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150 करोड़ का मामला- तीन करोड़ का नुकसान झेलो तो 35 करोड़ वापस ले लो
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में डेढ़ सौ करोड़ रुपये की अधिशेष धनराशि पब्लिक सेक्टर की फाइनेंस कंपनी में निवेश करने के बाद मचे घमासान के बाद वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय ने यह धनराशि 35 करोड़ बताते हुए वापस लाने का दावा कर दिया है। लेकिन यह 35 करोड़ रुपये वापस लेने पर विश्वविद्यालय को पौने तीन करोड़ रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ेगा। उधर, कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला और वित्त अधिकारी शुक्रवार को भी विश्वविद्यालय नहीं पहुंचे। 27 सितंबर तक चार बिंदुओं पर जवाब देने का अल्टीमेटम दे चुके कर्मचारी संगठन सोमवार को विश्वविद्यालय में बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।
मंगलवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बैंक में जमा डेढ़ सौ करोड़ रुपये प्राइवेट सेक्टर की कंपनी में निवेश करने का खुलासा हुआ था। इसमें आरोप लगाए गए कि कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय नियमविरुद्ध ढंग से यह धनराशि फाइनेंस कंपनी में निवेश कर दी। हालांकि वित्त अधिकारी ने इस धनराशि को सिर्फ 35 करोड़ रुपये बता रहे हैं। मगर कर्मचारियों के विरोध पर उन्होंने यह धनराशि फाइनेंस कमेटी के डिपोजिट से वापस बैंक में करने की बात कही गई है। ऐसे में यह अगर धनराशि वहां से निकाली गई तो इस पर आठ प्रतिशत की कटौती भी होगी और विश्वविद्यालय को 2.80 करोड़ रुपये का चूना भी लगेगा।
वहीं, शुक्रवार को भी कुलपति और वित्त अधिकारी विश्वविद्यालय में मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि कुलपति तो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के चलते बाहर गए हुए हैं लेकिन वित्त अधिकारी अचानक चले गए हैं। इसके चलते मिनिस्ट्रियल स्टाफ और कर्मचारी एसोसिएशन के चार बिंदुओं पर शुक्रवार को जवाब भी नहीं दिया जा सका। इसमें कर्मचारियों ने निवेश की धनराशि, नियम, विश्वविद्यालय की सरप्लस आय समेत चार बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। अब शनिवार और रविवार का अवकाश है, जिसके बाद सोमवार को कर्मचारी मामले में घमासान की तैयारी में हैं।
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मंगलवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय के बैंक में जमा डेढ़ सौ करोड़ रुपये प्राइवेट सेक्टर की कंपनी में निवेश करने का खुलासा हुआ था। इसमें आरोप लगाए गए कि कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला और वित्त अधिकारी सुरेश चंद्र उपाध्याय नियमविरुद्ध ढंग से यह धनराशि फाइनेंस कंपनी में निवेश कर दी। हालांकि वित्त अधिकारी ने इस धनराशि को सिर्फ 35 करोड़ रुपये बता रहे हैं। मगर कर्मचारियों के विरोध पर उन्होंने यह धनराशि फाइनेंस कमेटी के डिपोजिट से वापस बैंक में करने की बात कही गई है। ऐसे में यह अगर धनराशि वहां से निकाली गई तो इस पर आठ प्रतिशत की कटौती भी होगी और विश्वविद्यालय को 2.80 करोड़ रुपये का चूना भी लगेगा।
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वहीं, शुक्रवार को भी कुलपति और वित्त अधिकारी विश्वविद्यालय में मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि कुलपति तो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के चलते बाहर गए हुए हैं लेकिन वित्त अधिकारी अचानक चले गए हैं। इसके चलते मिनिस्ट्रियल स्टाफ और कर्मचारी एसोसिएशन के चार बिंदुओं पर शुक्रवार को जवाब भी नहीं दिया जा सका। इसमें कर्मचारियों ने निवेश की धनराशि, नियम, विश्वविद्यालय की सरप्लस आय समेत चार बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। अब शनिवार और रविवार का अवकाश है, जिसके बाद सोमवार को कर्मचारी मामले में घमासान की तैयारी में हैं।
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