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Bareilly News: स्मार्ट सिटी का कारनामा... वीआईपी इलाकों में बना दिए स्मार्ट टॉयलेट

Thu, 18 Jul 2024 07:26 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2024 07:26 AM IST
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Feat of Smart City... Smart toilets built in VIP areas
बरेली। स्मार्ट सिटी के नाम पर पर करोड़ों रुपये बर्बाद कर दिए गए। वीआईपी इलाकों में बनाए गए स्मार्ट टॉयलेट इसकी बानगी हैं। हर कोई हैरान है कि पॉश इलाकों में स्मार्ट टायलेट का क्या काम? बना भी दिए गए तो दो साल बाद भी शुरू क्यों नहीं हो पाए? इन तमाम सवालों के जवाब स्मार्ट सिटी के अफसर भी नहीं दे पा रहे हैं। फिलहाल, दो साल से ये स्मार्ट टॉयलेट शोपीस बने हुए हैं।
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स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने स्मार्ट टॉयलेट के नाम पर 5.97 करोड़ रुपये खर्च किए। 24 दिसंबर 2020 को इनको बनाने का काम शुरू किया गया। वर्ष 2022 में टॉयलेट बनकर तैयार हो गए। सेंसरयुक्त इन टॉयलेट्स में ऑटोमेटिक फ्लशिंग सिस्टम लगा है। शहर में 15 से ज्यादा स्मार्ट टॉयलेट बनाए गए हैं। इनमें गांधी उद्यान, सिविल लाइंस, बीआई बाजार, सीडीओ आवास के पास, सीआई पार्क, बलवंत सिंह मार्ग, संजय कम्युनिटी हॉल आदि स्थान शामिल हैं। ये सभी पॉश इलाकों में शुमार किए जाते हैं। अब दो साल से ये स्मार्ट टॉयलेट शोपीस बने खड़े हैं।
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अक्षर विहार पार्क के पास बना डाला स्मार्ट टॉयलेट
सिविल लाइंस में बलवंत सिंह मार्ग पर बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने स्मार्ट टॉयलेट बना दिया गया। यह पॉश इलाका है। किसी को समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर यहां स्मार्ट टॉयलेट की क्या जरूरत पड़ गई? न तो यह सार्वजनिक स्थान है, न ही कोई बाजार। आस पास कोठियां हैं। सामने बैंक। उनका अपना टॉयलेट है। सवाल यह है कि इसे यहां इस्तेमाल कौन करेगा?
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सुनसान मार्ग पर स्मार्ट टॉयलेट
होटल रोहिला से बिजली दफ्तर होते हुए कैंट जाने वाली सड़क पर यातायात कम ही रहता है। दिनभर यहां सन्नाटा पसरा रहता है। जहां स्मार्ट टॉयलेट बनाया गया है, वहां सामने विद्युत उपकेंद्र है। एक तो यहां स्मार्ट टॉयलेट की कोई जरूरत नहीं थी, दूसरे इसमें ताले लगे हुए हैं। इसलिए चाहकर भी कोई इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता।

गांधी उद्यान के पास भी बना दिया
गांधी उद्यान से आईजी कार्यालय की तरफ मुड़ने पर सड़क किनारे नीले रंगे के स्मार्ट टॉयलेट बने हुए हैं। यहां भी टॉयलेट बनाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि बेहतर होता इसे गांधी उद्यान के अंदर बना दिया जाता। यहां लोग घूमने आते हैं, लेकिन उनके लिए टॉयलेट नहीं है। ऐसे में इसकी उपयोगिता उद्यान के अंदर थी, जबकि इसे बाहर बना दिया गया।


नहीं हो सके टेंडर
स्मार्ट टॉयलेट स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए हैं। इनका टेंडर होना है। अगर टेंडर नहीं होता तो स्मार्ट सिटी कंपनी खुद इसे चलवाएगी। दो साल हो गए, लेकिन न तो टेंडर हुए न ही स्मार्ट सिटी के अफसर इसे चलवा रहे हैं। संवाद

स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्टों के टेंडर होने शुरू हो गए हैं। एक-एक करके टेंडर किए जा रहे हैं। - सुनील यादव, अपर नगर आयुक्त
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