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यूपी: ब्रिक्स सम्मेलन से बरेली के जरी-जरदोजी और फर्नीचर निर्यात को मिलेगी नई उड़ान, कारोबारियों में उत्साह

Wed, 16 Sep 2026 12:47 PM IST
Mukesh Kumar सौरभ श्रीवास्तव, संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
सौरभ श्रीवास्तव, संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Wed, 16 Sep 2026 12:47 PM IST
सार

ब्रिक्स सम्मेलन के व्यापारिक करारों से बरेली के कारोबारियों में उत्साह है। कारोबारियों को उम्मीद है कि इन समझौतों से पारंपरिक उद्योगों और कृषि उत्पादों को लाभ मिलेगा। जिले का सालाना कारोबार करीब 1450 करोड़ रुपये है। 

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BRICS summit to give a major boost to Bareilly Zari-Zardosi and furniture exports
जरी जरदोजी का काम करते लोग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के व्यापारिक करारों से बरेली के कारोबारियों में उत्साह है। इन समझौतों का उद्देश्य 'ईज ऑफ डूइंग कारोबार' को बेहतर बनाना और वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देना है। जिले के पारंपरिक उद्योगों जैसे जरी-जरदोजी, फर्नीचर और बांस के उत्पादों को इन करारों से लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे जिले की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

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जिले से हर साल लगभग 1450 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इसमें खाड़ी देशों को करीब 100 करोड़ रुपये का जरी-जरदोजी निर्यात शामिल है। बरेली का फर्नीचर और बांस से बना सामान भी विदेशों में पसंद किया जाता है। अब तक स्थानीय व्यापारियों को सीधी निर्यात सुविधा नहीं मिलती थी। अधिकांश माल दिल्ली के कारोबारियों के माध्यम से भेजा जाता था। राष्ट्रीय व्यापार कल्याण बोर्ड के सदस्य राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि ब्रिक्स देशों के साथ हुए नए करारों के बाद व्यापारियों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच मिलने की उम्मीद है। 
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मेंथा तेल और चावल निर्यात को लाभ 
बरेली मंडल से खाड़ी देशों और इस्राइल को मेंथा एसेंशियल ऑयल और फूड फ्लेवर का बड़ा निर्यात होता है। यह निर्यात लगभग 1200 करोड़ रुपये का है। खाड़ी देशों में इन उत्पादों का उपयोग परफ्यूम, शैंपू, क्रीम और विभिन्न खाद्य पदार्थों में होता है। जिले में 6 लाख टन चावल का उत्पादन होता है। यहां के कई चावल ब्रांड सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे देशों में लोकप्रिय हैं। बेहतर व्यापारिक संबंधों से इन कारोबारियों को भी लाभ मिलेगा। 

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बरेली मंडल को चावल उत्पादन और निर्यात क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां का बासमती और गैर-बासमती चावल देश के बड़े बंदरगाहों के जरिये विदेशों में भेजा जाता है। ब्रिक्स समझौतों से इस क्लस्टर को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह पहल स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक होगी। इन समझौतों से निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

स्थानीय उत्पादों के निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे
जिले में 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के तहत बांस के उत्पाद और फर्नीचर विदेशी खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। फर्नीचर कारोबारी सौरभ गर्ग ने बताया कि बांस से बने घर सजाने के सामान, सोफे, टेबल और कुर्सियों की विदेशों में अच्छी मांग है। 

उन्होंने कहा, ब्रिक्स देशों के साथ व्यापारिक समझौते होने से एसेंशियल ऑयल और अन्य स्थानीय उत्पादों के निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे। जिले में बड़े पैमाने पर फर्नीचर का काम होता है, लेकिन प्रत्यक्ष निर्यात की सुविधा न होना एक बड़ी बाधा है। बरेली में एक समर्पित फर्नीचर केंद्र बनने से व्यापारियों को सीधे विदेशी ऑर्डर मिल सकते हैं और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।

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