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टेंशन को साइड में रख खूब एंज्वाय किया एक्जाम

Tue, 19 May 2015 01:31 AM IST
बरेली
बरेली Updated Tue, 19 May 2015 01:31 AM IST
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 एक्जाम के नाम से कांपने वाले बच्चों को शायद इन मेधावियाें की बात थोड़ी खटके। जिले में टॉप करने वाले टॉपर्स ने एक्जाम को एक भूत की तरह नहीं बल्कि एंज्वायमेंट में ही पार कर दिया। टाइम का शेड्यूल बनाया और उसका अच्छे से पालन किया। टीवी देखने और मस्ती करने में भी नहीं चूके, लेकिन पढ़ाई के समय जी भी नहीं चुराया।, इसलिए रिजल्ट सामने हैं। टॉपर्स का साफ कहना है कि साल भर तक जितनी भी तैयारी करो आखिरी समय में उसे ही पढ़ो। टाइम मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। जिले में 12 वीं में पांचवां स्थान पाने वाली अदिति शर्मा बताती हैं कि उन्हाेंने एक्जाम के समय बिल्कुल भी टेंशन नहीं लिया। जमकर टीवी पर अपने कार्यक्रम देखे और सोशल साइट्स पर भी लगातार अपडेट रही। उन्हाेंने बताया कि सिर्फ पढ़ाई के समय बिल्कुल शांत हो जाती थी। मारिया गोरटी की इफरा शमसी ने बताया कि उन्हाेंने तो एक्जाम शुरू होने से तीन माह पहले कसकर तैयारी की। हालांकि इससे पहले पढ़ती थी, लेकिन तीन माह में मस्ती से ध्यान हटाकर सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दिया। हार्टमैन के आदिल खान बताते हैं कि एक्जाम में बाहर जाने पर रोक थी, लेकिन इससे पहले पूरे साल कोई टेंशन नहीं ली। दसवीं के टॉपर मो. याहम बताते हैं कि एक्जाम में अगर टीवी देखने का मौका मिला तो जरूर देखा। साथ में खेल भी बंद नहीं किया था। क्याेंकि तैयारी पहले से थी।

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इंसेट...
सोशल साइट्स को दसवीं टापर्स का ‘नो’
बरेली। दुनिया भर में सोशल नेटवर्किंग साइट्स को लेकर हल्ला मचा है। फेसबुक में जाने-अनजाने ऐसी ऐसी बातें पोस्ट की जा रही हैं कि मामला कोर्ट तक पहुंच रहा है। टीन एजर्स यानी किशोर इन साइट्स पर सबसे ज्यादा एक्टिव हैं। लेकिन शायद टॉपर्स अभी भी इनसे दूरी बनाए हुए हैं। तभी तो सोमवार को आए आईसीएसई के रिजल्ट में जब दसवीं के मेधावियाें से सोशल साइट्स पर बात की तो उन्होंने अपनी भौं सिकोड़ ली। साइट्स के फायदे टापर्स ने बताएं लेकिन कहा कि अभी इसका उपयोग वे खुद नहीं कर रहे हैं। टॉपर्स के कक्षा में अधिकतर लोगों के अकाउंट कई सोशल साइट्स पर हैं, लेकिन वे कभी इसका मलाल नहीं करते और न ही मां बाप को गलत बताते हैं। जीपीएम की दिव्यांशी गोयल बताती हैं कि पढ़ाई के समय सोशल साइट्स की जरूरत नहीं। इनकी कक्षा में भी कई सहपाठियों के पास एफबी पर अकाउंट हैं, लेकिन इन्हाेंने नहीं बनाया। दिव्यांशी बताती हैं कि इंटरनेट पर प्रोजेक्ट के अलावा कुछ नहीं सर्च करतीं। 93.6 फीसदी अंक पाने वाली स्नेह दीक्षित कहती हैं कि उन्होंने अपनी मर्जी से सोशल साइट्स पर अपना कोई अकाउंट नहीं बनाया। हालांकि इसका फायदा और नुकसान भी है। 92.5 फीसदी अंक पाने वाले आदित्य बताते हैं कि सोशल साइट्स से कोई फायदा नहीं है। इससे टाइम की बर्बादी होती है। 92.2 फीसदी के साथ सिमरन कहती हैं कि एफबी और वाट्सएप पर एक्टिव होने की सही उम्र 11वीं के बाद है। महक सक्सेना कहती हैं कि हमारी उम्र के लोग सोशल साइट्स का गलत उपयोग कर रहे हैं, इसलिए अभी तो फिलहाल इससे दूर रहना है।
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