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Bareilly News: औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध, किसानों ने बढ़े मुआवजे की मांग की
Sun, 24 May 2026 12:18 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 24 May 2026 12:18 AM IST
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भमोरा। ब्लॉक आलमपुर जाफराबाद के 10 गांवों के किसानों ने औद्योगिक गलियारे के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध किया है। उन्होंने शनिवार को गांव कुड्डा में एकत्र होकर सीएम को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार दीपक कुमार को दिया। किसानों ने भूमि का बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा, किसान के परिवार के एक सदस्य को रोजगार और स्थानीय युवाओं को उद्योगों में प्राथमिकता देने की मांग की।
किसान एकता संघ के नेतृत्व में हुई पंचायत के बाद यह ज्ञापन दिया गया। किसानों का कहना है कि ब्लॉक आलमपुर जाफराबाद की उपजाऊ कृषि भूमि को औद्योगिक गलियारे के लिए चिह्नित किया गया है। अधिकतर किसान खेती पर निर्भर हैं और अधिग्रहण से हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। उनका आरोप है कि वर्तमान निर्धारित दर के आधार पर मिलने वाला मुआवजा जमीन की वास्तविक बाजार कीमत के मुकाबले काफी कम है, जिससे उनको उचित न्याय नहीं मिलेगा।
किसान नेता डॉ. रवि नगर ने स्पष्ट किया कि वे विकास और उद्योग स्थापना के विरोधी नहीं हैं। हालांकि, किसानों के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो किसान व्यापक आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और शासन की होगी। इस दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने अपने हितों की रक्षा की मांग उठाई।
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किसान एकता संघ के नेतृत्व में हुई पंचायत के बाद यह ज्ञापन दिया गया। किसानों का कहना है कि ब्लॉक आलमपुर जाफराबाद की उपजाऊ कृषि भूमि को औद्योगिक गलियारे के लिए चिह्नित किया गया है। अधिकतर किसान खेती पर निर्भर हैं और अधिग्रहण से हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। उनका आरोप है कि वर्तमान निर्धारित दर के आधार पर मिलने वाला मुआवजा जमीन की वास्तविक बाजार कीमत के मुकाबले काफी कम है, जिससे उनको उचित न्याय नहीं मिलेगा।
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किसान नेता डॉ. रवि नगर ने स्पष्ट किया कि वे विकास और उद्योग स्थापना के विरोधी नहीं हैं। हालांकि, किसानों के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो किसान व्यापक आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और शासन की होगी। इस दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने अपने हितों की रक्षा की मांग उठाई।
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