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रुहेलखंड विश्वविद्यालय: पूर्व कुलसचिव अजय कृष्ण निलंबित, भ्रष्टाचार व अनियमितताओं के आरोप में हुई कार्रवाई

Thu, 12 Jun 2025 10:35 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 12 Jun 2025 10:35 AM IST
सार

रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव रहे अजय कृष्ण यादव को शासन ने निलंबित कर दिया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव रहने के दौरान उन पर भ्रष्टाचार व अनियमितताओं के आरोप लगे थे। 

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Former Registrar of Rohilkhand University Ajay Krishna suspended on charges of corruption and irregularities
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव अजय कृष्ण यादव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव अजय कृष्ण यादव को शासन ने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप में निलंबित कर दिया है। वर्तमान में वह राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, अलीगढ़ में परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात हैं, पिछले महीने ही उनको कार्यालय निदेशक उच्च शिक्षा प्रयागराज से संबद्ध कर दिया गया था। पिछले साल वह रुविवि में कुलसचिव रहते हुए चर्चा में थे। कुलपति ने उनका कार्यालय सील कराते हुए पदमुक्त कर दिया था। 

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रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कई बार पत्र जारी कर कुलसचिव अजय के खिलाफ मिल रहीं शिकायतों की जानकारी उन्हें दी थी। बार-बार आग्रह के बाद भी न तो उनसे कोई सहयोग प्राप्त हो रहा था और न ही उन्होंने पत्र का कोई उचित जवाब दिया। इसको लेकर कुलसचिव को पिछले साल अप्रैल में प्रशासनिक कार्यों से हटाकर नेहरु केंद्र निदेशालय कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया। उप कुलसचिव सुनीता यादव को कुलसचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। 
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सात दिन के अंदर ही उनसे कार्यों पर जवाब मांगा गया था। विभागीय जांच के लिए कुलपति ने कुलसचिव कार्यालय को भी सील करा दिया था। कुलपति के इस आदेश को अजय कृष्ण ने चुनौती दी थी। शासन से राहत मिलने पर दोबारा काम संभालने के लिए पहुंचे तो कार्यालय नहीं खोला गया। हाईप्रोफाइल ड्रामे के बीच डुप्लीकेट चाभी बनवाकर कार्यालय खुलवाया गया था। इसके बाद अगले ही माह उनका तबादला महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में परीक्षा नियंत्रक के तौर पर कर दिया गया था।  

अब निदेशक उच्च शिक्षा करेंगे जांच 
अजय कृष्ण यादव पर आरोप हैं कि विगत वर्ष कुलसचिव के रूप में परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में धांधली, रिश्वतखोरी, एक विशेष वर्ग के महाविद्यालयों को प्राथमिकता देने और अपर्याप्त कमरों वाले संस्थानों को मान्यता दी गई। उनपर विषम सेमेस्टर परीक्षाओं के परिणाम लंबित होने और सम सेमेस्टर के पाठ्यक्रम पूरे न होने के बावजूद तीन महीने के अंतराल पर फिर से परीक्षा कराने संबंधी आरोप भी हैं। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल ने आदेश कर प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए अनुशासनिक कारवाई शुरू कर जांच अब निदेशक उच्च शिक्षा प्रयागराज को सौंपी है। निलंबन की अवधि में अब कार्यालय निदेशक उच्च शिक्षा प्रयागराज से संबद्ध रहेंगे।

शिक्षकों ने कर दिए थे कार के टायर पंक्चर
सूत्रों के अनुसार, कुलसचिव की ओर से लंबे समय से लगातार पत्र जारी किए जा रहे थे। कुलसचिव ने कुलपति की अनुमति के बिना फाइलों पर हस्ताक्षर और अन्य निर्णय भी लिए थे। इसके साथ ही कई शिक्षकों का वेतन भी रोक दिया था। इसके बाद शिक्षकों ने भी आरोप लगाया था कि कुलसचिव स्तर पर जानबूझकर फाइलों को रोका जा रहा है। इसको लेकर शिक्षकों ने कुलसचिव को चार घंटे तक बंधक भी बनाया था। धक्कामुक्की करते हुए अजय कृष्ण की कार के टायर भी पंक्चर कर दिए थे। 

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