कोई इंजीनियरिंग बनना चाहे, कोई आईएएस
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95.25 फीसदी अंकों से 12 वीं में दूसरा स्थान पाने वाले हार्टमैन कॉलेज के आदिल खान केमिस्ट्री में सिर्फ 78 अंक मिलने से निराश हैं। उनको इस विषय में 94 अंक मिलने की उम्मीद थी। अब वह कापी की रीचेकिंग कराएंगे। पीसीएम ग्रुप के आदिल आईआईटी का इंट्रेंस निकाल चुके हैं। इंजीनियरिंग करने के बाद वह राइटर बनना चाहते हैं। वह शास्त्रीनगर में रहने वाले इंजीनियर शुजाउल्ला खां और तब्बशुम अजीम के बेटे हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय टीचर नमिता मेहरोत्रा और राजीव पांडेय को दिया।
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95.20 फीसदी अंक के साथ 12 वीं की जिले में तीसरी टॉवर सेंट मॉरिया कॉलेज की याशना जवरानी देश सेवा के लिए आईएएस अफसर बनना चाहती हैं। हालांकि इससे पहले उनका इरादा इलैक्ट्रानिकल से इंजीनियरिंग करने का है। वह नेहरू पार्क कालोनी में रहने वाले व्यवसायी गिरीश कुमार और काजल जवरानी की बेटी हैं। याशना ने बताया कि उनको जितने नंबर की उम्मीद थी, उतने ही मिले हैं।
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जज बनना चाहती हैं अदिति
12 वीं में जिले में पांचवा स्थान पाने वाली सेंट मॉरिया गोरेटी की अदिति शर्मा ने पढ़ाई को लेकर कभी टेंशन नहीं ली। उन्होंने बताया कि दिन भर मां कहती थीं कि कब पढ़ोगी लेकिन रोजाना तीन घंटे टेलिविजन देखने और सहेलियों से फोन पर बतियाने के बाद जितना समय मिलता था, उसमें पढ़ती थीं फिर भी अच्छे नंबर के सवाल पर बोलीं- मेरा फंड़ा रहा, जितना पढ़ो, मन से पढ़ो, इसीलिए अपेक्षा के मुताबिक नंबर हासिल कर लिए। गार्डन सिटी में रहने वालीं अदिति कोर्ट में पेशकार सुनील दत्त शर्मा और गृहणी ममता शर्मा की बेटी हैं। वह पांच वर्षीय लॉ करने के बाद जज बनना चाहती हैं।
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इफरा बोली- सिर्फ तीन महीने ही की पढ़ाई
94.25 फीसदी अंक के साथ जिले में छठा स्थान पाने वाली 12 वीं की इफरा शम्सी ने बताया कि परीक्षा से पहले उन्होंने सिर्फ तीन महीने ही पढ़ाई की लेकिन मन लगाकर पढ़ीं और टॉपर बन गईं। सेंट मॉरिया की छात्रा इफरा शाहबाद में रहने वाले खावर जमाल शम्सी और शीरी की बेटी हैं। उन्होंने कामर्स से 12 वीं पास की है और सीएस बनना चाहती हैं, इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
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स्कॉलरशिप से पढ़कर टॉपर बने तुषार
बरेली। जीपीएम के 12 वीं टॉपर तुषार अग्रवाल ने 92.5 फीसदी पाए हैं। तुषार की मां अपर्णा गृहणी हैं। श्यामगंज में इनकी शॉप बंद होने के बाद इनके पिता परेश कुमार ने प्राइवेट वर्क करके परिवार की जिम्मेदारी आगे बढ़ाई। तुषार के दो भाई और दो बहनें भी हैं। तुषार इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे हैं। उन्हाेंने बताया कि अगर पापा का साथ और कोचिंग की स्कॉलरशिप न मिलती तो पढ़ाई में काफी दिक्कत आती। रामपुरबाग स्थित कोचिंग ने तुषार को स्कॉलरशिप उपलब्ध कराई, जिससे तुषार की हिम्मत बढ़ी और उसने पढ़ाई कर टॉप किया।
उदित ने अपनाया अनुशासन का फंड़ा
जीपीएम स्कूल में 92.25 फीसदी अंक पाने वाले उदित मेहरोत्रा कहते हैं कि अगर अनुशासन नहीं है तो कभी सफलता नहीं मिल सकती। फिर चाहे यह शिक्षक और छात्र के बीच हो या फिर अभिभावकों के साथ। उदित के पिता शिवेंद्र मेहरोत्रा व्यापार करते हैं जबकि मां सरिता गृहणी हैं। इंजीनियरिंग करने की ख्वाहिश रखने वाले उदित बताते हैं कि वे निजी कालेज से इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे हैं। इनके बड़े भाई ने होटल मैनेजमेंट किया है। उदित ने बताया कि सुबह पढ़ना सबसे सरल रास्ता है अच्छे अंक पाने का।
कोचिंग केवल समय प्रबंधन के लिए जरूरी
92 फीसदी अंक पाने वाली जीपीएम की अदिति बताती हैं कि जरूरी नहीं है कि कोचिंग करने के बाद ही बच्चे अच्छे अंक ला सक ते हैं। बिना कोचिंग के भी सफलता मिलती है लेकिन कोचिंग समय प्रबंधन के लिए जरूरी है। कोचिंग से पढ़ने का एक समय निश्चित हो जाता है, बस इसी से दिक्कत नहीं होती। अदिति के पिता सुरेश रस्तोगी सर्राफा दुकानदार हैं और मां प्रीति गृहणी हैं। अदिति को सीए बनना है।
