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Bareilly News: तीन सौ बेड अस्पताल के निजीकरण के विरोध में किसानों का हल्ला बोल
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बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल के निजीकरण के विरोध में किसानों ने मंगलवार को कलक्ट्रेट और मंडलायुक्त कार्यालय परिसर में हल्ला बोला। सीएम को संबोधित ज्ञापन मंडलायुक्त को सौंपा।
दरअसल, बीते दिनों अधिकारियों की बैठक में तीन सौ बेड अस्पताल को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर संचालित करने की योजना बनी थी। किसान एकता संघ ने इसके विरोध में मोर्चा खोल दिया है। निर्णय को गरीबों, मजदूरों और किसानों के खिलाफ बताते हुए पदाधिकारी और कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट पहुंचे। मुख्यमंत्री, डीएम को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। राष्ट्रीय सचिव यज्ञ प्रकाश गंगवार ने अस्पताल के निजीकरण से राहत की उम्मीद टूटेगी।
किसान नेता डॉ. रवि नागर ने कहा कि अगर मांग पूरी न हुई तो फिर आंदोलन किया जाएगा। युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पंडित राजेश शर्मा ने अस्पताल के निजीकरण से मरीजों का शोषण होने की आशंका जताई।
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500 रुपये प्रति क्विंटल हो गन्ना मूल्य, थमे बिजली कटौती
भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के प्रदेश महासचिव विजेंद्र सिंह यादव ने गन्ने का बकाया दिलाने, पेराई सत्र शुरू कराने, गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग की। गांवों में न्यूनतम 18 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने की मांग की। अपर आयुक्त प्रशासन प्रीति जायसवाल ज्ञापन लेने पहुंचीं तो किसानों ने मंडलायुक्त से मिलकर समस्या बताने की बात कही। फिर 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मिला। मंडल अध्यक्ष सतवेंद्र सिंह कहलो ने बताया कि समस्याएं सुनकर मंडलायुक्त ने समाधान का आश्वासन दिया, तब धरना समाप्त हुआ। यहां प्रदेश उपाध्यक्ष ओमवीर सिसौदिया, प्रदेश सचिव शिशुपाल सिंह व अन्य किसान नेता मौजूद रहे। ब्यूरो
ये मुद्दे भी गूंजे
न्याय पंचायत स्तर पर अस्थायी गोशाला बनवाने, पीटीआर की फेंसिंग कराने, वन्यजीवों के हमले में जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी दिए जाने, धान का समर्थन मूल्य तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल करने, नहरों की सफाई कराने, समितियों पर प्रचुर मात्रा में खाद उपलब्ध कराने, नकली कीटनाशकों व उर्वरकों की बिक्री पर अंकुश लगाने, पात्रों को योजनाओं का लाभ दिए जाने, खनन माफिया पर कार्रवाई करने, मंडी समिति की व्यवस्था सुधारने आदि मुद्दे भी गूंजे।
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दरअसल, बीते दिनों अधिकारियों की बैठक में तीन सौ बेड अस्पताल को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर संचालित करने की योजना बनी थी। किसान एकता संघ ने इसके विरोध में मोर्चा खोल दिया है। निर्णय को गरीबों, मजदूरों और किसानों के खिलाफ बताते हुए पदाधिकारी और कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट पहुंचे। मुख्यमंत्री, डीएम को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। राष्ट्रीय सचिव यज्ञ प्रकाश गंगवार ने अस्पताल के निजीकरण से राहत की उम्मीद टूटेगी।
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किसान नेता डॉ. रवि नागर ने कहा कि अगर मांग पूरी न हुई तो फिर आंदोलन किया जाएगा। युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पंडित राजेश शर्मा ने अस्पताल के निजीकरण से मरीजों का शोषण होने की आशंका जताई।
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500 रुपये प्रति क्विंटल हो गन्ना मूल्य, थमे बिजली कटौती
भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के प्रदेश महासचिव विजेंद्र सिंह यादव ने गन्ने का बकाया दिलाने, पेराई सत्र शुरू कराने, गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग की। गांवों में न्यूनतम 18 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने की मांग की। अपर आयुक्त प्रशासन प्रीति जायसवाल ज्ञापन लेने पहुंचीं तो किसानों ने मंडलायुक्त से मिलकर समस्या बताने की बात कही। फिर 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मिला। मंडल अध्यक्ष सतवेंद्र सिंह कहलो ने बताया कि समस्याएं सुनकर मंडलायुक्त ने समाधान का आश्वासन दिया, तब धरना समाप्त हुआ। यहां प्रदेश उपाध्यक्ष ओमवीर सिसौदिया, प्रदेश सचिव शिशुपाल सिंह व अन्य किसान नेता मौजूद रहे। ब्यूरो
ये मुद्दे भी गूंजे
न्याय पंचायत स्तर पर अस्थायी गोशाला बनवाने, पीटीआर की फेंसिंग कराने, वन्यजीवों के हमले में जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी दिए जाने, धान का समर्थन मूल्य तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल करने, नहरों की सफाई कराने, समितियों पर प्रचुर मात्रा में खाद उपलब्ध कराने, नकली कीटनाशकों व उर्वरकों की बिक्री पर अंकुश लगाने, पात्रों को योजनाओं का लाभ दिए जाने, खनन माफिया पर कार्रवाई करने, मंडी समिति की व्यवस्था सुधारने आदि मुद्दे भी गूंजे।