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UP: बरेली में नवाब साहब की कोठी और 17 दुकानें वक्फ संपत्ति नहीं, शिया वक्फ बोर्ड पर लगा जुर्माना

Wed, 11 Jun 2025 01:57 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 11 Jun 2025 01:57 PM IST
सार

बरेली में नवाब मोहम्मद हुसैन खान की संपत्ति के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनकी वंशज हुमा जैदी के पक्ष में फैसला सुनाया है। वहीं तथ्यों को छिपाकर याचिका दाखिल करने पर यूपी शिया वक्फ बोर्ड पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। 

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Nawab sahab mansion and 17 shops in Bareilly are not Waqf property
UP Shia Waqf Board - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में नवाब मोहम्मद हुसैन खान की कोठी, इमामबाड़ा और 17 दुकानें वक्फ संपत्ति नहीं हैं। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने तथ्यों को छिपाकर निगरानी याचिका दाखिल करने पर यूपी शिया वक्फ बोर्ड पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जस्टिस जसप्रीत सिंह की एकल पीठ ने वक्फ डीड को शून्य घोषित करते हुए नवाब साहब की वंशज हुमा जैदी के पक्ष में यह फैसला सुनाया है। 

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शहर में किला सब्जी मंडी के पास नवाब साहब की करोड़ों की संपत्ति है। वर्ष 1934 में नवाब मोहम्मद हुसैन खान ने अपनी कोठी से सटी 17 दुकानों को वक्फ कर दिया था। कोठी के अंदर एक कमरा भी था। इसका इस्तेमाल मोहर्रम के दौरान मजलिस के लिए किया जाता था। इसको इमामबाड़ा कहा जाता है। 
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नवाब साहब की मौत के बाद उनकी बेटी ने सिविल जज बरेली की अदालत में वक्फ डीड को अवैध बताते हुए चुनौती दी थी। शिया वक्फ बोर्ड ने इसका विरोध किया, लेकिन मुकदमा हार गया। वक्फ डीड को अवैध और शून्य घोषित कर दिया गया। 

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शिया वक्फ बोर्ड ने घोषित कर दिया था वक्फ संपत्ति 
वर्ष 1962 में यूपी शिया वक्फ बोर्ड ने अपने रिकॉर्ड से उक्त वक्फ को हटा दिया। कोठी, इमामबाड़ा और कोठी के बाहर की 17 दुकानें नवाब के वंशजों की निजी संपत्ति बनी रहीं। इसके बाद कभी कोई मुतवल्ली भी नियुक्त नहीं किया गया। वर्ष 2015 में शिया वक्फ बोर्ड ने 17 दुकानों को फिर से वक्फ संपत्ति घोषित कर मुतवल्ली नियुक्त कर दिया।

नवाब मोहम्मद हुसैन खान के पौत्र नवाब तहव्वुर अली खान ने वर्ष 2015 के आदेश को यूपी वक्फ ट्रिब्यूनल लखनऊ में चुनौती दी। अप्रैल 2024 में वक्फ ट्रिब्यूनल लखनऊ ने मामले को स्वीकार कर लिया और वक्फ बोर्ड के 2015 के आदेश को रद्द कर दिया। इसके बाद शिया वक्फ बोर्ड ने एक नया मुद्दा उठाया और नवाब परिवार की कोठी व निजी इमामबाड़े को वक्फ संपत्ति होने का दावा किया। जून 2024 में डीएम बरेली/अतिरिक्त वक्फ आयुक्त को इस संबंध में लिखा गया।

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अतिरिक्त नगर मजिस्ट्रेट/ सहायक वक्फ आयुक्त ने नवाब परिवार की एकमात्र वारिस हुमा जैदी को उक्त कोठी और इमामबाड़े में निर्माण या विध्वंस न करने का निर्देश दिया। हुमा जैदी ने बोर्ड और एसीएम के उन आदेशों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जनवरी 2025 में हाईकोर्ट ने आदेशों पर रोक लगा दी। 

झूठा हलफनामा दायर किया
शिया वक्फ बोर्ड ने इस आदेश को छिपाया और वक्फ ट्रिब्यूनल लखनऊ के अप्रैल 2024 के फैसले के खिलाफ फरवरी 2025 में उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में सिविल रिवीजन याचिका दायर कर दी। झूठा हलफनामा दायर कर कहा कि इमामबाड़ा वक्फ संपत्ति है। हुमा जैदी ने विस्तृत जवाबी हलफनामा दायर किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हुमा जैदी के पक्ष में आदेश दिया है। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि कोठी और इमामबाड़ा कभी भी वक्फ संपत्ति नहीं थीं। 

मुतवल्ली ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती
मुतवल्ली सैय्यद जमीर रजा का कहना है कि नवाब साहब की दो पत्नियां थीं। पहली पत्नी हुसैनी बेगम को उन्होंने तलाक दे दिया था। दूसरी पत्नी शबदरी बेगम की कोई संतान नहीं थी। पहली पत्नी से उनको अनवरी बेगम नाम की बेटी थी। अनवरी बेगम के दो बेटे तहब्बर अली और सफदर अली थे। 

हुमा जैदी तहब्बर अली की बेटी हैं। सफदर अली अपनी संपत्ति बेच चुके हैं। वर्ष 1936 में नवाब साहब की मौत के बाद पहली पत्नी की संतानों ने वक्फ डीड को चुनौती दी थी। जमीर रजा ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। वक्फ संपत्ति के वह वैध मुतवल्ली हैं।

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