चिन्मयानंद प्रकरणः मनाही के बाद भी परीक्षा देने पहुंची छात्रा, विश्वविद्यालय ने लौटाया
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विश्वविद्यालय के मना करने के बावजूद चिन्मयानंद प्रकरण की दुष्कर्म पीड़ित छात्रा मंगलवार को पुलिस अभिरक्षा में एलएलएम थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा देने पहुंच गई। लेकिन केंद्र प्रभारी ने प्रवेशपत्र न होने के चलते उसे परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं करने दिया।
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चार घंटे तक छात्रा परीक्षा केंद्र के बाहर ही गाड़ी में बैठी रही। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह ने छात्रा को परीक्षा के लिए अर्ह न होना बताते हुए एसएसपी शाहजहांपुर को पत्र लिखकर दिया तो पुलिस उसे लेकर लौट गई।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने 75 प्रतिशत उपस्थिति न होने और कोर्ट का कोई आदेश न होने का हवाला देकर सोमवार को ही छात्रा को परीक्षा दिलाने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद पुलिस अभिरक्षा में मंगलवार सुबह करीब पौने आठ बजे छात्रा फिर रुहेलखंड विश्वविद्यालय पहुंच गई।
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सूचना पर विधि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह, सुरक्षा प्रभारी सुधांशु शर्मा, प्रॉक्टोरियल बोर्ड और पुलिस पहुंच गई। प्रवेश पत्र न होने की स्थिति में छात्रा को परीक्षा केंद्र में घुसने से रोक दिया गया। इसके बाद पुलिसकर्मी रजिस्ट्रार डॉ. सुनीता पांडेय से मिलने, पहुंचे लेकिन वह नहीं मिलीं।
पुलिसकर्मियों ने कहा कि विश्वविद्यालय परीक्षा न दिलाने का कारण लिखकर दे। इस पर परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह ने एसएसपी शाहजहांपुर को संबोधित पत्र लिखकर पुलिसकर्मियों को दे दिया। इस पत्र में लिखा गया है कि छात्रा की उपस्थिति 75 प्रतिशत नहीं है।
इस वजह से उसका परीक्षा फार्म अग्रेसित नहीं किया गया है और प्रवेश पत्र भी जारी नहीं हुआ है। कोर्ट ने भी छात्रा को परीक्षा दिलाने के संबंध में विश्वविद्यालय को कोई आदेश नहीं दिया है, लिहाजा छात्रा परीक्षा के लिए अर्ह नहीं है। इसके बाद पूर्वाह्न करीब 11.30 बजे पुलिस छात्रा को लेकर लौट गई।
आगे क्या करना है... अब पापा देखेंगे
मीडिया से बातचीत में परीक्षा से रोके जाने के सवाल पर छात्रा ने कहा कि कोर्ट चाहता तो पुलिस अभिरक्षा में ही उसकी पढ़ाई हो जाती और उसकी उपस्थिति की समस्या का समाधान हो जाता। जब उससे पूछा गया कि क्या कोर्ट में इस बावत उसने आवेदन किया है तो वह टाल गई। आगे क्या करना है, इस सवाल पर कहा कि पापा हमारे मामले की पैरवी कर रहे हैं, अब इसे भी वही देखेंगे।
‘कोर्ट ने छात्रा को परीक्षा दिलाने के संबंध में विश्वविद्यालय को कोई निर्देश नहीं दिया है। कोर्ट अगर छात्रा को राहत देते हुए विश्वविद्यालय को कोई निर्देश देगा तो उसके लिए विशेष परीक्षा भी करा दी जाएगी।’
- प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
चार घंटे तक छात्रा परीक्षा केंद्र के बाहर ही गाड़ी में बैठी रही। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह ने छात्रा को परीक्षा के लिए अर्ह न होना बताते हुए एसएसपी शाहजहांपुर को पत्र लिखकर दिया तो पुलिस उसे लेकर लौट गई।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन ने 75 प्रतिशत उपस्थिति न होने और कोर्ट का कोई आदेश न होने का हवाला देकर सोमवार को ही छात्रा को परीक्षा दिलाने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद पुलिस अभिरक्षा में मंगलवार सुबह करीब पौने आठ बजे छात्रा फिर रुहेलखंड विश्वविद्यालय पहुंच गई।
सूचना पर विधि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह, सुरक्षा प्रभारी सुधांशु शर्मा, प्रॉक्टोरियल बोर्ड और पुलिस पहुंच गई। प्रवेश पत्र न होने की स्थिति में छात्रा को परीक्षा केंद्र में घुसने से रोक दिया गया। इसके बाद पुलिसकर्मी रजिस्ट्रार डॉ. सुनीता पांडेय से मिलने, पहुंचे लेकिन वह नहीं मिलीं।
पुलिसकर्मियों ने कहा कि विश्वविद्यालय परीक्षा न दिलाने का कारण लिखकर दे। इस पर परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह ने एसएसपी शाहजहांपुर को संबोधित पत्र लिखकर पुलिसकर्मियों को दे दिया। इस पत्र में लिखा गया है कि छात्रा की उपस्थिति 75 प्रतिशत नहीं है।
इस वजह से उसका परीक्षा फार्म अग्रेसित नहीं किया गया है और प्रवेश पत्र भी जारी नहीं हुआ है। कोर्ट ने भी छात्रा को परीक्षा दिलाने के संबंध में विश्वविद्यालय को कोई आदेश नहीं दिया है, लिहाजा छात्रा परीक्षा के लिए अर्ह नहीं है। इसके बाद पूर्वाह्न करीब 11.30 बजे पुलिस छात्रा को लेकर लौट गई।
आगे क्या करना है... अब पापा देखेंगे
मीडिया से बातचीत में परीक्षा से रोके जाने के सवाल पर छात्रा ने कहा कि कोर्ट चाहता तो पुलिस अभिरक्षा में ही उसकी पढ़ाई हो जाती और उसकी उपस्थिति की समस्या का समाधान हो जाता। जब उससे पूछा गया कि क्या कोर्ट में इस बावत उसने आवेदन किया है तो वह टाल गई। आगे क्या करना है, इस सवाल पर कहा कि पापा हमारे मामले की पैरवी कर रहे हैं, अब इसे भी वही देखेंगे।
‘कोर्ट ने छात्रा को परीक्षा दिलाने के संबंध में विश्वविद्यालय को कोई निर्देश नहीं दिया है। कोर्ट अगर छात्रा को राहत देते हुए विश्वविद्यालय को कोई निर्देश देगा तो उसके लिए विशेष परीक्षा भी करा दी जाएगी।’
- प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय