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सत्यापन के निर्देश जारी होते ही ‘कांपने’ लगे अफसर
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बरेली। परिषदीय स्कूलों में वित्तीय वर्ष 2019-20 में बांटे गए घटिया क्वालिटी के बैग, जूते, यूनिफार्म और स्वेटर की मिल रही शिकायतोें पर शासन की सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को स्कूल शिक्षा के महानिदेशक ने डीएम को पत्र भेजकर वितरण सामग्री की 15 दिनों में सत्यापन कर रिपोर्ट भेजने को कहा है। साथ ही, धांधली या क्वालिटी घटिया मिलने पर सत्यापन रिपोर्ट में कार्रवाई की संस्तुति करने को भी कहा गया है। निर्देश जारी होते ही बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली मची हुई है।
स्कूल शिक्षा के महानिदेशक विजय किरन आनंद की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि समग्र शिक्षा और बेसिक शिक्षा निदेशालय की ओर से वित्तीय वर्ष 2019-20 में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को विभिन्न मदों से बजट आवंटित किया गया है। इस बजट का सदुपयोग हुआ है या नहीं इसका सत्यापन करना बेहद जरूरी है। इसके लिए डीएम और सीडीओ की अध्यक्षता में एक समिति का गठन कर प्रत्येक ब्लॉक के 20-20 स्कूलों का रैंडम आधार पर सत्यापन कराने को कहा है। साथ ही, संबंधित सत्यापन रिपोर्ट 15 दिनों में शासन को भेजने को कहा है। बताया जाता है कि परिषदीय स्कूलों में विभिन्न मदों में करोड़ों के बजट से बच्चों को जूते, बैग, मोजे, यूनिफार्म और स्वेटर का वितरण किया गया है। लेकिन सूबे के ज्यादातर स्कूलों में हुए वितरण के दो से तीन माह में जूते, बैग, मोजे फट गए हैं। स्वेटर का वितरण अब तक नहीं हो सका है। कमोवेश यही हाल बरेली जिले का है। यहां अभी तक 50 फीसदी बच्चों को स्वेटर नहीं मिल सका है लेकिन अफसर 80 फीसदी स्वेटर वितरण का दावा कर रहे हैं। वहीं, बच्चे नंगे पांव स्कूल जाने को मजबूर हैं।
क्या कहती है अफसरों की रिपोर्ट
बीते दिनों शासन को सौंपी रिपोर्ट के मुताबिक बरेली में 361825 स्कूल बैग, 321827 जूते, 643654 मोजे के लक्ष्य के सापेक्ष वितरण हो चुका है। इसके अलावा 326777 लक्ष्य के सापेक्ष 307227 यूनीफार्म का वितरण हुआ है। वहीं, स्वेटर वितरण के 337135 लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 240000 स्वेटर वितरित किए जा चुके हैं। बताया जाता है कि स्कूल बैग, मोजे, जूते, यूनिफार्म करीब 50 फीसदी से ज्यादा बेकार हो चुके हैं। वहीं, स्वेटर वितरण पर शासन को भ्रामक रिपोर्ट भेजी गई है। शिक्षक संघ के मुताबिक अफसर अपनी साख बचाने के लिए शासन को गलत रिपोर्ट भेज रहे हैं। जिसकी पोल सत्यापन में खुलेगी।
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स्कूल शिक्षा के महानिदेशक विजय किरन आनंद की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि समग्र शिक्षा और बेसिक शिक्षा निदेशालय की ओर से वित्तीय वर्ष 2019-20 में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को विभिन्न मदों से बजट आवंटित किया गया है। इस बजट का सदुपयोग हुआ है या नहीं इसका सत्यापन करना बेहद जरूरी है। इसके लिए डीएम और सीडीओ की अध्यक्षता में एक समिति का गठन कर प्रत्येक ब्लॉक के 20-20 स्कूलों का रैंडम आधार पर सत्यापन कराने को कहा है। साथ ही, संबंधित सत्यापन रिपोर्ट 15 दिनों में शासन को भेजने को कहा है। बताया जाता है कि परिषदीय स्कूलों में विभिन्न मदों में करोड़ों के बजट से बच्चों को जूते, बैग, मोजे, यूनिफार्म और स्वेटर का वितरण किया गया है। लेकिन सूबे के ज्यादातर स्कूलों में हुए वितरण के दो से तीन माह में जूते, बैग, मोजे फट गए हैं। स्वेटर का वितरण अब तक नहीं हो सका है। कमोवेश यही हाल बरेली जिले का है। यहां अभी तक 50 फीसदी बच्चों को स्वेटर नहीं मिल सका है लेकिन अफसर 80 फीसदी स्वेटर वितरण का दावा कर रहे हैं। वहीं, बच्चे नंगे पांव स्कूल जाने को मजबूर हैं।
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क्या कहती है अफसरों की रिपोर्ट
बीते दिनों शासन को सौंपी रिपोर्ट के मुताबिक बरेली में 361825 स्कूल बैग, 321827 जूते, 643654 मोजे के लक्ष्य के सापेक्ष वितरण हो चुका है। इसके अलावा 326777 लक्ष्य के सापेक्ष 307227 यूनीफार्म का वितरण हुआ है। वहीं, स्वेटर वितरण के 337135 लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 240000 स्वेटर वितरित किए जा चुके हैं। बताया जाता है कि स्कूल बैग, मोजे, जूते, यूनिफार्म करीब 50 फीसदी से ज्यादा बेकार हो चुके हैं। वहीं, स्वेटर वितरण पर शासन को भ्रामक रिपोर्ट भेजी गई है। शिक्षक संघ के मुताबिक अफसर अपनी साख बचाने के लिए शासन को गलत रिपोर्ट भेज रहे हैं। जिसकी पोल सत्यापन में खुलेगी।
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