{"_id":"62cb3a5d82d829393843f19f","slug":"firing-on-family-bareilly-news-bly49097374","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुकदमे में समझौता न करने पर पीड़ित के घर पर बरसाए पत्थर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुकदमे में समझौता न करने पर पीड़ित के घर पर बरसाए पत्थर
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बरेली। रेत भरी ट्रॉली से कुचलकर दो बच्चों की मौत के बाद खनन माफिया के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराना पूरे परिवार पर भारी पड़ रहा है। इस मामले में समझौता न करने पर खनन माफिया के लोगों ने रविवार को घर में घुसकर मारपीट करने के साथ जमकर फायरिंग की। छतों से भी घर में पत्थर बरसाए। इस घटना में तीन महिलाओं समेत पांच लोग घायल हो गए। चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
शीशगढ़ के गांव रतनपुरा के पीड़ित इंदर खां के मुताबिक रविवार सुबह सात बजे वह परिवार के लोगों के साथ ईद उल अजहा की नमाज अदा करने मस्जिद जा रहे थे। घर से कुछ ही दूरी पर शहीद, शराफत, शकीर और आरिफ ने उन्हें घेर लिया और उन उन पर मुकदमे में समझौता करने का दबाव बनाने लगे। इससे इन्कार करते ही उन्होंने नाजायज असलहों से फायरिंग शुरू कर दी। वे लोग भागकर अपने घर में घुसे तो आरोपी भी पीछे-पीछे घर में घुस आए और उन पर चाकू और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
इंदर के मुताबिक मारपीट और चाकूबाजी में उनके परिवार की महशर, सहनुज और मुसकरिया समेत पांच लोग घायल हो गए। उनके घर से निकलने के बाद आरोपी अपने घरों की छतों पर चढ़ गए और पथराव शुरू कर दिया। इंस्पेक्टर शीशगढ़ अजय पाल सिंह के मुताबिक इंदर खां की तहरीर पर शहीद, शराफत, शकीर और आरिफ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। दूसरे पक्ष की भी तहरीर आई है। उसकी जांच की जा रही है।
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वर्दी पर फिर उठे सवाल...
सूचना देने के एक घंटे बाद पहुंची पुलिस, रिपोर्ट मामूली धाराओं में
बताया जाता है कि खनन माफिया के लोग करीब एक घंटे तक फायरिंग, पथराव और इंदर खां के परिवार के लोगों के साथ मारपीट करते रहे। मारपीट शुरू होते ही इंदर खां ने फोन पर इसकी सूचना शीशगढ़ पुलिस को दी लेकिन पुलिस घटनास्थल पर तब पहुंची जब आरोपी वहां से भाग चुके थे। यही नहीं, पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने और चाकू मारने के आरोप में धारा 323, 324 और 452 के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। बलवा, पथराव और फायरिंग करने के मामले में कोई धारा नहीं लगी है। बता दें कि शाही और शीशगढ़ पुलिस पर पहले से खनन माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगता रहा है। इस बार भी बेहद हल्की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करने पर शीशगढ़ पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने के लिए पुलिस ने दूसरे पक्ष से भी तहरीर ले ली है। इस पर रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी की जा रही है ताकि पीड़ित पक्ष पर समझौता करने का दबाव बनाया जा सके।
अफसरों ने दबा ली एसडीएम की रिपोर्ट
दो बच्चों की रेत भरी ट्रॉली से कुचलकर मौत होने के बाद एसडीएम मीरगंज ने डीएम और तत्कालीन एसएसपी को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें शीशगढ़ और शाही की पुलिस को दोनों थानों के सीमा क्षेत्र पर भाखड़ा नदी में अवैध खनन कराने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। बताया जाता है कि तत्कालीन एसएसपी ने इस रिपोर्ट पर कोई ध्यान नहीं दिया। शीशगढ़ और शाही के थाना प्रभारियों से जवाब तलब तक नहीं हुआ। बताया जाता है कि इस घटना के कुछ दिन शीशगढ़ पुलिस ने फिर अवैध खनन शुरू करा दिया लेकिन इस बार शाही पुलिस ने उसे बंद कर दिया।
यह था मामला
