांवों में नाम भर के लिए कुछ लाइटें लगाने के बाद भुगतान लेकर निकल गई। इस कंपनी ने जो लाइटें लगवाईं, वे भी काफी घटिया क्वालिटी का निकलीं और कुछ ही समय में खराब हो गईं। चार साल से ज्यादा वक्त तक यह घोटाला फाइलों में ही दबा रहा। हाल ही में शिकायतें होने के बाद जब अधिकारियों ने अपनी गर्दन फंसती महसूस हुई तो उन्होंने कंपनी को नोटिस दिया है। इसमें खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त कराने की हिदायत के साथ चेतावनी भी दी है कि अगर जल्द ऐसा न किया तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा।
आंवला क्षेत्र के कई गांवों में सांसद धर्मेंद्र कश्यप की निधि से 348 स्ट्रीट लाइटों को लगाने की मंजूरी दी गई थी। इसके लिए वर्ष 2015-16 में दिल्ली की एक कंपनी एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेस लिमिटेड नाम की कंपनी को इन लाइटों को लगवाने के लिए 16.616 लाख रुपये का कांट्रेक्ट दिया गया। मगर कंपनी के स्टाफ और डीआरडीए के कुछ अफसर व कर्मचारियों की मिलीभगत से इस रकम को ठिकाने लगा दिया गया। बताते हैं कि कंपनी कुछ लाइटें लगाकर खिसक गई, जो लाइटें लगवाई भी गईं उनकी क्वालिटी खराब होने से वे कुछ ही दिन में एक-एक कर खराब हो गईं। स्ट्रीट लाइटों का यह घोटाला काफी समय तक डीआरडीए में दफन रहा। अफसरों ने इसकी कार्रवाई तो दूर, जांच तक नहीं कराई। उधर, इस मामले की शिकायत होने के बाद अफसरों ने खुद पर कार्रवाई से बचने के लिए कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर को नोटिस जारी कर दिया। इसमें अल्टीमेटम दिया गया है कि लाइटों को मानक के अनुरूप न लगाया गया तो कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को सिफारिश भेज दी जाएगी।
कंपनी के अधिकारियों से मांगे फोटोग्राफ.. कहां और कितनी लगी हैं लाइटें
कंपनी के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कंपनी सांसद निधि से स्वीकृत सभी लाइटों को ठीक कराने और लगवाने के बाद उसके फोटोग्राफी कराएं। इसके बाद उसकी नए सिरे से जांच भी कराई जाएगी। इसके बाद भी बाकी का पेमेंट होगा।
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यह मामला गंभीर है। कंपनी के अधिकारी विकास कार्यों की मीटिंग में भी नहीं आते हैं। सांसद निधि से स्ट्रीट लाइटें लगवाने और खराब लाइटों को सही कराने के लिए कंपनी को नोटिस दे दिया गया है।
-वीरेंद्र कुमार, पीडी, डीआरडीए
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आंवला क्षेत्र के कई गांवों में सांसद धर्मेंद्र कश्यप की निधि से 348 स्ट्रीट लाइटों को लगाने की मंजूरी दी गई थी। इसके लिए वर्ष 2015-16 में दिल्ली की एक कंपनी एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेस लिमिटेड नाम की कंपनी को इन लाइटों को लगवाने के लिए 16.616 लाख रुपये का कांट्रेक्ट दिया गया। मगर कंपनी के स्टाफ और डीआरडीए के कुछ अफसर व कर्मचारियों की मिलीभगत से इस रकम को ठिकाने लगा दिया गया। बताते हैं कि कंपनी कुछ लाइटें लगाकर खिसक गई, जो लाइटें लगवाई भी गईं उनकी क्वालिटी खराब होने से वे कुछ ही दिन में एक-एक कर खराब हो गईं। स्ट्रीट लाइटों का यह घोटाला काफी समय तक डीआरडीए में दफन रहा। अफसरों ने इसकी कार्रवाई तो दूर, जांच तक नहीं कराई। उधर, इस मामले की शिकायत होने के बाद अफसरों ने खुद पर कार्रवाई से बचने के लिए कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर को नोटिस जारी कर दिया। इसमें अल्टीमेटम दिया गया है कि लाइटों को मानक के अनुरूप न लगाया गया तो कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को सिफारिश भेज दी जाएगी।
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कंपनी के अधिकारियों से मांगे फोटोग्राफ.. कहां और कितनी लगी हैं लाइटें
कंपनी के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कंपनी सांसद निधि से स्वीकृत सभी लाइटों को ठीक कराने और लगवाने के बाद उसके फोटोग्राफी कराएं। इसके बाद उसकी नए सिरे से जांच भी कराई जाएगी। इसके बाद भी बाकी का पेमेंट होगा।
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यह मामला गंभीर है। कंपनी के अधिकारी विकास कार्यों की मीटिंग में भी नहीं आते हैं। सांसद निधि से स्ट्रीट लाइटें लगवाने और खराब लाइटों को सही कराने के लिए कंपनी को नोटिस दे दिया गया है।
-वीरेंद्र कुमार, पीडी, डीआरडीए