{"_id":"675ca28ef5782c5c1f0afe05","slug":"eight-crores-spent-government-polytechnic-the-building-is-in-ruins-bareilly-news-c-4-bly1015-540349-2024-12-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: राजकीय पाॅलिटेक्निक पर आठ करोड़ खर्च, भवन हो रहा खंडहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: राजकीय पाॅलिटेक्निक पर आठ करोड़ खर्च, भवन हो रहा खंडहर
Sat, 14 Dec 2024 05:01 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 14 Dec 2024 05:01 PM IST
विज्ञापन
मृतक युवा दिव्यांश
बरेली राजकीय पॉलिटेक्निक के भवन निर्माण पर आठ करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, पर एक दिन भी पढ़ाई नहीं हो सकी। देखरेख के अभाव में अधूरा भवन खंडहर हो रहा है। दरवाजे-खिड़कियां गायब हो चुकी हैं। टूटे-फूटे भवन की मरम्मत और चहारदीवारी समेत अन्य अधूरे कार्यों को पूरा कराने के लिए पौने सात करोड़ रुपयों की दरकार है। इसका एस्टीमेट शासन को भेजा गया है। 12 साल से प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है।
मल्टी सेक्टोरल डेवलेपमेंट स्कीम (एमएसडीपी) (अब प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम) के अंतर्गत वर्ष 2011-12 में 12.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण मंजूर हुआ था। आठ करोड़ रुपये खर्च हो गए। कार्यदायी संस्था जल निगम की निर्माण शाखा ने वर्ष 2013 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से 4.30 करोड़ रुपये और मांगे, लेकिन जारी नहीं हुए। इस बीच भवन के विभिन्न हिस्से जर्जर होने लगे।
राजकीय पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य नरेंद्र कुमार और कार्यदायी संस्था के परियोजना प्रबंधक रघुवंशराम ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की उप निदेशक अंजना सिरोही के साथ निरीक्षण कर संयुक्त रिपोर्ट तैयार की। इसके आधार पर तीन अक्तूबर 2022 को 7.28 करोड़ रुपये का एस्टीमेट शासन को भेजकर बजट मांगा गया। मामला मुख्य सचिव तक पहुंचा। तब शासन स्तर से एस्टीमेट का मूल्यांकन किया गया। अब 6.78 करोड़ रुपये की मंजूरी देने पर सहमति बनी है।
विज्ञापन
इसका संज्ञान लेकर शासन के अनु सचिव मानिक चंद्र ने 16 मार्च 2024 को निदेशक प्राविधिक शिक्षा को पत्र भेजकर प्रस्ताव मांगा था, लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। राजकीय पाॅलिटेक्निक के प्रधानाचार्य का कहना है कि व्यय वित्त समिति की स्वीकृति मिल चुकी है, अब शासनादेश जारी होना है। अमर उजाला ब्यूरो
जितना बजट मिला, उसके हिसाब से काम कराया गया था। अब अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण कर एस्टीमेट मुख्यालय भेजा है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू कराएंगे। - रघुवंशराम, परियोजना प्रबंधक, जल निगम की निर्माण शाखा
सेंथल के अधूरे भवन की मौजूद स्थिति से निदेशालय को अवगत कराया है। वहां से जो निर्देश मिलेंगे, उसके अनुरूप काम होगा। अगर भवन मिल जाता है तो कक्षाओं का संचालन शुरू कराएंगे। - नरेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलिटेक्निक बरेली
विज्ञापन
मल्टी सेक्टोरल डेवलेपमेंट स्कीम (एमएसडीपी) (अब प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम) के अंतर्गत वर्ष 2011-12 में 12.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण मंजूर हुआ था। आठ करोड़ रुपये खर्च हो गए। कार्यदायी संस्था जल निगम की निर्माण शाखा ने वर्ष 2013 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से 4.30 करोड़ रुपये और मांगे, लेकिन जारी नहीं हुए। इस बीच भवन के विभिन्न हिस्से जर्जर होने लगे।
विज्ञापन
राजकीय पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य नरेंद्र कुमार और कार्यदायी संस्था के परियोजना प्रबंधक रघुवंशराम ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की उप निदेशक अंजना सिरोही के साथ निरीक्षण कर संयुक्त रिपोर्ट तैयार की। इसके आधार पर तीन अक्तूबर 2022 को 7.28 करोड़ रुपये का एस्टीमेट शासन को भेजकर बजट मांगा गया। मामला मुख्य सचिव तक पहुंचा। तब शासन स्तर से एस्टीमेट का मूल्यांकन किया गया। अब 6.78 करोड़ रुपये की मंजूरी देने पर सहमति बनी है।
विज्ञापन
इसका संज्ञान लेकर शासन के अनु सचिव मानिक चंद्र ने 16 मार्च 2024 को निदेशक प्राविधिक शिक्षा को पत्र भेजकर प्रस्ताव मांगा था, लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। राजकीय पाॅलिटेक्निक के प्रधानाचार्य का कहना है कि व्यय वित्त समिति की स्वीकृति मिल चुकी है, अब शासनादेश जारी होना है। अमर उजाला ब्यूरो
जितना बजट मिला, उसके हिसाब से काम कराया गया था। अब अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण कर एस्टीमेट मुख्यालय भेजा है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू कराएंगे। - रघुवंशराम, परियोजना प्रबंधक, जल निगम की निर्माण शाखा
सेंथल के अधूरे भवन की मौजूद स्थिति से निदेशालय को अवगत कराया है। वहां से जो निर्देश मिलेंगे, उसके अनुरूप काम होगा। अगर भवन मिल जाता है तो कक्षाओं का संचालन शुरू कराएंगे। - नरेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलिटेक्निक बरेली