12 जून को भाखड़ा नदी में नहा रही इंदर खां की बेटी छह वर्षीय फलक और भतीजे सात वर्षीय साहिल को नदी में अवैध खनन कर रेत ले जा रहे ट्रैक्टर ट्रॉली ने कुचल दिया था। इस घटना में साहिल की मौके पर ही मौत हो गई थी। फलक को पुलिस ने जबरन मिनी बाईपास के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था जहां फीस मिलने तक डॉक्टरों ने इलाज करने से इनकार कर दिया। इस वजह से कुछ घंटे बाद उसकी भी मौत हो गई। इंदर खां का आरोप है कि उन्होंने इस मामले में आबिद, जाहिद, शराफत, मिराजु और कैसर के खिलाफ तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने सिर्फ आबिद और कैसर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। बाकी तीनों का नाम एफआईआर से निकाल दिया।
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शीशगढ़ के गांव रतनपुरा के पीड़ित इंदर खां के मुताबिक रविवार सुबह सात बजे वह परिवार के लोगों के साथ ईद उल अजहा की नमाज अदा करने मस्जिद जा रहे थे। घर से कुछ ही दूरी पर शहीद, शराफत, शकीर और आरिफ ने उन्हें घेर लिया और उन उन पर मुकदमे में समझौता करने का दबाव बनाने लगे। इससे इन्कार करते ही उन्होंने नाजायज असलहों से फायरिंग शुरू कर दी। वे लोग भागकर अपने घर में घुसे तो आरोपी भी पीछे-पीछे घर में घुस आए और उन पर चाकू और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
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इंदर के मुताबिक मारपीट और चाकूबाजी में उनके परिवार की महशर, सहनुज और मुसकरिया समेत पांच लोग घायल हो गए। उनके घर से निकलने के बाद आरोपी अपने घरों की छतों पर चढ़ गए और पथराव शुरू कर दिया। इंस्पेक्टर शीशगढ़ अजय पाल सिंह के मुताबिक इंदर खां की तहरीर पर शहीद, शराफत, शकीर और आरिफ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। दूसरे पक्ष की भी तहरीर आई है। उसकी जांच की जा रही है।
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वर्दी पर फिर उठे सवाल...
सूचना देने के एक घंटे बाद पहुंची पुलिस, रिपोर्ट मामूली धाराओं में
बताया जाता है कि खनन माफिया के लोग करीब एक घंटे तक फायरिंग, पथराव और इंदर खां के परिवार के लोगों के साथ मारपीट करते रहे। मारपीट शुरू होते ही इंदर खां ने फोन पर इसकी सूचना शीशगढ़ पुलिस को दी लेकिन पुलिस घटनास्थल पर तब पहुंची जब आरोपी वहां से भाग चुके थे। यही नहीं, पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने और चाकू मारने के आरोप में धारा 323, 324 और 452 के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। बलवा, पथराव और फायरिंग करने के मामले में कोई धारा नहीं लगी है। बता दें कि शाही और शीशगढ़ पुलिस पर पहले से खनन माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगता रहा है। इस बार भी बेहद हल्की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करने पर शीशगढ़ पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने के लिए पुलिस ने दूसरे पक्ष से भी तहरीर ले ली है। इस पर रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी की जा रही है ताकि पीड़ित पक्ष पर समझौता करने का दबाव बनाया जा सके।
अफसरों ने दबा ली एसडीएम की रिपोर्ट
दो बच्चों की रेत भरी ट्रॉली से कुचलकर मौत होने के बाद एसडीएम मीरगंज ने डीएम और तत्कालीन एसएसपी को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें शीशगढ़ और शाही की पुलिस को दोनों थानों के सीमा क्षेत्र पर भाखड़ा नदी में अवैध खनन कराने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। बताया जाता है कि तत्कालीन एसएसपी ने इस रिपोर्ट पर कोई ध्यान नहीं दिया। शीशगढ़ और शाही के थाना प्रभारियों से जवाब तलब तक नहीं हुआ। बताया जाता है कि इस घटना के कुछ दिन शीशगढ़ पुलिस ने फिर अवैध खनन शुरू करा दिया लेकिन इस बार शाही पुलिस ने उसे बंद कर दिया।
यह था मामला
12 जून को भाखड़ा नदी में नहा रही इंदर खां की बेटी छह वर्षीय फलक और भतीजे सात वर्षीय साहिल को नदी में अवैध खनन कर रेत ले जा रहे ट्रैक्टर ट्रॉली ने कुचल दिया था। इस घटना में साहिल की मौके पर ही मौत हो गई थी। फलक को पुलिस ने जबरन मिनी बाईपास के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था जहां फीस मिलने तक डॉक्टरों ने इलाज करने से इनकार कर दिया। इस वजह से कुछ घंटे बाद उसकी भी मौत हो गई। इंदर खां का आरोप है कि उन्होंने इस मामले में आबिद, जाहिद, शराफत, मिराजु और कैसर के खिलाफ तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने सिर्फ आबिद और कैसर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। बाकी तीनों का नाम एफआईआर से निकाल दिया।