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कर्मचारियों के दबाव के आगे झुके अधिकारी
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में 35 करोड़ रुपये की अधिशेष धनराशि को बैंक खाते से निकालकर पब्लिक सेक्टर की पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस में जमा करने पर मचे घमासान के बीच कर्मचारियों के दवाब के आगे विश्वविद्यालय अफसरों ने समर्पण कर दिया। कई दिन की छुट्टी से लौटे कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने मिनिस्टीरियल स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एसोसिएशन के साथ बैठक की। इसके बाद कुलपति ने पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस में निवेश की गई राशि वापस लेने का आदेश जारी कर दिया। संभावना जताई जा रही है कि तीन दिन के अंदर यह धनराशि विश्वविद्यालय के खाते में वापस आ जाएगी।
पिछले सप्ताह मंगलवार को चर्चा शुरू हुई कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 150 करोड़ रुपये पब्लिक सेक्टर की पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में निवेश किए गए हैं। हंगामा मचा तो वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने यह धनराशि 35 करोड़ रुपये बताई और कहा कि अगर कर्मचारी चाहेंगे तो ये रुपये वापस ले लिए जाएंगे। इसके बाद कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय छुट्टी पर चले गए। सोमवार को लौटे तो मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष ओपी मिश्रा, सचिव मनोज पांडेय समेत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ उनकी बैठक हुई।
ओपी मिश्रा के मुताबिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस फाइनेंस कंपनी में प्रदेश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों समेत कई विभागों ने निवेश किया है। साथ ही बताया कि बैंक की अपेक्षा इसमें ज्यादा ब्याज मिलता है। मगर यह राशि वापस भी ली जा सकती है, जिसमें ब्याज में कटौती होगी लेकिन मूलधन पूरा सुरक्षित है। इस पर कर्मचारी एसोसिएशन ने यह राशि वापस लेने की बात कही तो कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने इस संबंध में वित्त अधिकारी को आदेश जारी कर दिए।
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कर्मचारियों को शक, क्या कंपनी मान जाएगी
मीटिंग में रुपये वापस लेने को लेकर निर्णय होने के बाद विश्वविद्यालय के कर्मचारी संतोष व्यक्त कर रहे हैं। मगर उनके मन में अब भी शंका है। उनका कहना है कि क्या फाइनेंस कंपनी इतनी आसानी से रुपये वापस कर देगी।
विदाई समारोह में मंच से की घोषणा
विश्वविद्यालय में सोमवार को तृतीय श्रेणी कर्मचारी कामिनी जौहरी का रिटायरमेंट कार्यक्रम था। इसी दौरान कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने मंच से सभी कर्मचारियों के बीच यह रकम तीन-चार दिन में वापस लेने की घोषणा की। मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष ओपी मिश्रा का कहना है कि हमारे रकम वापस आनी चाहिए चाहे कुछ नुकसान ही क्यों न हो जाए।
शेयर मार्केट में नहीं लगाई विश्वविद्यालय की रकम
विश्वविद्यालय की धनराशि के मुद्दे पर पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की पीआर प्रियंका की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय की धनराशि शेयर मार्केट में नहीं लगाई गई है। उनके डिपॉजिट का मूल्यांकन नेशनल हाउसिंग बैंक और एसएलआर (स्टैचुरी लिक्विडिटी रेशो) द्वारा किया जाता है। इसमें हमने सौ फीसदी एसएलआर का इस्तेमाल किया है इसलिए फिक्स डिपॉजिट की धनराशि का शेयर की कीमतों से कोई मतलब नहीं है।
कर्मचारियों के साथ बैठक में धनराशि वापस लेने पर निर्णय लिया गया है। इसके लिए जरूरी कार्रवाई भी शुरू कर दी है, जल्दी ही पूरी रकम विश्वविद्यालय के बैंक खाते में वापस आ जाएगी। - प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति
पिछले सप्ताह मंगलवार को चर्चा शुरू हुई कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 150 करोड़ रुपये पब्लिक सेक्टर की पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में निवेश किए गए हैं। हंगामा मचा तो वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने यह धनराशि 35 करोड़ रुपये बताई और कहा कि अगर कर्मचारी चाहेंगे तो ये रुपये वापस ले लिए जाएंगे। इसके बाद कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय छुट्टी पर चले गए। सोमवार को लौटे तो मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष ओपी मिश्रा, सचिव मनोज पांडेय समेत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ उनकी बैठक हुई।
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ओपी मिश्रा के मुताबिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस फाइनेंस कंपनी में प्रदेश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों समेत कई विभागों ने निवेश किया है। साथ ही बताया कि बैंक की अपेक्षा इसमें ज्यादा ब्याज मिलता है। मगर यह राशि वापस भी ली जा सकती है, जिसमें ब्याज में कटौती होगी लेकिन मूलधन पूरा सुरक्षित है। इस पर कर्मचारी एसोसिएशन ने यह राशि वापस लेने की बात कही तो कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने इस संबंध में वित्त अधिकारी को आदेश जारी कर दिए।
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कर्मचारियों को शक, क्या कंपनी मान जाएगी
मीटिंग में रुपये वापस लेने को लेकर निर्णय होने के बाद विश्वविद्यालय के कर्मचारी संतोष व्यक्त कर रहे हैं। मगर उनके मन में अब भी शंका है। उनका कहना है कि क्या फाइनेंस कंपनी इतनी आसानी से रुपये वापस कर देगी।
विदाई समारोह में मंच से की घोषणा
विश्वविद्यालय में सोमवार को तृतीय श्रेणी कर्मचारी कामिनी जौहरी का रिटायरमेंट कार्यक्रम था। इसी दौरान कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने मंच से सभी कर्मचारियों के बीच यह रकम तीन-चार दिन में वापस लेने की घोषणा की। मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष ओपी मिश्रा का कहना है कि हमारे रकम वापस आनी चाहिए चाहे कुछ नुकसान ही क्यों न हो जाए।
शेयर मार्केट में नहीं लगाई विश्वविद्यालय की रकम
विश्वविद्यालय की धनराशि के मुद्दे पर पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की पीआर प्रियंका की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय की धनराशि शेयर मार्केट में नहीं लगाई गई है। उनके डिपॉजिट का मूल्यांकन नेशनल हाउसिंग बैंक और एसएलआर (स्टैचुरी लिक्विडिटी रेशो) द्वारा किया जाता है। इसमें हमने सौ फीसदी एसएलआर का इस्तेमाल किया है इसलिए फिक्स डिपॉजिट की धनराशि का शेयर की कीमतों से कोई मतलब नहीं है।
कर्मचारियों के साथ बैठक में धनराशि वापस लेने पर निर्णय लिया गया है। इसके लिए जरूरी कार्रवाई भी शुरू कर दी है, जल्दी ही पूरी रकम विश्वविद्यालय के बैंक खाते में वापस आ जाएगी। - प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति