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प्राचार्य जी! एलएलबी में फर्जी एडमिशन पर तो क्या विश्वविद्यालय करे कार्रवाई
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बरेली। फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के जरिये दिव्यांग बनकर एलएलबी में एडमिशन लेने वाले छात्रों पर एफआईआर होनी चाहिए थी लेकिन बरेली कॉलेज प्रशासन उनके एडमिशन तक रद्द करने को तैयार नहीं है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने इस पर नाराजगी जताते हुए प्राचार्य और मैनेजमेंट को इस मामले में कड़ी कार्रवाई न करने पर विश्वविद्यालय की ओर से कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
दिव्यांग होने का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर एलएलबी में एडमिशन लेने वालों पर 20 दिन बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और कॉलेज प्रशासन ने मामले को लटका दिया है। बता दें कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान ही अमर उजाला ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट से एडमिशन का मामला उठाया था। इस पर कॉलेज प्रशासन ने 30 छात्रों के मेडिकल सर्टिफिकेट जांच के लिए सीएमओ को भेज दिए, जिनमें से नौ सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। साथ ही इनमें से तीन सर्टिफिकेट पर एलएलबी में एडमिशन भी हो गया। एडमिशन निरस्त करने की बात आई तो प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा और मुख्य प्रवेश नियंत्रक डॉ. अनुराग मोहन के बीच इसे एक-दूसरे का कार्यक्षेत्र साबित करने की होड़ शुरू हो गई। न मुख्य प्रवेश नियंत्रक कार्रवाई करने को तैयार हुए न प्राचार्य, लिहाजा एडमिशन निरस्त नहीं हुए हैं और यह मामला राजभवन तक पहुंच गया है। इस पर शनिवार को कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए प्राचार्य को पत्र लिखा है।
फर्जी सर्टिफिकेट से एडमिशन लेने वालों पर प्राचार्य और मैनेजमेंट को निर्णय लेना चाहिए। प्राचार्य इस पर कार्रवाई करें, अन्यथा विश्वविद्यालय अपने स्तर से निर्णय लेगा। - प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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दिव्यांग होने का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाकर एलएलबी में एडमिशन लेने वालों पर 20 दिन बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और कॉलेज प्रशासन ने मामले को लटका दिया है। बता दें कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान ही अमर उजाला ने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट से एडमिशन का मामला उठाया था। इस पर कॉलेज प्रशासन ने 30 छात्रों के मेडिकल सर्टिफिकेट जांच के लिए सीएमओ को भेज दिए, जिनमें से नौ सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। साथ ही इनमें से तीन सर्टिफिकेट पर एलएलबी में एडमिशन भी हो गया। एडमिशन निरस्त करने की बात आई तो प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा और मुख्य प्रवेश नियंत्रक डॉ. अनुराग मोहन के बीच इसे एक-दूसरे का कार्यक्षेत्र साबित करने की होड़ शुरू हो गई। न मुख्य प्रवेश नियंत्रक कार्रवाई करने को तैयार हुए न प्राचार्य, लिहाजा एडमिशन निरस्त नहीं हुए हैं और यह मामला राजभवन तक पहुंच गया है। इस पर शनिवार को कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए प्राचार्य को पत्र लिखा है।
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फर्जी सर्टिफिकेट से एडमिशन लेने वालों पर प्राचार्य और मैनेजमेंट को निर्णय लेना चाहिए। प्राचार्य इस पर कार्रवाई करें, अन्यथा विश्वविद्यालय अपने स्तर से निर्णय लेगा। - प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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