किसान का बेटा बनेगा इंजीनियर
आंवला के रहने वाले अंशुल शर्मा के पिता मनोज शर्मा किसान हैं। अंशुल बरेली में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। अंशुल को 91.75 फीसदी अंक मिले हैं। अंशुल बताते हैं कि अभी उन्हाेंने जेईई मेन परीक्षा दी है। इसमें 107 नंबर पर उनका स्थान है। आगे एडवांस की परीक्षा देकर आगे आना है। अगर आईआईटी में एडमिशन मिला तो ठीक नहीं तो एक साल ड्रॉप करूंगा और फिर आईआईटी के लिए परीक्षा दूंगा। अंशुल के घर में इनकी मां मीता शर्मा और एक बहन है।
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दसवीं टापर्स बातचीत- जीपीएम स्कूल
फोटो- द्वियांशी 94%
पिता के सपने को द्वियांशी लेंगी गोद
10 वीं में 94 फीसदी अंक पाने वाली जीपीएम की द्वियांशी बताती हैं कि उनके पिता आईएएस बनना चाहते थे, लेकिन किसी कारणवश नहीं बन पाए, इसलिए उन्होंने उनके सपने को गोद लिया है। द्वियांशी का कहना है कि आजकल प्रशासनिक सेवा में भी तमाम तरह के आरोप लगना आम बात हो गई है। अधिकारियाें पर राजनैतिक दवाब कुछ ज्यादा ही बढ़ा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश सेवा के लिए आने वाले लोग भ्रष्टाचारी हो जाएं या चुप होकर बैठ जाएं। जब तक मुमकिन हो अपना काम पूरी ईमानदारी से करें।
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स्नेह को मिला परिवर से प्यार तो बनी बात
जीपीएम स्कूल की स्नेह दीक्षित 93.6 फीसदी अंक लाकर खुशी से उछल रही हैं। स्नेह का कहना है कि वह इंजीनियर बनना चाहती हैं इसलिए पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। पिता वाईसी दीक्षित एडवोकेट हैं। स्नेह की मां माधुरी दीक्षित ने उस समय स्नेह का साथ छोड़ दिया जब वह मात्र चार साल की थीं। दो साल दादी और बुआ ने स्नेह को खूब स्नेह दिया। छह साल की उम्र में स्नेह को ललिता दीक्षित मां के रूप में मिली जिनके साथ से स्नेह को और मजबूती दी। स्नेह का बड़ा भाई बारहवीं में हैं जबकि छोटी बहन चौथी कक्षा में।
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शिक्षक के बेटे आदित्य ने मारी बाजी
आदित्य ने 92.5 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। आदित्य बताते हैं कि उनको आईआईटी से इंजीनियरिंग करनी है। अगर इसमें जाना मुश्किल हुआ तो भी तैयारी जारी रहेगी। आदित्य के पिता अनिल कुमार त्यागी तिलक इंटर कालेज में शिक्षक हैं जबकि मीना त्यागी गृहणी हैं। अनिल परीक्षा में 12 घंटे पढ़ाई को देते हैं। अनिल सक्सेस फंडा बताते हैं कि आम समय में छह से सात और परीक्षा में अधिक घंटे पढ़ाई से अच्छे मिलते हैं। लेकिन पढ़ाई के दौरान अच्छा ब्रेक लेना जरूरी है।
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इंजीनियर बनकर पूरा करना है सपना
जीपीएम स्कूल की सिमरन ने 92.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। सिमरन के पिता राजेंद्र सिंह व्यापार करते हैं और मां शालिनी सिंह गृहणी हैं। सिमरन बताती हैं कि उन्हें इंजीनियरिंग करने की ख्वाहिश है और इसकी तैयारी अभी से करनी शुरू कर दी है। कोचिंग के साथ छात्राें को खुद से भी पढ़ाई करना बहुत जरूरी है। सिमरन बताती हैं कि अक्सर सिर्फ छात्र कोचिंग पर ही डिपेंड हो जाते हैं जो गलत है। ऐसा नहीं करना चाहिए। स्कूल से पढ़ने के बाद कोचिंग को अतिरिक्त पढ़ाई के तौर पर लेंगे तो सफलता मिलेगी।
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आईएएस बनकर करनी है देश सेवा
आईएएस बनने की तमन्ना लिए जीपीएम की महक सक्सेना ने 10 वीं में 90.4 फीसदी अंक पाए हैं। महक उम्र में जितनी छोटी हैं आंखों में सपने उतने ही बड़े बड़े हैं। महक के पिता राजीव कंप्यूटर प्रोग्रामर हैं और मां रश्मि टीचर। महक कहती हैं कि सुबह जल्दी उठकर पढ़ना और करीब सात से आठ घंटे अच्छे से पढ़ाई करने में देते हैं तो कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ती है। छात्राें को स्कूल से ही उतनी मदद मिल जाती है। लेकिन कोचिंग से कुछ एक्सट्रा नोट्स मिल जाते हैं जो आगे काम आते हैं।
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