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आईटीईपी कोर्स के संचालन को लगी लंबी कतार, मानकों में उलझे कॉलेज

Sun, 18 Aug 2019 01:29 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 18 Aug 2019 01:29 AM IST
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के संबद्ध कॉलेजों में चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) के संचालन को लेकर काफी उत्साह है लेकिन मानक पूरे करने में पसीना छूट रहा है। इसके चलते बरेली और मुरादाबाद मंडल में अब तक करीब 30 कॉलेजों को ही इस कोर्स की मान्यता मिल सकी है जबकि विश्वविद्यालय ने 250 से ज्यादा कॉलेजों को एनओसी दी थी।
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बता दें कि लंबे समय से इंटर के बाद शिक्षक बनने के लिए चार वर्षीय पाठ्यक्रम को लेकर चर्चा चल रही थी। कुछ लोगों का दावा था कि बीएड चार वर्ष का हो जाएगा। हालांकि संसद से चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम के संचालन को मंजूरी मिलने के बाद सारी स्थिति स्पष्ट हो गई। संसद की मंजूरी के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने भी संबद्ध कॉलेजों में इसके संचालन को मंजूरी दे दी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने यह पाठ्यक्रम संचालित करने के इच्छुक महाविद्यालयों से 26 जुलाई तक आवेदन मांगे थे। इस दौरान विश्वविद्यालय को 250 से अधिक आवेदन मिले थे। इनमें से मैनेजमेंट विवाद वाले कॉलेजों को छोड़कर बाकी सभी को एनओसी दे दी गई। इसके बाद एनसीटीई से मान्यता की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन बताया जाता है कि कड़े नियम होने के चलते अब तक करीब 30 कॉलेजों को ही मान्यता मिल सकी है। कुछ कॉलेज तो ऐसे हैं, जिनकी फीस भी जमा हो गई है लेकिन मानक पूरे न करने के चलते मान्यता फंस गई।
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अगले सत्र से होगा संचालन बचेगा एक साल का समय
आईटीईपी कोर्स की पढ़ाई अगले सत्र से शुरू होगी। इसमें इंटर के बाद ही शिक्षक की पढ़ाई करने का मौका मिलेगा, जिससे अभ्यर्थियों का एक साल का समय बचेगा। बता दें कि इस समय शिक्षक बनने के लिए स्नातक के बाद डीएलएड और बीएड जैसे कोर्स संचालित हैं। इनके जरिये शिक्षक बनने के लिए स्नातक के लिए तीन वर्ष और दो वर्ष में बीएड या बीएलएड करने में शिक्षक बनने के लिए पांच सात लगते थे। वहीं, इंटर के बाद आईटीईपी करके अभ्यर्थी चार साल में ही शिक्षक बन सकेंगे।
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