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यूपी बोर्ड: केंद्र बनने को राजी मगर मूल्यांकन से कॉलेजों का इनकार

Fri, 03 Jan 2020 01:32 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2020 01:32 AM IST
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मूल्यांकन केंद्र को लेकर उलझन में अफसर
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बरेली। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा को शांतिपूर्ण और नकलविहीन संपन्न कराने के लिए अफसर हरकत में आ गए हैं। परीक्षाओं के बाबत कंट्रोल रूम बनना भी शुरू हो गया है, लेकिन अब तक परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन केंद्र के निर्धारण को लेकर अफसर उलझन में हैं। दरअसल, परीक्षा केंद्र बनने को सभी केंद्र राजी हैं, लेकिन मूल्यांकन केंद्र बनने से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में अफसरों ने कॉलेजों पर मूल्यांकन केंद्र बनने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि उनकी यह कवायद भी बेअसर होती दिख रही है।
यूपी बोर्ड सत्र 2019-20 की परीक्षाओं को समय से और नकलविहीन संपन्न कराने के लिए शासनादेश जारी हो चुका है। पिछले दिनों परीक्षा केंद्र बनाए जाने के लिए 133 कॉलेजों से प्राप्त दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 132 कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाए जाने की सूची जारी कर दी गई है। इन्हीं कॉलेजोें में से एक कॉलेज परिसर को बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन केंद्र बनाया जाना है। संबंधित मामले पर शासनादेश के तहत कॉलेजों से आवेदन आमंत्रित कि ए गए, लेकिन कोई कॉलेज राजी नहीं हुआ। बताया जाता है कि केंद्र बनाने में असमर्थ अफसर अब पिछले साल बनाए गए मूल्यांकन केंद्र गुलाबराय इंटर कॉलेज को इस बार भी केंद्र बनाने के लिए प्रयासरत हैं। उधर, जब इस मामले में कॉलेज के प्रिंसिपल को केंद्र बनाने संबंधी प्रस्ताव भेजा गया तो उन्होंने असमर्थता जताते हुए उसे लौटा दिया। इनकार से आहत अफसरों ने अब कार्रवाई की चेतावनी का नोटिस कॉलेज प्रधानाचार्य को थमा दिया है। इससे कॉलेज समेत कार्यालय में भी डीआईओएस के दबाव बनाए जाने का मामला चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, अफसर केंद्र निर्धारण के लिए मशक्कत करने के बजाय शासनादेश को दरकिनार कर जबरन एक ही कॉलेज पर दबाव बना रहे हैं। इससे मूल्यांकन केंद्र निर्धारण में लेटलतीफी हो रही है।
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अन्य कॉलेजों को भी मिले जिम्मेदारी
गुलाबराय कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एसपी पाठक का कहना है कि कॉलेज पिछले छह सालों से मूल्यांकन केंद्र बनाया जा रहा है। केंद्र बनाए जाने के दौरान कॉलेज का सारा स्टाफ व्यवस्था में जुटा रहता है। पल-पल की गतिविधियों पर निगाह रखनी पड़ती है। कॉपियों का रखरखाव, उनका ट्रांसपोर्र्टेशन, मूल्यांकन करने वाले शिक्षक की व्यवस्था समेत उनका मानदेय देने का कार्य प्रभार भी संबंधित केंद्र के प्रिंसिपल को संभालना पड़ता है। ऐसे में शिक्षण कार्य से ज्यादा सजगता कॉपियों के मूल्यांकन के दौरान रखनी पड़ती है। इसलिए केंद्र बनने से इनकार किया है। कहा, अबकी बार अन्य कॉलेजों को भी मौका मिलना चाहिए।
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कॉपियां चेक करने वाले शिक्षकों को नहीं मिला मानदेय
पिछले साल यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की कॉपियों को जांचने वालों को मानदेय नहीं मिला है। मामले पर संबंधित कॉलेेज के प्रिंसिपल को शिक्षक कॉल कर अपना मेहनताना मांग रहे हैं। कई बार इस प्रकरण से उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई। कॉपियों को जांचने वालों का मानदेय और व्यवस्था में खर्च हुई धनराशि को देने में अफसर लापरवाही करते हैं। माना जा रहा है कि इसलिए भी कॉलेज प्रबंधन मूल्यांकन केंद्र बनने से इनकार कर रहे हैं।

मूल्यांकन केंद्र बनाए जाने के लिए गुलाबराय कॉलेज से संबंधित जानकारियां मांगी हैं, लेकिन अब तक उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है। इसलिए केंद्र निर्धारण के लिए उच्चाधिकारियों को सूचना समय से नहीं दी जा सकी है। अंतिम बार पत्र दिया है अगर वांछित सूचना नहीं देंगे तो उच्चाधिकारियों को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
- मनभरन राम राजभर, डीआईओएस
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